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JNU Hostel Rules 2026: विवाहित पीएचडी छात्रों को बड़ा झटका,JNU हॉस्टल में रहना हुआ महंगा

जेएनयू में विवाहित पीएचडी छात्रों के लिए हॉस्टल में रहना अब महंगा हो गया है. विश्वविद्यालय ने किराया, सिक्योरिटी डिपॉजिट और हॉस्टल नियमों में बड़ा बदलाव किया.पढ़ें पूरी खबर...

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  • जेएनयू ने पीएचडी विवाहित छात्रों के लिए नई हॉस्टल व्यवस्था लागू की.
  • विवाहित शोधार्थियों को अब अधिक किराया और सुरक्षा जमा राशि देनी होगी.
  • पीएचडी छात्रों को अधिकतम चार साल तक हॉस्टल में रहने की अनुमति.
  • गर्भवती महिलाओं और छोटे बच्चों वाली माताओं को हॉस्टल में प्राथमिकता.

दिल्ली स्थित जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय यानी JNU ने अपने हॉस्टल नियमों में बदलाव करते हुए विवाहित पीएचडी छात्रों के लिए नई व्यवस्था लागू करने का फैसला किया है. विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से जारी ड्राफ्ट हॉस्टल मैनुअल के मुताबिक अब विवाहित शोधार्थियों को हॉस्टल में रहने के लिए पहले से ज्यादा खर्च उठाना पड़ेगा. इसके साथ ही हॉस्टल आवंटन और रहने की अवधि को लेकर भी नए नियम लागू किए गए हैं.

JNU के महानदी हॉस्टल में विवाहित रिसर्च स्कॉलर्स के लिए अब सिक्योरिटी डिपॉजिट की राशि बढ़ा दी गई है. नई व्यवस्था के अनुसार छात्रों को रिफंडेबल सिक्योरिटी जमा करनी होगी.इसके अलावा कमरे का किराया, बिजली-पानी का खर्च और अन्य सुविधाओं का शुल्क अलग से लिया जाएगा. विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि बढ़ती सुविधाओं और रखरखाव लागत को देखते हुए यह फैसला लिया गया है.

हर साल बढ़ सकता है किराया

नई हॉस्टल नीति के अनुसार कमरे का किराया और अन्य चार्ज समय-समय पर बढ़ाए जा सकते हैं.बताया गया है कि विश्वविद्यालय हॉस्टल संचालन में आने वाले वास्तविक खर्च के आधार पर फीस तय करेगा. ऐसे में आने वाले वर्षों में छात्रों को और अधिक शुल्क देना पड़ सकता है.

चार साल तक ही मिलेगी हॉस्टल सुविधा

जेएनयू प्रशासन ने हॉस्टल में रहने की समय सीमा भी तय कर दी है.नए नियमों के तहत पीएचडी छात्रों को प्रवेश की तारीख से अधिकतम चार साल तक ही हॉस्टल में रहने की अनुमति मिलेगी.इसके बाद छात्रों को हॉस्टल खाली करना होगा. विश्वविद्यालय का कहना है कि इससे नए छात्रों को भी हॉस्टल सुविधा मिल सकेगी.

गर्भवती और बच्चों वाली महिलाओं को प्राथमिकता

ड्राफ्ट नियमों में गर्भवती शोधार्थियों और छोटे बच्चों की देखभाल करने वाली महिलाओं को हॉस्टल आवंटन में प्राथमिकता देने का प्रावधान रखा गया है. विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि इससे महिला शोधार्थियों को पढ़ाई जारी रखने में सुविधा मिलेगी.

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विदेशी छात्रों पर भी लागू होंगे नए नियम

JNU ने साफ किया है कि हॉस्टल से जुड़े ये नियम केवल भारतीय छात्रों पर ही नहीं बल्कि विदेशी छात्रों पर भी लागू होंगे. सभी छात्रों को हॉस्टल आवंटन से पहले नियमों का पालन करने से जुड़ा शपथ पत्र भी देना होगा.

सीमित सीटों के कारण सख्त हुए नियम
विश्वविद्यालय में हॉस्टल सीटों की संख्या सीमित है जबकि हर साल बड़ी संख्या में छात्र आवेदन करते हैं.इसी वजह से प्रशासन ने हॉस्टल आवंटन प्रक्रिया को और सख्त बनाया है. JNU के मुताबिक हॉस्टल सुविधा केवल पात्र छात्रों को ही उपलब्ध कराई जाएगी और आवंटन पूरी तरह तय नियमों के आधार पर होगा.

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रजनी उपाध्याय बीते करीब छह वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. उत्तर प्रदेश से ताल्लुक रखने वाली रजनी ने आगरा विश्वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएशन किया है. बचपन से ही पढ़ने-लिखने में गहरी रुचि थी और यही रुचि उन्हें मीडिया की दुनिया तक ले आई.

अपने छह साल के पत्रकारिता सफर में रजनी ने कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया. उन्होंने न्यूज, एंटरटेनमेंट और एजुकेशन जैसे प्रमुख वर्टिकल्स में अपनी पहचान बनाई. हर विषय में गहराई से उतरना और तथ्यों के साथ-साथ भावनाओं को भी समझना, उनकी पत्रकारिता की खासियत रही है. उनके लिए पत्रकारिता सिर्फ खबरें लिखना नहीं, बल्कि समाज की धड़कन को शब्दों में ढालने की एक कला है.

रजनी का मानना है कि एक अच्छी स्टोरी सिर्फ हेडलाइन नहीं बनाती, बल्कि पाठकों के दिलों को छूती है. वर्तमान में वे एबीपी लाइव में कार्यरत हैं, जहां वे एजुकेशन और एग्रीकल्चर जैसे अहम सेक्टर्स को कवर कर रही हैं.

दोनों ही क्षेत्र समाज की बुनियादी जरूरतों से जुड़े हैं और रजनी इन्हें बेहद संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के साथ संभालती हैं. खाली समय में रजनी को संगीत सुनना और किताबें पढ़ना पसंद है. ये न केवल उन्हें मानसिक सुकून देते हैं, बल्कि उनकी रचनात्मकता को भी ऊर्जा प्रदान करते हैं.

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