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NCERT की 9वीं की किताब में मनुस्मृति की एंट्री! महिलाओं की स्थिति पर क्या लिखा है?

NCERT की नौवीं क्लास के सामाजिक विज्ञान की किताब में 'मनुस्मृति' का भी जिक्र किया गया है. यहां हम आपको बताएंगे कि महिलाओं की स्थिति के बारे में और क्या-क्या उदाहरण पेश किए गए हैं.

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  • एनसीईआरटी की कक्षा 9 की किताब महिलाओं की भूमिका बताती है.
  • किताब में मनुस्मृति श्लोक और वैदिक काल वर्णित हैं.
  • महिलाओं की बदलती स्थिति दर्शाई, जिससे विवाद बढ़ सकता है.

एनसीईआरटी की कक्षा 9 की सामाजिक विज्ञान की किताब इन दिनों चर्चा का विषय बनी हुई है. इस किताब में पुराने भारत के समाज में महिलाओं की भूमिका और सामाजिक व्यवस्था के बारे में जानकारी दी गई है. साथ ही, इसमें मनुस्मृति का भी एक संदर्भ जोड़ा गया है. किताब में यह भी बताया गया है कि समय के साथ महिलाओं की स्थिति और समाज, दोनों में क्या-क्या बदलाव हुए हैं.

कक्षा 9 की इस किताब में बताया गया है कि वैदिक समय में महिलाओं को सम्मानित दर्जा दिया जाता था. महिलाएं पढ़ाई करती थीं, धार्मिक कामों में हिस्सा लेती थीं और कई जगहों पर अपनी बात भी रखती थीं. किताब में कुछ ऐसी महिलाओं का भी जिक्र किया गया है, जिनका नाम पुराने ग्रंथों में मिलता है.

इस किताब में मनुस्मृति की एक पंक्ति, 'यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता', यानी जहां महिलाओं का आदर-सम्मान होता है, वहां देवता वास करते हैं, श्लोक को शामिल किया गया है. इसमें महिलाओं के सम्मान की बात कही गई है. इसमें यह भी साफ लिखा गया है कि हर समय महिलाओं की स्थिति एक जैसी नहीं रही है. समय के साथ बदलाव हुए. समय बदलने के साथ महिलाओं की भूमिका में आए बदलावों के बारे में भी अध्याय में बताया गया है. बताया गया है कि जैसे-जैसे समाज और राजनीति में बदलाव हुए, वैसे-वैसे महिलाओं की स्थिति में भी बदलाव आए. कुछ समय के लिए उनकी भागीदारी कम हुई, लेकिन उन्होंने घर, खेती, कामकाज और समाज में अपना योगदान देना जारी रखा.

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'भारत और विश्व' के नाम का चैप्टर भी जोड़ा गया

कक्षा 9 की इस किताब में 'भारत और विश्व' नाम का एक अध्याय है, जिसमें वैदिक काल के बारे में जानकारी दी गई है. इस पाठ में उस दौर में महिलाओं की मजबूत स्थिति के बारे में बताया गया है कि उस समय महिलाओं को शिक्षा का पूरा अधिकार था. समाज के हर जरूरी काम में महिलाएं भागीदार होती थीं और अपनी मर्जी से अपना वर चुन सकती थीं. साथ ही बताया गया है कि समाज में महिलाओं को पुरुषों के समान अधिकार दिए गए थे. इससे पहले भी यह किताब काफी चर्चा में रही, जब SIR और चुनाव की तारीफों के पुल बांधे गए थे.

दिल्ली यूनिवर्सिटी में भी हुआ था विवाद

यह चैप्टर तब लाया गया है, जब हाल ही में दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) के लॉ फैकल्टी में मनुस्मृति को पढ़ाए जाने के प्रस्ताव पर काफी विवाद हुआ था. इस फैसले का काफी विरोध हुआ और फिर डीयू के वाइस चांसलर ने उस प्रस्ताव को खारिज कर दिया. आखिरकार, मनुस्मृति को कोर्स में शामिल नहीं किया गया. अब NCERT की स्कूल की किताब में इसका जिक्र होने से विवाद बढ़ सकता है.

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रजनी उपाध्याय बीते करीब छह वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. उत्तर प्रदेश से ताल्लुक रखने वाली रजनी ने आगरा विश्वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएशन किया है. बचपन से ही पढ़ने-लिखने में गहरी रुचि थी और यही रुचि उन्हें मीडिया की दुनिया तक ले आई.

अपने छह साल के पत्रकारिता सफर में रजनी ने कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया. उन्होंने न्यूज, एंटरटेनमेंट और एजुकेशन जैसे प्रमुख वर्टिकल्स में अपनी पहचान बनाई. हर विषय में गहराई से उतरना और तथ्यों के साथ-साथ भावनाओं को भी समझना, उनकी पत्रकारिता की खासियत रही है. उनके लिए पत्रकारिता सिर्फ खबरें लिखना नहीं, बल्कि समाज की धड़कन को शब्दों में ढालने की एक कला है.

रजनी का मानना है कि एक अच्छी स्टोरी सिर्फ हेडलाइन नहीं बनाती, बल्कि पाठकों के दिलों को छूती है. वर्तमान में वे एबीपी लाइव में कार्यरत हैं, जहां वे एजुकेशन और एग्रीकल्चर जैसे अहम सेक्टर्स को कवर कर रही हैं.

दोनों ही क्षेत्र समाज की बुनियादी जरूरतों से जुड़े हैं और रजनी इन्हें बेहद संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के साथ संभालती हैं. खाली समय में रजनी को संगीत सुनना और किताबें पढ़ना पसंद है. ये न केवल उन्हें मानसिक सुकून देते हैं, बल्कि उनकी रचनात्मकता को भी ऊर्जा प्रदान करते हैं.

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