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IAS Success Story: लिमिटेड रिर्सोसेस और इनडेफिनेट रिवीजन से हिमांशु जैन बने UPSC टॉपर, जानते हैं उनकी स्ट्रेटजी

साल 2019 में अपने दूसरे प्रयास में एआईआर 4 के साथ सफलता हासिल करने वाले हिमांशु जैन मानते हैं कि तैयारी के दौरान किताबें सीमित रखें लेकिन उन्हें बार-बार रिवाइज करें तभी सफल होंगे.

Success Story Of IAS Topper Himanshu Jain: हरियाणा के हिमांशु जैन ने साल 2019 की यूपीएससी – सीएसई परीक्षा में चौथा स्थान प्राप्त करके अपने परिवार के साथ ही जिले का नाम भी रोशन किया है. हिमांशु को यह सफलता दूसरे प्रयास में मिली. पहले प्रयास में हिमांशु का प्री भी क्वालीफाई नहीं हुआ था पर उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और दोबारा कोशिश की, यही नहीं उन्होंने अपनी गलतियों को भी सुधारा और अगली बार में न केवल सफल हुए बल्कि टॉपर भी बने. आज जानते हैं हिमांशु से सफलता के सीक्रेट्स.

लिमिटेड रिर्सोसेस और इनडेफिनेट रिवीजन – हिमांशु अपनी सफलता का मूलमंत्र वही मानते हैं, जो अधिकतर यूपीएससी कैंडिडेट्स कहते हैं. तैयारी के लिए किताबें सीमित रखिए और उन्हीं से बार-बार पढ़िये. ज्यादा किताबें केवल आपको कंप्यूजन करेंगी और सभी को खत्म करने के चक्कर में आप कुछ भी भली प्रकार तैयार नहीं कर पाएंगे. इससे बेहतर है जिस भी एक किताब को पढ़ें अंत तक उसी पर टिके रहें. जब किताब पूरी हो जाए तो मॉक टेस्ट दें और आंसर राइटिंग की प्रैक्टिस करें.

हिमांशु कहते हैं की मुख्य तैयारी मेन्स परीक्षा के लिए करनी होती है. वे मानते हैं प्री पास करने के लिए 50 से 60 दिन का समय काफी होता है. ज्यादा समय मेन्स की तैयारी में लगता है. जहां तक बात उनकी पिछले अटेम्पट में सफलता न पाने की है तो हिमांशु कहते हैं कि उनकी तैयारी ठीक से नहीं हुई थी उन्होंने पहले ही एग्जाम दे दिया, जिससे वे असफल हो गए. हिमांशु को यूपीएससी का ख्याल ग्रेजुएशन के बाद ही आ गया था और उन्होंने इकोनॉमिक्स ऑनर्स से स्नातक करने के तुरंत बाद ही तैयारी शुरू कर दी थी.

ऐसा था हिमांशु का शेड्यूल – हिमांशु कहते हैं कि वैसे तो सबकी स्ट्रेटजी अलग होती है और किसी की स्ट्रेटजी किसी दूसरे कि लिए काम नहीं करती पर वे पर्सनली मानते हैं कि इस परीक्षा की तैयारी के लिए आठ से दस घंटे काफी होते हैं. वे सुबह उठकर तैयार होकर पढ़ने बैठ जाते थे और दोपहर तक पढ़ाई करते थे. फिर भूख लगने पर उठते थे और खाना खाकर थोड़ा आराम करके अगर मन किया तो दोबारा शाम को पढ़ते थे. नहीं मन किया तो नहीं पढ़ते थे पर खुद के साथ जबदस्ती नहीं करते थे. अपनी हेल्थ का ध्यान रखते थे और हॉबीज को भी थोड़ा समय देते थे. हिमांशु मानते हैं कि जंक फूड न खाएं या कम खाएं, इससे दिमाग धीमा काम करने लगता है. बाकी उन्हें लगता है कि सही प्लानिंग के साथ पढ़ाई करेंगे और बीच-बीच में ब्रेक लेते रहेंगे तो इस परीक्षा की तैयारी इतनी भी मुश्किल नहीं.

गवर्नमेंट साइट्स पर करते थे बहुत भरोसा – अपनी तैयारी के दौरान हिमांशु ने गवर्नमेंट वेबसाइट्स से काफी मदद ली. अपने सारे फैक्ट्स आदि उन्होंने वहीं से उठाए. ठीक इसी प्रकार टीवी प्रोग्राम्स और डिबेट्स से भी उन्हें काफी लाभ मिला. निबंध का जरूरी मैटर उन्हें यहीं से मिला. ये तो थी तैयारी की बात इसके अलावा हिमांशु कहते हैं कि अपनी तैयारी के दौरान लोगों की बातें न सुनें, उन्हें जो कहना है कहने दें आप केवल अपनी तैयारी पर फोकस करें. कुछ समय के लिए अपने पर्सनल अफेयर्स भी किनारे रख दें. एक बार आप सफल हो जाएंगे तो मुद्दे चाहे कोई भी हों सब खुद ही सुलझ जाते हैं. इसी प्रकार अगर आप तैयारी के दौरान इन चीजों में उलझेंगे तो आपका फोकस गलत दिशा में शिफ्ट हो जाएगा. हिमांशु का कुल मिलाकर यह कहना है कि अच्छा खाएं, भरपूर नींद लें, जमकर मेहनत करें, गैरजरूरी बातों पर कतई ध्यान न दें और बिना स्ट्रेस के तैयारी करें, सफलता जरूर मिलेगी.

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