(Source: ECI/ABP News)
अंक भी जुड़वां, उपलब्धि भी जुड़वां; 10वीं में हजारीबाग की बहनें बनीं टॉपर
हजारीबाग के कार्मेल स्कूल की जुड़वां बहनों दृष्टि और सृष्टि ने आईसीएसई 10वीं में समान अंक लाकर संयुक्त रूप से टॉपर बनने का गौरव हासिल किया. आइए जानते हैं उनकी कहानी...

हजारीबाग के कार्मेल स्कूल में इस साल आईसीएसई 10वीं का रिजल्ट एक खास कहानी लेकर आया. यह कहानी है दो जुड़वां बहनों दृष्टि और सृष्टि की, जिन्होंने एक जैसे अंक लाकर संयुक्त रूप से टॉपर बनने का गौरव हासिल किया. दृष्टि और सृष्टि ने 97.6 प्रतिशत अंक हासिल कर न केवल अपने स्कूल का, बल्कि पूरे हजारीबाग जिले का नाम रोशन कर दिया.
दोनों के घर का माहौल पढ़ाई और अनुशासन से भरा रहा है. उनके पिता डॉ. मोहन लाल एक जाने-माने नेत्र रोग विशेषज्ञ हैं और माता डॉ. रश्मि प्रसाद प्रसूति रोग विशेषज्ञ हैं. घर में शिक्षा को हमेशा प्राथमिकता मिली. माता-पिता ने कभी दबाव नहीं बनाया, बल्कि सही दिशा और समय दिया.
क्या नहीं सोचा था?
रिजल्ट के बाद बातचीत में दृष्टि और सृष्टि ने बताया कि उन्होंने कभी यह नहीं सोचा था कि वे दोनों साथ में टॉपर बनेंगी. वे बस नियमित पढ़ाई करती रहीं. जब परिणाम आया और दोनों के अंक समान निकले, तो वह पल उनके लिए किसी सपने जैसा था. परिवार में जश्न का माहौल बन गया.
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किन बातों पर दिया ध्यान
समय प्रबंधन पर भी दोनों ने खास ध्यान दिया. रोज का एक तय समय था, जिसमें पढ़ाई, दोहराई और आराम सब शामिल था. वे मानती हैं कि नियमित पढ़ाई और समय पर रिवीजन ही अच्छे अंक की कुंजी है. परीक्षा के दिनों में भी उन्होंने घबराहट को खुद पर हावी नहीं होने दिया. स्कूल के शिक्षकों का सहयोग भी उन्हें लगातार मिलता रहा. जब भी जरूरत पड़ी, शिक्षकों ने फोन पर भी उनकी मदद की. यही कारण है कि पढ़ाई के दौरान उन्हें कभी अकेलापन महसूस नहीं हुआ. स्कूल और घर, दोनों जगह उन्हें मार्गदर्शन मिलता रहा.
क्या बनाना चाहती हैं?
भविष्य को लेकर भी दोनों बहनों का लक्ष्य साफ है. वे अपने माता-पिता से प्रेरित होकर डॉक्टर बनना चाहती हैं. समाज की सेवा करना उनका सपना है. इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए उन्होंने प्लस टू के साथ ही नीट की तैयारी भी शुरू कर दी है. दृष्टि और सृष्टि अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता, शिक्षकों और परिवार को देती हैं. वे कहती हैं कि अगर घर का माहौल अच्छा हो, सही मार्गदर्शन मिले और खुद पर विश्वास हो, तो कोई भी लक्ष्य मुश्किल नहीं होता.
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Source: IOCL


























