NEET UG 2026 AIR 18 Kritik Jain: सोशल मीडिया से बनाई दूरी, पहले प्रयास में 701 अंक लाकर कृतिक बने देश के टॉप-20 रैंकर
NEET UG 2026 में राजस्थान के सीकर के कृतिक जैन ने पहले प्रयास में 701 अंक हासिल कर AIR-18 हासिल की. जानिए उनकी तैयारी, सोशल मीडिया से दूरी बनाकर सफलता हासिल करने की पूरी कहानी.

NEET UG 2026 के नतीजे घोषित होने के बाद राजस्थान के सीकर के कृतिक जैन ने शानदार सफलता हासिल कर जिले का नाम पूरे देश में रोशन कर दिया है. कृतिक ने अपने पहले ही प्रयास में 701 अंक हासिल किए और ऑल इंडिया रैंक (AIR) 18 हासिल की. उनकी इस उपलब्धि से परिवार, शिक्षकों और पूरे सीकर में खुशी का माहौल है.
बता दें कि कृतिक एलेन सीकर की पांच वर्षीय क्लासरूम स्टूडेंट रहे. लगातार मेहनत, अनुशासित पढ़ाई और सही रणनीति के दम पर उन्होंने मेडिकल प्रवेश परीक्षा में देश के टॉप-20 छात्रों में जगह बनाई. उनका कहना है कि यह सफलता किसी एक दिन की मेहनत का परिणाम नहीं, बल्कि कई वर्षों की लगातार तैयारी, परिवार और शिक्षकों के भरोसे का नतीजा है.
यह फॉर्म्युला आजमाकर मिली कामयाबी
कृतिक ने बताया कि उन्होंने अपनी पढ़ाई के दौरान सोशल मीडिया से पूरी तरह दूरी बनाए रखी. उनका पूरा ध्यान केवल पढ़ाई, नियमित रिवीजन और टेस्ट देने पर था. उन्होंने कहा कि जब लक्ष्य बड़ा हो तो समय की कीमत समझनी पड़ती है. इसी वजह से उन्होंने मनोरंजन और सोशल मीडिया पर समय बिताने के बजाय अपनी पढ़ाई को प्राथमिकता दी.
उन्होंने कहा कि NEET UG 2026 का सफर आसान नहीं था. इस साल परीक्षा रद्द होने की वजह से लाखों छात्रों की तरह उन्हें भी दोबारा परीक्षा का सामना करना पड़ा. शुरुआत में यह स्थिति चुनौतीपूर्ण जरूर लगी, लेकिन उन्होंने अपना आत्मविश्वास नहीं खोया. उन्होंने खुद को संभाला और दूसरी परीक्षा के लिए पहले से ज्यादा मेहनत के साथ तैयारी शुरू कर दी. यही कारण रहा कि वह पहले प्रयास में ही शानदार रैंक हासिल करने में सफल रहे.
कृतिक ने कही यह बात
कृतिक का कहना है कि तैयारी के दौरान उन्होंने किसी तरह का दबाव अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया. वह रोज तय समय के अनुसार पढ़ाई करते थे और जिन विषयों में कमजोरी महसूस होती थी, उन पर अतिरिक्त समय देते थे. नियमित टेस्ट और बार-बार रिवीजन ने उनकी तैयारी को मजबूत बनाया.
कृतिक ने कहा कि उनके माता-पिता और गुरुजनों ने हर कदम पर उनका साथ दिया. जब भी पढ़ाई के दौरान किसी विषय को लेकर परेशानी हुई या आत्मविश्वास कम हुआ, तब शिक्षकों ने सही दिशा दिखाई. वहीं, परिवार ने हमेशा पॉजिटिव माहौल दिया, जिससे वह बिना किसी तनाव के अपनी तैयारी जारी रख सके.
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