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पढ़ाई छूटने पर भी नहीं होगा साल बेकार, एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट में रहेगा रिकॉर्ड सुरक्षित, जानें क्या है ABC और इसके फायदे

एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट (ABC) एक वर्चुअल स्टोर हाउस है जो हर स्टूडेंट के डेटा का रिकॉर्ड रखेगा. इसके लिए यूनिवर्सिटीज और कॉलेजों को इस स्कीम में रजिस्ट्रेशन करना होगा.

जिन स्टूडेंट्स की किन्ही कारणों की वजह से पढ़ाई बीच में ही छूट जाती है उनके लिए एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट (ABC) बेहद काम की स्कीम है. दरअसल अब ऐसे छात्रों की पढ़ाई बेकार नहीं जाएगी उन्हें उनके टाइम पीरियड के हिसाब से प्रमाणपत्र दिए जाएंगे साथ ही वे जब चाहे अपनी पढ़ाई वहीं से शुरू कर सकते हैं. हाल ही में एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट स्कीम की शुरूआत पीएम मोदी ने की थी तो चलिए जानते हैं  क्या है ABC और ये कैसे छात्रों को फायदा पहुंचाएगी? ये सब हम आज यहां आपको बताएंगे.

क्या है एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट
एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट (ABC) एक वर्चुअल स्टोर हाउस है जो हर स्टूडेंट के डेटा का रिकॉर्ड रखेगा. इसके लिए यूनिवर्सिटीज और कॉलेजों को इस स्कीम में रजिस्ट्रेशन करना होगा. जिसके बाद इन कॉलेजों और यूनिवर्सिटीज के हर छात्र का डेटा एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट में स्टोर हो जाएगा. ऐसे में अगर कोई छात्र किन्ही कारणों से बीच में ही अपनी पढ़ाई छोड़ देता है तो उसे संबंधित कोर्स के टाइम पीरियड के हिसाब से सर्टिफिकेट, डिप्लोमा या डिग्री दी जाएगी. उदारहण के तौर पर फर्स्ट ईयर पास करने वाले स्टूडेंट को सर्टिफिकेट दिया जाएगा वहीं सेकेंड ईयर पास करने वाले छात्र को एडवांस डिप्लोमा और तीन साल का कोर्स पूरा करने पर ग्रेजुएशन की डिग्री व चार साल की पढ़ाई करने पर रिसर्च के साथ डिग्री दी जाएगी. यानी अगर पढाई बीच में छूट भी जाती है तो छात्र ने जितना समय भी अपनी कोर्स को दिया है वो व्यर्थ नहीं जाएगा उसे टाइम पीरियड के हिसाब से सर्टिफिकेट, डिप्लोमा या डिग्री क्रेडिट की जाएगी.

एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट कैसे काम करेगा
एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट या ABC एक कमर्शियल बैंक की तरह काम करेगा और छात्र इसके ग्राहक होंगे व एबीसी इन छात्रों को कई सेवाएं प्रदान करेगा. इसमें क्लासवर्क और ट्यूटोरियलस के आधार पर तैयार स्टूडेंट्स के एकेडमिक क्रेडिट को स्टोर किया जाएगा. इसे नेशनल एकेडमिक डिपॉजिटरी की तर्ज पर तैयार किया गया है. छात्रों को एकेडमिक बैंक खाता खोलना होगा और प्रत्येक एकाउंट होल्डर को एक यूनिक आईडी और स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसिजर (SOP) प्रदान की जाएगी. छात्रों के एकेडमिक एकाउंट में हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूट द्वारा छात्रों को उनके द्वारा किए जा रहे कोर्सेस के लिए क्रेडिट दिया जाएगा. हालांकि, एबीसी छात्रों से सीधे किसी भी क्रेडिट कोर्स डॉक्यूमेंट्स को स्वीकार नहीं करेगा इंस्टीट्यूट को ही छात्रों के अकाउंट में क्रेडिट कोर्स डॉक्यूमेंट्स को जमा कराना होगा.

स्टूडेंट्स अपने हिसाब से पढ़ाई पूरी कर सकेंगे
नई शिक्षा नीति को फ्लैक्सिबल बनाने के लिए एबीसी स्कीम लाई गई है. इस स्कीम में स्टूडेंट्स अपने हिसाब से पढ़ाई पूरी कर सकेंगे. इतना ही नहीं यदि एकेडमिक बैंक ऑफ अकाउंट में स्टूडेंट्स के पुरान रिकॉर्ड जमा है तो वह पढ़ाई छोड़ने के बाद कभी भी इसे दोबारा शुरू कर सकता है. यानी इस स्कीम के आने से छात्रो के पास कॉलेज में मल्टीपल एंट्री और एग्जिट का भी ऑप्शन होगा. खास बात ये है कि स्टूडेंट्स अपनी डिग्री अपने मुताबिक डिजाइन कर सकेंगे. एक साल किसी कॉलेज में पढ़ने के बाद छात्र अगले साल किसी दूसरे कॉलेज में जा सकते हैं.

सात साल के लिए मान्य होगा क्रेडिट
एकेडमिक बैक ऑफ क्रेडिट की अधिकतम शेल्फ लाइफ सिर्फ 7 वर्ष है. इसके बाद इसका कोई फायदा नहीं मिलेगा. हालांकि यदि इंस्टीट्यूशन में अलग नियम हैं तो छात्रों को उसका बेनिफिट मिल सकता है.

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