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IAS Success Story: निबंध के पेपर में कैसे पाएं श्रेष्ठ अंक? UPSC टॉपर चाहत से जानते हैं

UPSC परीक्षा में ऐस्से का अलग से एक पेपर होता है. इस परीक्षा में सफल कैंडिडेट्स मानते हैं कि इस पेपर में अच्छे अंक लाकर आप अपनी रैंक सुधार सकते हैं.

Success Story Of IAS Chahat Bajpai: यूपीएससी परीक्षा का दायरा यूं तो बहुत बड़ा होता है और निबंध उसका एक छोटा सा हिस्सा मात्र है पर विशेषज्ञों की मानें तो इस पेपर को कभी लाइकली नहीं लेना चाहिए. यह पेपर इस बात में अहम भूमिका निभाता है कि आपको चयन के बाद कौन सी सर्विस एलॉट होगी. कुल मिलाकर इस पेपर की आपकी रैंक सुधारने में अहम भूमिका होती है. कई बार कैंडिडेट यह गलती करते हैं कि वे निबंध के पेपर को जितना महत्व देना चाहिए, नहीं देते. उन्हें लगता है अंत में दो-तीन ऐस्से लिखकर वे परीक्षा दे सकते हैं. कभी-कभी यह गलती बहुत भारी पड़ जाती है. ऐस्से के महत्व को देखते हुए आज हम इसी विषय पर बात करेंगे. साल 2018 की टॉपर चाहत बाजपेयी, जिनकी 59वीं रैंक आयी थी अपने अनुभव हमारे साथ शेयर करेंगी कि कैसे प्रभावशाली तरीके से ऐस्से लिखा जाए.

 ऐस्से को दें पूरा महत्व –

चाहत कहती हैं कि ऐस्से के लिए यह रवैया बिलकुल न अपनायें कि बाकी तैयारियां करते हैं, निबंध में क्या है, उसको एंड में देख लेंगे. कई बार कैंडिडेट्स को लगता है कि दो-तीन ऐस्से प्रैक्टिस करने से ही वे इसमें अच्छे अंक ला सकते हैं तो ऐसा कतई नहीं है. यह एक ऐसा विषय है जिसकी तैयारी आपको अलग से स्ट्रैटजी बनाकर करनी होगी. इसके साथ ही अगर आप अच्छा लिखते हैं या आपको पढ़ने में रुचि है तो भी ये न समझें कि आपके लिए निबंध लिखना बड़ी बात नहीं. सच तो यह है कि आप कैसे भी बैकग्राउंड के हों आपको ऐस्से के लिए उतनी ही मेहनत करनी होगी जितनी किसी और को. चाहत अपना केस बताती हैं कि पहले उन्हें लगता था कि जो लोग ब्लॉग या अखबार के लिए लिखते हैं या जो इंग्लिश लिटरेचर के स्टूडेंट्स होते हैं, वे ही अच्छा निबंध लिख सकते हैं लेकिन ऐसा नहीं है. यूपीएससी के निबंध के लिए सभी को अलग से तैयारी करनी ही पड़ती है, इस बात को समझते हुए कि यूपीएससी के ऐस्से में आखिर क्या और कैसे लिखा जाता है.

ज्यादा सजावटी भाषा का नहीं किया प्रयोग –

चाहत कहती हैं कि यूं तो सबका अपना लिखने का तरीका होता है पर अगर उनके व्यक्तिगत अनुभव की बात करें तो वे टॉपर अनु कुमारी की बात मानते हुए ऐस्से लिखती थी जिसमें उन्होंने कहा था कि ऐस्से पानी पीने जैसा होना चाहिए. यानी इतना सरल जिसे पानी की तरह एक बार में पिया जा सके, कहीं रुकना न पड़े न कहीं कुछ ऐसा हो जो समझ न आये, जो पानी की तरह बह जाए. चाहत ने ऐसा ही किया उन्होंने बहुत सजावटी भाषा या भारी शब्दों का इस्तेमाल नहीं किया बल्कि साधारण लेकिन प्रभावी तरीके से अपनी बात कही.

चाहत दूसरा अहम बिंदु मानती हैं निबंध में कविता या कोट्स का इस्तेमाल. वे कहती हैं उन्होंने ऐसे बहुत से कॉमन कोट्स आदि तैयार कर रखे थे जो निबंध में डाले जा सकें पर एक बात का ध्यान यहां रखें कि चूंकि आपने इन्हें तैयार कर लिया है इसका मतलब यह नहीं कि आप जबरदस्ती इन्हें डालें ही. जहां उचित हो केवल वहीं इनका प्रयोग करें.

कुछ निबंध पहले से तैयार करके देखें –

चाहत कहती हैं निबंध लिखने की जमकर प्रैक्टिस करें और कुछ निबंधों का मैटीरियल पहले से तैयार करके रखें. जब आप पिछले सालों के पेपर उठाएंगे तो देखेंगे की कुछ विषय हैं जिन पर हर साल प्रश्न आते ही आते हैं. कम से कम इनकी शुरुआत और अंत तैयार कर लें क्योंकि यह एग्जामिनर पर गहरा असर डालते हैं. निबंध की प्रैक्टिस करने का यह फायदा होता है कि आपको हॉल में बैठकर यह नहीं सोचना पड़ता कि किस विषय को चुनें क्योंकि अभ्यास के दौरान आप अपना झुकाव जान चुके होते हैं. इसके साथ ही अगला जरूरी प्वॉइंट है निबंध के विषय के हिसाब से राइटिंग स्टाइल का चुनाव करना. जैसे कोई निबंध पास्ट, प्रेजेंट और फ्यूचर स्टाइल में लिखना ठीक रहता है तो कोई पास्ट, प्रेजेंट सिचुएशन, प्रॉब्लम्स, सॉल्यूशन मोड में. देख लें कि आपका विषय किस तरह से अच्छे से एक्सप्रेस किया जा सकता है, उसी तरीके को आपनाएं.

 

विषय से न भटकें –

चाहत निबंध लिखते समय एक बात का ध्यान रखने के लिए सभी को कहती हैं कि विषय से न भटकें, जो पूछा गया है वही बताएं उसके आगे-पीछे की कहानी नहीं. वे अपना अनुभव शेयर करती हैं कि, मैं तो निबंध लिखते समय बार-बार पेज पलटकर देखती थी कि कहीं विषय से अलग तो नहीं जा रही क्योंकि अपने पिछले अटेम्पट में वे ऐसी गलती कर चुकी थी. चाहत आगे कहती हैं कि अभ्यास करने से आपकी स्पीड भी बढ़ती है जो इस पेपर के लिए बहुत जरूरी है. इसके साथ ही वे टॉपर्स की कॉपीज देखने और ऑनलाइन वेबसाइट्स जो इस संबंध में जानकारी देती हैं से ऐस्से राइटिंग स्टाइल पर ध्यान देने के लिए भी कहती हैं. हो सके तो टेस्ट दें ताकि आपको पता चल सके कि आपके ऐस्से में कहां कमी है. किसी सीनियर से अपने निबंध चेक करवाएं ताकि गलतियां जान सकें. चाहत कहती हैं कि निबंध को पूरा महत्व दें और रोज एक निबंध लिखने की प्रैक्टिस करें.  अपना खुद का स्टाइल डेवलेप करें किसी को कॉपी न करें. इन छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखकर आप निश्चित ही ऐस्से के पेपर में अच्छा स्कोर कर सकते हैं.

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