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किताबों से शोध तक, NCERT अब ‘डीम्ड यूनिवर्सिटी’, स्कूल शिक्षा से हायर एजुकेशन की ओर बड़ा कदम

NCERT को अब डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी का दर्जा मिल गया है. जिससे वह शोध, पीएचडी और नए शैक्षणिक कोर्स शुरू कर सकेगा.

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  • एनसीईआरटी को 'डीम्ड यूनिवर्सिटी' का दर्जा मिला, उच्च शिक्षा में कदम रखेगी.
  • अब शोध, पीएचडी और नए शैक्षणिक पाठ्यक्रम शुरू कर सकेगी संस्था.
  • छह क्षेत्रीय संस्थान भी 'विशेष श्रेणी' में डीम्ड यूनिवर्सिटी बनेंगे.
  • यूजीसी के मानकों का पालन, रैंकिंग और क्रेडिट प्रणाली लागू होगी.

देश की स्कूली शिक्षा से जुड़ी सबसे बड़ी संस्था अब एक नए दौर में प्रवेश कर चुकी है. लगभग तीन साल पहले जो संकेत मिले थे, अब वे हकीकत बन गए हैं. एनसीईआरटी को अब औपचारिक रूप से “डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी” का दर्जा दे दिया गया है.

अब तक एनसीईआरटी की पहचान स्कूलों के पाठ्यक्रम, किताबें और शैक्षिक दिशा तय करने वाली संस्था के रूप में थी. लेकिन नए दर्जे के बाद यह संस्था शोध, पीएचडी और नए शैक्षणिक पाठ्यक्रम भी शुरू कर सकेगी. यानी स्कूल शिक्षा से आगे बढ़कर अब यह उच्च शिक्षा के क्षेत्र में भी कदम रखेगी.

बीते दिनों शिक्षा मंत्रालय ने अधिसूचना जारी कर यह घोषणा की. यह फैसला University Grants Commission की सलाह पर लिया गया है. यूजीसी अधिनियम 1956 की धारा 3 के तहत एनसीईआरटी और इसकी छह इकाइयों को “विशेष श्रेणी” में डीम्ड यूनिवर्सिटी का दर्जा दिया गया है.

इन इकाइयों में अजमेर, भोपाल, भुवनेश्वर, मैसूर और शिलांग के क्षेत्रीय शिक्षा संस्थान शामिल हैं, साथ ही भोपाल स्थित पंडित सुंदरलाल शर्मा सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ वोकेशनल एजुकेशन भी इसमें शामिल है.

अब शुरू होंगे शोध और पीएचडी कार्यक्रम

एनसीईआरटी को शोध कार्यक्रम, पीएचडी और नए तरह के शैक्षणिक कोर्स शुरू करने होंगे. यानी अब यह संस्था सिर्फ किताबें बनाने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि शिक्षा पर गहराई से शोध भी करेगी.

पहले उठी थीं चिंताएं

हालांकि यह बदलाव सभी को सहज नहीं लगा था. 2022 में एनसीईआरटी के अंदर ही कुछ शिक्षकों ने चिंता जताई थी कि डीम्ड यूनिवर्सिटी बनने से संस्था की शैक्षणिक स्वतंत्रता कम हो सकती है. उनका मानना था कि इससे एनसीईआरटी यूजीसी के नियमों में बंध जाएगी और स्कूल शिक्षा पर उसकी स्वतंत्र पकड़ कमजोर हो सकती है.

यूजीसी के नियमों का पालन जरूरी

अधिसूचना में साफ कहा गया है कि एनसीईआरटी द्वारा शुरू किए जाने वाले सभी कोर्स यूजीसी के तय मानकों के अनुसार होंगे. कोई भी नया कोर्स या नया केंद्र खोलने से पहले यूजीसी की गाइडलाइन माननी होगी. साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि एनसीईआरटी किसी भी तरह की व्यावसायिक या मुनाफा कमाने वाली गतिविधि में शामिल नहीं हो सकती.

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रैंकिंग और मान्यता प्रक्रिया में भी शामिल होगी

अब एनसीईआरटी को उच्च शिक्षा संस्थानों की तरह राष्ट्रीय रैंकिंग और मान्यता प्रक्रिया में भी हिस्सा लेना होगा. इसे हर साल NIRF में भाग लेना होगा और NAAC व NBA जैसी संस्थाओं से मान्यता लेनी होगी.

अकादमिक बैंक ऑफ क्रेडिट भी होगा लागू

उच्च शिक्षा संस्थानों की तरह एनसीईआरटी को भी ABC प्रणाली लागू करनी होगी. छात्रों के क्रेडिट स्कोर को डिजिटल रूप से दर्ज किया जाएगा, जिससे पढ़ाई का रिकॉर्ड सुरक्षित और व्यवस्थित रहेगा.

लंबी प्रक्रिया के बाद मिला दर्जा

यह फैसला एक लंबी प्रक्रिया के बाद आया है. अगस्त 2023 में एनसीईआरटी को लेटर ऑफ इंटेंट मिला था. इसके बाद नवंबर 2025 में अनुपालन रिपोर्ट दी गई, जिसे यूजीसी की विशेषज्ञ समिति ने मंजूरी दी. 30 जनवरी को यूजीसी की बैठक में इस पर अंतिम सहमति बनी.

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रजनी उपाध्याय बीते करीब छह वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. उत्तर प्रदेश से ताल्लुक रखने वाली रजनी ने आगरा विश्वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएशन किया है. बचपन से ही पढ़ने-लिखने में गहरी रुचि थी और यही रुचि उन्हें मीडिया की दुनिया तक ले आई.

अपने छह साल के पत्रकारिता सफर में रजनी ने कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया. उन्होंने न्यूज, एंटरटेनमेंट और एजुकेशन जैसे प्रमुख वर्टिकल्स में अपनी पहचान बनाई. हर विषय में गहराई से उतरना और तथ्यों के साथ-साथ भावनाओं को भी समझना, उनकी पत्रकारिता की खासियत रही है. उनके लिए पत्रकारिता सिर्फ खबरें लिखना नहीं, बल्कि समाज की धड़कन को शब्दों में ढालने की एक कला है.

रजनी का मानना है कि एक अच्छी स्टोरी सिर्फ हेडलाइन नहीं बनाती, बल्कि पाठकों के दिलों को छूती है. वर्तमान में वे एबीपी लाइव में कार्यरत हैं, जहां वे एजुकेशन और एग्रीकल्चर जैसे अहम सेक्टर्स को कवर कर रही हैं.

दोनों ही क्षेत्र समाज की बुनियादी जरूरतों से जुड़े हैं और रजनी इन्हें बेहद संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के साथ संभालती हैं. खाली समय में रजनी को संगीत सुनना और किताबें पढ़ना पसंद है. ये न केवल उन्हें मानसिक सुकून देते हैं, बल्कि उनकी रचनात्मकता को भी ऊर्जा प्रदान करते हैं.

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