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Honorary PhD and Regular PhD Difference: क्या बिना पढ़े भी मिल सकती है पीएचडी की डिग्री? जानें मानद उपाधि और पीएचडी की उपाधि में अंतर

मानद डॉक्टरेट किसी विश्वविद्यालय की ओर से सम्मान के तौर पर दी जाती है. यह डिग्री उन लोगों को दी जाती है, जिन्होंने कला, समाज सेवा, राजनीति, शिक्षा के लिए या अन्य क्षेत्र में विशेष योगदान दिया है.

Honorary PhD and Regular PhD Difference: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और गोरखपुर से बीजेपी सांसद रवि किशन के बीच मंच पर हुई हल्की-फुल्की बातचीत चर्चा में हैं. दरअसल रवि किशन को भोपाल की एलएनसीटी यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में राज्यपाल मंगू भाई पटेल ने मानद डॉक्टरेट की उपाधि से सम्मानित किया. वहीं इसी बीच एक कार्यक्रम में रवि किशन को पीएचडी की मानक उपाधि मिलने पर सीएम योगी ने चुटकी ले ली.

दरअसल सीएम योगी ने मजाकिया अंदाज में बताया कि सांसद रवि किशन मेरे सामने आए और कहा कि मुझे पीएचडी उपाधि मिली है. हमने कहा कि वह मानद उपाधि है फिर कहने लगे की प्रोफेसर लिखूंगा. हमने कहा प्रोफेसर नहीं लिख सकते हैं. आप उस डिग्री को लेकर जाएंगे तो आपको उसके नाम पर नौकरी नहीं मिलेगी. इसके बाद एक बार फिर मानद पीएचडी और रेगुलर पीएचडी को लेकर चर्चा तेज हो गई. सोशल मीडिया पर लोग सवाल कर रहे हैं कि क्या बिना पढ़ाई और रिसर्च के भी किसी को पीएचडी के डिग्री मिल सकती है. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि बिना पढ़ाई के भी पीएचडी की डिग्री मिल सकती है या नहीं और मानद उपाधि और पीएचडी उपाधि में क्या अंतर होता है. 

क्या होती है मानद पीएचडी? 

मानद डॉक्टरेट किसी विश्वविद्यालय की ओर से सम्मान के तौर पर दी जाती है. यह डिग्री उन लोगों को दी जाती है, जिन्होंने कला, समाज सेवा, राजनीति, शिक्षा, विज्ञान के लिए या अन्य क्षेत्र में विशेष योगदान दिया है. इस उपाधि के लिए न प्रवेश परीक्षा देना पड़ती है, न रिसर्च करनी होती है और न ही थीसिस लिखनी पड़ती है. विश्वविद्यालय व्यक्ति के काम और समाज में उसके योगदान को देखते हुए यह सम्मान देता है. यही वजह है कि कई अभिनेता, उद्योगपति, लेखक और सामाजिक कार्यकर्ता भी मानद डॉक्टरेट से सम्मानित किए जाते हैं. 

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रेगुलर पीएचडी कैसे होती है?

रेगुलर पीएचडी एक अकादमिक और रिसर्च आधारित डिग्री होती है. इसके लिए छात्रों को विश्वविद्यालय में प्रवेश लेना पड़ता है. कई संस्थान में प्रवेश परीक्षा और इंटरव्यू भी देना होता है. इसके बाद वर्षों तक रिसर्च, अध्ययन और थीसिस तैयार करनी पड़ती है. रिसर्च पूरा होने के बाद उम्मीदवार को अपनी थीसिस एक्सपर्ट्स के सामने प्रेजेंट करनी होती है. यूजीसी और अन्य नियामक संस्थाओं के नियमों के बाद ही यह डिग्री दी जाती है. यही वजह है कि रेगुलर पीएचडी को एक शैक्षिक योग्यता माना जाता है. 

क्या मानद पीएचडी से बन सकते हैं प्रोफेसर?

भारत में विश्वविद्यालय और कॉलेज में पढ़ने के लिए रेगुलर पीएचडी नेट या एसईटी जैसी परीक्षाएं और यूजीसी के मानदंड पूरे करना जरूरी होता है. मानद उपाधि केवल सम्मान मानी जाती है. इसे नौकरी की योग्यता नहीं माना जाता है. वहीं मानद डॉक्टरेट पाने वाले कई लोग अपने नाम के आगे डॉक्टर लिखते हैं, लेकिन इसका इस्तेमाल एकेडमी या मेडिकल योग्यता के रूप में नहीं किया जा सकता है.

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कविता गाडरी बीते कुछ साल से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता की दुनिया से जुड़ी हुई है. राजस्थान के जयपुर से ताल्लुक रखने वाली कविता ने अपनी पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय भोपाल से न्यू मीडिया टेक्नोलॉजी में मास्टर्स और अपेक्स यूनिवर्सिटी जयपुर से बैचलर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में की है. 
पत्रकारिता में अपना सफर उन्होंने राजस्थान पत्रिका से शुरू किया जहां उन्होंने नेशनल एडिशन और सप्लीमेंट्स जैसे करियर की उड़ान और शी न्यूज के लिए बाय लाइन स्टोरी लिखी. इसी दौरान उन्हें हेलो डॉक्टर शो पर काम करने का मौका मिला. जिसने उन्हें न्यूज़ प्रोडक्शन के लिए नए अनुभव दिए. 

इसके बाद उन्होंने एबीपी नेटवर्क नोएडा का रुख किया. यहां बतौर कंटेंट राइटर उन्होंने लाइफस्टाइल, करंट अफेयर्स और ट्रेडिंग विषयों पर स्टोरीज लिखी. साथ ही वह कंटेंट मैनेजमेंट सिस्टम और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी लगातार सक्रिय रही. कविता गाडरी हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में दक्ष हैं. न्यूज़ राइटिंग रिसर्च बेस्ड स्टोरीटेलिंग और मल्टीमीडिया कंटेंट क्रिएशन उनकी खासियत है. वर्तमान में वह एबीपी लाइव से जुड़ी है जहां विभिन्न विषयों पर ऐसी स्‍टोरीज लिखती है जो पाठकों को नई जानकारी देती है और उनके रोजमर्रा के जीवन से सीधे जुड़ती है.

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