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IAS Success Story: नौकरी के साथ दी परीक्षा और दूसरे प्रयास में बने गणेश कुमार UPSC टॉपर, जानते हैं कैसे

तमिलनाडु के गणेश कुमार बस्कर ने साल 2019 की यूपीएससी परीक्षा में 07वीं रैंक पायी है. अपने पहले प्रयास में बहुत कम अंतर से प्री में रह जाने वाले गणेश ने कुछ ऐसे सुधारी अपनी गलतियां.

Success Story Of IAS Topper Ganesh Kumar Basker: गणेश कुमार बस्कर को यूपीएससी सीएसई परीक्षा 2019 में अपने दूसरे प्रयास में सफलता मिली. गणेश ने यह सफलता बिना कोचिंग के और नौकरी के साथ तैयारी करके पायी है. उन्होंने केवल अंत के कुछ महीनों में परीक्षा की तैयारी के लिए तीन महीने नौकरी नहीं की वरना दो-ढ़ाई साल के समय में उन्होंने हमेशा जॉब पर रहकर ही प्रिपरेशन की. दूसरों से अलग गणेश ने आम दिनों में केवल चार घंटे और वीकेंड्स में दस से बारह घंटे पढ़ाई की. सामान्य दिनों में गणेश को दिन में चार घंटे से अधिक का समय पढ़ाई के लिए नहीं मिलता था. यह उन कैंडिडेट्स के लिए काफी सरप्राइजिंग होगा जिन्हें लगता है कि इस परीक्षा को पास करने के लिए दिन-रात पढ़ाई करनी पड़ती है. लेकिन बहुत से कैंडिडेट्स इस बात को गलत साबित करते दिखते हैं. गणेश भी उन्हीं में से एक हैं. आज जानते हैं उनसे कैसे करें नौकरी के साथ यूपीएससी की तैयारी.

आप यहां गणेश कुमार बस्कर द्वारा दिल्ली नॉलेज ट्रैक को दिए इंटरव्यू का वीडियो भी देख सकते हैं

गणेश का बैकग्राउंड –

गणेश शुरू से पढ़ाई में अच्छे थे और यूपीएससी सीएसई परीक्षा पास करने के पहले भी उन्होंने काफी पढ़ाई की है. गणेश ने आईआईटी कानपुर से बीटेक किया और उसके बाद आईआईएम अहमदाबाद से एमबीए किया. जैसा कि हम देख सकते हैं कि ये दोनों ही क्षेत्र अपने आप में श्रेष्ठ हैं और यहां चयनित होने के लिए बहुत कठिन परिश्रम करना पड़ता है पर गणेश ने दोनों ही पास किए. इसके बाद वे एक अच्छी कंपनी में नौकरी करने लगे. यहां जॉब के दौरान ही कुछ कारणों से उन्हें यूपीएससी का ख्याल आया और उन्होंने नौकरी के साथ ही तैयारी शुरू कर दी. पहले प्रयास में गणेश प्री परीक्षा पास नहीं कर पाए. इससे वे बहुत निराश हुए और करीब तीन महीने तक पढ़ाई नहीं कर पाए. हालांकि गणेश को संभलने में समय लगा पर फिर निराशा से उबरने के बाद उन्होंने दोबारा तैयारी की और अपनी गलतियों पर फोकस किया. अंततः उन्हें उनकी मेहनत का फल मिला और साल 2019 में वे 07वीं रैंक के साथ सेलेक्ट हो गए.

पहले अटेम्पट की गलती –

दिल्ली नॉलेज ट्रैक को दिए इंटरव्यू में गणेश कहते हैं कि उन्होंने पिछली बार प्री परीक्षा को कुछ ज्यादा ही लाइकली ले लिया था और पूरा ध्यान मेन्स की परीक्षा पर लगाया था. उन्हें लगता था कि प्री में केवल क्वालीफाइंग अंक लाने हैं और इतना तो वे मैनेज कर ही लेंगे. उनका पूरा फोकस मेन्स पर था. गणेश ने केवल दस या पन्द्रह दिन प्री की तैयारी की थी और जब रिजल्ट आया तो वे कुछ अंकों से रह गए. उस समय उनको अपनी गलती का अहसास हुआ कि वे जितना आसान प्री को समझ रहे थे वह उतना आसान नहीं है. गणेश ने अपनी गलती को सुधारा और अगले अटेम्पट में करीब डेढ़ महीने केवल प्री की तैयारी की और नतीजा यह हुआ कि उनका सेलेक्शन आसानी से हो गया.

