स्कूलों में परोसी जाएगी चिकन बिरयानी! इस राज्य की सरकार लेने जा रही बड़ा फैसला
तमिलनाडु सरकार की दोपहर भोजन योजना में हफ्ते में एक बार चिकन बिरयानी शामिल करने का प्रस्ताव सामने आया है. स्कूल शिक्षा मंत्री राजमोहन ने बताया कि प्रस्ताव CM विजय के पास विचार के लिए भेजा गया है.

तमिलनाडु सरकार की मिड डे मील योजना में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है. राज्य के स्कूल शिक्षा मंत्री राजमोहन ने कहा है कि सरकार इस बात पर विचार कर रही है कि छात्रों को हफ्ते में एक दिन चिकन बिरयानी परोसी जाए. उन्होंने बताया कि इस संबंध में एक प्रस्ताव मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय को भेजा गया है और वह इस पर विचार कर रहे हैं.
राजमोहन ने बुधवार को पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि तमिलनाडु की दोपहर भोजन योजना समय-समय पर कई बदलावों से गुजरी है. उन्होंने बताया कि जस्टिस पार्टी ने सबसे पहले भोजन योजना की शुरुआत की थी. इसके बाद कामराज सरकार ने इसे दोपहर भोजन योजना का रूप दिया. फिर करुणानिधि ने इसमें अंडे शामिल किए. एम. जी. रामचंद्रन ने इसे पौष्टिक भोजन योजना में बदला और बाद में जयललिता सरकार ने हर सप्ताह अंडे देने की व्यवस्था शुरू की.
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नाश्ते के मेनू में बदलाव की योजना
राजमोहन ने कहा कि जैसे पहले कई बदलाव किए गए थे, उसी तरह उनकी भी एक इच्छा है कि छात्रों को हफ्ते में एक बार चिकन बिरयानी दी जाए. उन्होंने बताया कि इस संबंध में जरूरी आंकड़ों और जानकारी के साथ एक औपचारिक प्रस्ताव मुख्यमंत्री को सौंप दिया गया है. शिक्षा मंत्री ने स्कूलों में दिए जाने वाले नाश्ते के मेनू में बदलाव की योजना के बारे में भी जानकारी दी. उन्होंने कहा कि वर्तमान में प्रति छात्र लगभग 15 रुपये का खर्च निर्धारित है. ऐसे में सरकार चाहती है कि गेहूं और रवा उपमा जैसे बार-बार परोसे जाने वाले खाद्य पदार्थों की जगह ज्यादा पौष्टिक और स्वादिष्ट विकल्प शामिल किए जाएं, ताकि बच्चों को बेहतर पोषण मिल सके और वे भोजन में अधिक रुचि लें.
राजमोहन ने की केंद्र सरकार की आलोचना
राजमोहन ने केंद्र सरकार की भी आलोचना की. उन्होंने आरोप लगाया कि नीति और भाषा से जुड़े विवादों के कारण केंद्र सरकार राज्य की शिक्षा से संबंधित फंड रोक रही है. उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों पर किया जाने वाला खर्च कोई साधारण खर्च नहीं बल्कि ज्ञान और भविष्य में किया गया निवेश है. राजमोहन ने कहा कि आज सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे ही आने वाले समय में साइंटिस्ट, अर्थशास्त्री और देश के अलग-अलग क्षेत्रों के एक्सपर्ट्स बनेंगे. ऐसे में शिक्षा के लिए मिलने वाले फंड को रोकना राज्य के भविष्य को प्रभावित करने जैसा है. उन्होंने कहा कि यह स्थिति स्वीकार नहीं की जा सकती और शिक्षा के विकास के लिए जरूरी सोर्स मुहैया कराए जाने चाहिए.
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