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सीएम श्री स्कूल में एडमिशन ले रहे हैं? इन 5 बातों का रखें खास ध्यान

दिल्ली के CM श्री स्कूलों में नए सत्र के लिए एडमिशन शुरू हो चुके हैं. अगर आप भी अपने बच्चे का दाखिला करवाना चाहते हैं तो फॉर्म भरते समय इन 5 बड़ी गलतियों से जरूर बचें, नहीं तो आवेदन रद्द हो सकता है.

दिल्ली में नए शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए सरकारी स्कूलों में दाखिले की प्रक्रिया शुरू हो गई है. खास तौर पर CM श्री स्कूलों को लेकर अभिभावकों में काफी उत्साह है, क्योंकि यहां पढ़ाई के साथ-साथ बेहतर सुविधाएं भी मिलती हैं. ये स्कूल दिल्ली शिक्षा विभाग के तहत चलते हैं और आधुनिक व्यवस्था के लिए जाने जा रहे हैं.लेकिन ध्यान रहे, एडमिशन फॉर्म भरते समय अगर जरा सी भी गलती हो गई तो आवेदन रद्द हो सकता है. इसलिए हर जानकारी ध्यान से भरना बहुत जरूरी है. 

किस क्लास के लिए कैसे होगा एडमिशन?

एडमिशन प्रक्रिया को दो भागों में बांटा गया है. नर्सरी, केजी और कक्षा-1 के लिए आवेदन ऑफलाइन माध्यम से होंगे. अभिभावकों को अपने घर के पास स्थित स्कूल से फॉर्म लेना होगा और तय समय के अंदर वहीं जमा करना होगा. वहीं कक्षा 6, 9 और 11 में प्रवेश के लिए आवेदन पूरी तरह ऑनलाइन होंगे. इसके लिए अभिभावकों को शिक्षा विभाग की आधिकारिक वेबसाइट Directorate of Education Delhi पर जाकर आवेदन करना होगा.


नर्सरी से कक्षा-1 के लिए आवेदन 02 मार्च 2026 से शुरू होकर 16 मार्च 2026 तक स्वीकार किए जाएंगे. कक्षा 6, 9 और 11 के लिए ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि 12 मार्च 2026 है.20 मार्च 2026 को लकी ड्रॉ आयोजित किया जाएगा और 23 मार्च 2026 को चयनित छात्रों की सूची जारी कर दी जाएगी. पूरी दाखिला प्रक्रिया 02 अप्रैल 2026 तक पूरी कर ली जाएगी. इसलिए आखिरी दिन का इंतजार करने के बजाय समय रहते आवेदन करना बेहतर रहेगा.

आयु सीमा क्या है?
एडमिशन के लिए आयु सीमा 31 मार्च 2026 को आधार मानकर तय की गई है. नर्सरी में प्रवेश के लिए बच्चे की उम्र 3 से 4 वर्ष के बीच होनी चाहिए. केजी के लिए 4 से 5 वर्ष और कक्षा-1 के लिए 5 से 6 वर्ष की आयु अनिवार्य है. यदि उम्र तय सीमा से एक दिन भी कम या अधिक है तो आवेदन स्वीकार नहीं किया जाएगा. इसलिए जन्मतिथि भरते समय विशेष ध्यान रखें.


दिल्ली निवासी होना है जरूरी

सीएम श्री स्कूलों में दाखिले के लिए छात्र का दिल्ली का निवासी होना जरूरी है. पते के प्रमाण के रूप में राशन कार्ड, वोटर आईडी, आधार कार्ड, बिजली या पानी का बिल मान्य होंगे.किराए के मकान में रहने वाले अभिभावकों को वैध रेंट एग्रीमेंट भी देना होगा. फॉर्म में भरा गया पता और दस्तावेजों में दिया गया पता एक जैसा होना चाहिए.

सरकारी नियमों के अनुसार एससी वर्ग के लिए 15 प्रतिशत, एसटी वर्ग के लिए 7.5 प्रतिशत और दिव्यांग बच्चों के लिए 3 प्रतिशत सीटें आरक्षित हैं. शिक्षा विभाग के कर्मचारियों के बच्चों के लिए भी कुछ सीटें सुरक्षित रखी गई हैं. यदि किसी वंचित या दिव्यांग छात्र के पास तुरंत दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं तो उन्हें अस्थायी रूप से प्रवेश दिया जा सकता है, लेकिन तय समय सीमा के भीतर कागज जमा करना जरूरी होगा.

जरूरी डॉक्यूमेंट
एडमिशन के समय जन्म प्रमाण पत्र सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज है. इसके अलावा दिल्ली निवासी होने का प्रमाण, बच्चे की हाल ही की पासपोर्ट साइज फोटो और यदि लागू हो तो जाति या दिव्यांगता प्रमाण पत्र जरूरी है. कक्षा 6, 9 और 11 में प्रवेश लेने वाले छात्रों को पिछली कक्षा की मार्कशीट और ट्रांसफर सर्टिफिकेट भी जमा करना होगा.प्रवेश मिलने के बाद छह महीने के भीतर टीकाकरण कार्ड जमा करना अनिवार्य होगा.

फॉर्म भरते समय इन 5 गलतियों से बचें

सबसे पहली गलती आयु सीमा का गलत आकलन करना है. कई बार अभिभावक उम्र ठीक से जांचे बिना फॉर्म भर देते हैं, जिससे आवेदन अस्वीकार हो सकता है.दूसरी बड़ी गलती गलत या अधूरा निवास प्रमाण देना है. यदि दस्तावेजों में दिल्ली का पता स्पष्ट नहीं है तो आवेदन खारिज किया जा सकता है.
तीसरी गलती ऑनलाइन आवेदन में स्कूल की प्राथमिकता सोच-समझकर न भरना है.एक बार स्कूल अलॉट हो जाने के बाद बदलाव का विकल्प नहीं मिलेगा. चौथी गलती धुंधले या अधूरे दस्तावेज अपलोड करना है. स्पष्ट और साफ स्कैन कॉपी अपलोड करना जरूरी है. पांचवीं और सबसे आम गलती आखिरी दिन आवेदन करना है. अंतिम समय में वेबसाइट स्लो हो सकती है या तकनीकी समस्या आ सकती है, जिससे आवेदन अधूरा रह सकता है.

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रजनी उपाध्याय बीते करीब छह वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. उत्तर प्रदेश से ताल्लुक रखने वाली रजनी ने आगरा विश्वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएशन किया है. बचपन से ही पढ़ने-लिखने में गहरी रुचि थी और यही रुचि उन्हें मीडिया की दुनिया तक ले आई.

अपने छह साल के पत्रकारिता सफर में रजनी ने कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया. उन्होंने न्यूज, एंटरटेनमेंट और एजुकेशन जैसे प्रमुख वर्टिकल्स में अपनी पहचान बनाई. हर विषय में गहराई से उतरना और तथ्यों के साथ-साथ भावनाओं को भी समझना, उनकी पत्रकारिता की खासियत रही है. उनके लिए पत्रकारिता सिर्फ खबरें लिखना नहीं, बल्कि समाज की धड़कन को शब्दों में ढालने की एक कला है.

रजनी का मानना है कि एक अच्छी स्टोरी सिर्फ हेडलाइन नहीं बनाती, बल्कि पाठकों के दिलों को छूती है. वर्तमान में वे एबीपी लाइव में कार्यरत हैं, जहां वे एजुकेशन और एग्रीकल्चर जैसे अहम सेक्टर्स को कवर कर रही हैं.

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