दिए खूब मॉक टेस्ट –

गणेश अपनी तैयारी में मॉक टेस्ट्स और पिछले साल के प्रश्न-पत्रों को बहुत महत्व देते हैं. वे कहते हैं कि दूसरे अटेम्पट में उन्होंने परीक्षा के पहले कम से कम पचास मॉक दिए थे. यही तरीका उन्होंने मेन्स के लिए भी अपनाया और तैयारी पूरी होते ही खूब अभ्यास किया यानी टेस्ट दिए. कहीं कुछ समझ नहीं आता था तो पिछले साल के प्रश्न-पत्र देखते थे. गणेश की पूरी तैयारी सेल्फ स्टडी पर ही बेस्ड है उन्होंने कभी कहीं से कोचिंग नहीं ली. वे कोचिंग को समय की बर्बादी मानते हैं. केवल तैयारी के अंत में जब टेस्ट सीरीज का नंबर आया तब उन्होंने कुछ समय कोचिंग में जाकर टेस्ट दिए थे.

नौकरी के साथ गणेश परीक्षा की तैयारी के लिए एक दिन में अधिकतम चार घंटे पढ़ पाते थे और उनके अनुसार अगर ठीक से पढ़ा जाए और स्टडी मैटीरियल चुनिंदा रखा जाए तो इतने घंटे बहुत हैं. वीकेंड्स में वे समय का पूरा फायदा उठाते थे और दस से बारह घंटे पढ़ाई करते थे.

गणेश की सलाह –

गणेश कहते हैं कि जिनके पास समय की कमी रहती है उन्हें पहले अपना समय लिमिटेड स्टडी मैटीरियल कलेक्ट करने में खर्च करना चाहिए. अगर बहुत सोर्स रखेंगे तो कभी समय से तैयारी खत्म नहीं कर पाएंगे. गणेश ने भी यही किया, जो जरूरी है यह देखने के साथ ही क्या जरूरी नहीं है यह ज्यादा देखा और उसे इलिमिनेट करते चले. ठीक इसी तरह गणेश ने न्यूज पेपर पढ़ने पर भी बहुत समय नहीं खर्च किया. वे कहते हैं कि मैं हफ्ते के आखिरी दिन पूरे हफ्ते के पेपर लेकर बैठता था और करीब दो घंटे में एक सरसरी निगाह उन पर डाल लेता था. इसके अलावा बहुत सी कोचिंग्स के जो मंथली कंपाइलेशन आते हैं उनका इस्तेमाल गणेश करते थे और ऐसे उन्होंने करेंट अफेयर्स की तैयारी की.

जहां तक बात एंड के तीन महीनों में जॉब छोड़ने की थी तो गणेश कहते हैं कि नौकरी इसलिए छोड़ी क्योंकि उसके दौरान आए दिन विदेश जाना पड़ता था जिससे बहुत समय वेस्ट हो जाता था. ट्रिप में जो समय जाता था वह अलग साथ ही जेट लैग होता था सो अलग. इन कारणों से गणेश ने कुछ दिनों के लिए नौकरी छोड़ दी थी.

गणेश दूसरे कैंडिडेट्स को यही सलाह देते हैं कि अगर सेलेक्टिव स्टडी करेंगे और टाइम मैनेजमेंट का ध्यान रखेंगे तो नौकरी के साथ भी इस परीक्षा की तैयारी की जा सकती है. मेहनत और धैर्य सफलता के लिए बहुत आवश्यक हैं साथ ही अपनी कमियों को लगातार दूर करने की क्षमता भी अपने अंदर विकसित करनी चाहिए. अगर आप इनका ध्यान रखेंगे तो जरूर सफल होंगे.

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