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UPSC परीक्षा में पहली बार AI का इस्तेमाल, कई उम्मीदवारों के सपनों पर लगा ब्रेक

AI का इस्तेमाल कर UPSC ने 500 से ज्यादा उम्मीदवारों की उम्मीदवारी को CSE एग्जाम से पहले ही रद्द कर दिया है. आइए जानते हैं क्या है पूरा मामला...

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  • पूजा खेडकर विवाद के बाद, UPSC ने AI अपनाया.
  • AI ने 569 अयोग्य आवेदन खारिज, नियम उल्लंघन रोका.
  • जाँच अब आवेदन स्तर पर AI द्वारा ही की गई.
  • AI ने 133 श्रेणी बदली आवेदनकर्ता निरस्त किए.

आप सभी को पूजा खेड़कर का नाम तो याद ही होगा. आपको याद होगा कि किस तरह एक ट्रेनी IAS अफसर पर अपनी पहचान और दस्तावेजों में कथित बदलाव कर UPSC के नियमों को दरकिनार करने के आरोप लगे थे. देशभर में इस मामले ने काफी सुर्खियां बटोरी थीं और UPSC की चयन प्रक्रिया पर भी कई सवाल खड़े हो गए थे. अब आगे इस तरह की किसी भी स्थिति से बचने के लिए UPSC ने कदम उठाया है. इसके लिए आयोग ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का सहारा लिया है.

दरअसल, यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन ने सिविल सेवा परीक्षा 2026 में पहली बार AI का इस्तेमाल किया और बड़ी कार्रवाई की. एग्जाम से पहले ही UPSC ने 569 ऐसे आवेदनों को खारिज कर दिया, जो नियमों के अनुसार अयोग्य पाए गए. इनमें कई ऐसे उम्मीदवार शामिल थे जिन्होंने तय सीमा से अधिक प्रयास कर लिए थे या एज लिमिट क्रॉस कर चुके थे. वहीं, कुछ मामलों में एक ही व्यक्ति द्वारा कई आवेदन भी किए गए थे.

रिपोर्ट्स के अनुसार ये कदम 2024 के चर्चित पूजा खेडकर मामले के करीब दो साल बाद उठाया गया है. पूजा खेडकर पर आरोप था कि उन्होंने नाम और माता-पिता के नाम में बदलाव कर निर्धारित प्रयासों की सीमा पूरी होने के बावजूद UPSC परीक्षा दी थी. बाद में उनकी उम्मीदवारी रद्द कर दी गई थी और सेवा से भी बर्खास्त कर दिया गया था.

पहली बार प्रीलिम्स से पहले हुई जांच

अब तक UPSC इस तरह की जांच इंटरव्यू चरण में करता था, यानी तब जब उम्मीदवार प्रीलिम्स और मेन्स दोनों परीक्षाएं पास कर लेते थे. लेकिन इस बार आयोग ने तकनीक का सहारा लेते हुए आवेदन चरण में ही जांच शुरू कर दी.

UPSC के अनुसार इस साल सिविल सेवा परीक्षा के लिए 8.18 लाख उम्मीदवारों ने आवेदन किया था, जबकि करीब 5.49 लाख अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल हुए. पिछले साल की तुलना में आवेदनों की संख्या में कमी भी दर्ज की गई है.

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AI ने 15 साल का रिकॉर्ड खंगाला

रिपोर्ट्स के अनुसार करीब 94 प्रतिशत उम्मीदवारों ने आधार आधारित सत्यापन का विकल्प चुना था. बाकी करीब 49 हजार आवेदनों की जांच AI की मदद से की गई. AI ने उम्मीदवारों के नाम, माता-पिता के नाम, जन्मतिथि और फोटो का मिलान कर डुप्लीकेट आवेदनों की पहचान की.

इसके बाद आयोग ने पिछले 15 वर्षों के रिकॉर्ड के आधार पर यह भी जांचा कि कहीं उम्मीदवार अपनी श्रेणी के लिए निर्धारित अधिकतम प्रयासों या आयु सीमा को तो पार नहीं कर चुके हैं.

AI से जांच में खुलासा

AI से चेकिंग के समय 43,497 ऐसे उम्मीदवार भी मिले जिन्होंने अपने पिछले प्रयासों की तुलना में इस बार श्रेणी बदली थी. उदाहरण के लिए, कुछ उम्मीदवारों ने पहले सामान्य वर्ग (General) में आवेदन किया था और इस बार EWS या अन्य आरक्षित श्रेणियों में आवेदन किया.

UPSC ने ऐसे सभी उम्मीदवारों को ईमेल भेजकर जानकारी सत्यापित की. जांच के बाद 133 आवेदन केवल इसी कारण रद्द कर दिए गए क्योंकि उम्मीदवार अपनी नई श्रेणी के हिसाब से अनुमत प्रयासों की सीमा पार कर चुके थे.

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रजनी उपाध्याय बीते करीब छह वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. उत्तर प्रदेश से ताल्लुक रखने वाली रजनी ने आगरा विश्वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएशन किया है. बचपन से ही पढ़ने-लिखने में गहरी रुचि थी और यही रुचि उन्हें मीडिया की दुनिया तक ले आई.

अपने छह साल के पत्रकारिता सफर में रजनी ने कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया. उन्होंने न्यूज, एंटरटेनमेंट और एजुकेशन जैसे प्रमुख वर्टिकल्स में अपनी पहचान बनाई. हर विषय में गहराई से उतरना और तथ्यों के साथ-साथ भावनाओं को भी समझना, उनकी पत्रकारिता की खासियत रही है. उनके लिए पत्रकारिता सिर्फ खबरें लिखना नहीं, बल्कि समाज की धड़कन को शब्दों में ढालने की एक कला है.

रजनी का मानना है कि एक अच्छी स्टोरी सिर्फ हेडलाइन नहीं बनाती, बल्कि पाठकों के दिलों को छूती है. वर्तमान में वे एबीपी लाइव में कार्यरत हैं, जहां वे एजुकेशन और एग्रीकल्चर जैसे अहम सेक्टर्स को कवर कर रही हैं.

दोनों ही क्षेत्र समाज की बुनियादी जरूरतों से जुड़े हैं और रजनी इन्हें बेहद संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के साथ संभालती हैं. खाली समय में रजनी को संगीत सुनना और किताबें पढ़ना पसंद है. ये न केवल उन्हें मानसिक सुकून देते हैं, बल्कि उनकी रचनात्मकता को भी ऊर्जा प्रदान करते हैं.

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