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संस्कृत और फारसी जैसे विषयों से दूरी बना रहे छात्र, कम एप्लिकेशन मिलने पर जामिया ने बंद किए 5 कोर्स

बदलते दौर में छात्र अब ऐसे कोर्स चुन रहे हैं, जिनमें नौकरी के बेहतर मौके दिखाई देते हैं. यही वजह है कि पारंपरिक और कुछ विशेष विषयों में छात्रों की रुचि लगातार घट रही है.

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  • जामिया ने कम आवेदनों के चलते पांच कोर्स बंद किए.
  • होटल मैनेजमेंट, अनुवाद डिप्लोमा सहित पांच कोर्स किए बंद.
  • संस्कृत, फारसी कोर्स कम आवेदन पर भी जारी रहेंगे.
  • एआई के कारण अनुवाद डिप्लोमा की मांग घटी, विश्वविद्यालय बोला.

आज के टाइम में स्टूडेंट्स रोजगार परक और ऐसे कोर्स सेलेक्ट करते हैं, जिनसे उनकी जल्द और बढ़िया नौकरी लग जाए. ऐसे में अब कुछ ऐसे कोर्स से जो जिनके ऊपर से छात्रों का विश्वास उठ रहा है. इस कारण बहुत से ऐसे कोर्स और सब्जेक्ट हैं, जिनमें स्टूडेंट्स काम रुचि के रहे हैं. जिनके चलते शिक्षण संस्थान कोर्स को बंद कर रहे हैं. कुछ ऐसा ही फैसला जामिया मिल्लिया इस्लामिया ने लिया है और 5 कोर्स को बंद करने का निर्णय लिया है.

जामिया के मुताबिक जिन 5 कोर्सों में निर्धारित सीटों के मुकाबले आधे से भी कम आवेदन आए, उन्हें इस साल संचालित नहीं किया जाएगा. इनमें मास्टर ऑफ होटल मैनेजमेंट, पीजी डिप्लोमा इन ट्रांसलेशन प्रोफिशिएंसी इन इंग्लिश, पीजी डिप्लोमा इन डिजास्टर मैनेजमेंट, डिप्लोमा इन लेदर गुड्स एंड फुटवियर टेक्नोलॉजी और एमएफए इन आर्ट मैनेजमेंट शामिल हैं. इन सभी कोर्सों में कुल 145 सीटें थीं और ये सेल्फ फाइनेंस कोर्स थे, यानी इनका खर्च छात्रों की फीस से चलता था. विश्वविद्यालय ने कहा है कि इन कोर्सों के लिए आवेदन करने वाले छात्रों की फीस उनके बैंक खातों में वापस कर दी जाएगी.

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार जिन सब्जेक्ट में छात्रों की संख्या कम रही है लेकिन विश्वविद्यालय उन्हें जारी रख रहा है. उनमें बीए (ऑनर्स) संस्कृत, एमए संस्कृत, एमए फारसी, डिप्लोमा इन तुर्किश और डिप्लोमा इन पुर्तगाली शामिल हैं. इन प्रोग्राम में अब दाखिला परीक्षा नहीं होगी. छात्रों को 12वीं या संबंधित योग्यता के अंकों के आधार पर सीधे दाखिला दिया जाएगा.

इसलिए शुरू हुए थे कोर्स?

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार जामिया मिल्लिया इस्लामिया की मुख्य जनसंपर्क अधिकारी साइमा सईद का इस पर कहना है कि कुछ कोर्स छात्रों की रुचि और रोजगार की संभावनाओं को ध्यान में रखकर शुरू किए गए थे, लेकिन अपेक्षा के अनुसार आवेदन नहीं मिले. अनुवाद से जुड़े डिप्लोमा कोर्स की मांग भी कम हुई है, क्योंकि अब एआई और आधुनिक ट्रांसलेशन तकनीक के कारण इस क्षेत्र में तेजी से बदलाव आ रहा है.

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हालांकि संस्कृत के मामले में विश्वविद्यालय का रुख अलग है. प्रशासन का मानना है कि संस्कृत भारत की प्राचीन और महत्वपूर्ण भाषा है, इसलिए इसे केवल कम आवेदन मिलने के आधार पर बंद करना सही नहीं होगा. उम्मीद है कि अगले दो-तीन वर्षों में इन कोर्स में छात्रों की संख्या बढ़ सकती है. इसी सोच के साथ संस्कृत के ग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट दोनों कोर्स जारी रखने का फैसला लिया गया है.

गौरतलब है कि जामिया ने साल 2017 में संस्कृत विभाग की शुरुआत की थी. पहले सर्टिफिकेट कोर्स शुरू किया गया और बाद में ग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट लेवल के रेगुलर कोर्स  शुरू किए गए. हालांकि विश्वविद्यालय ने यह नहीं बताया कि पिछले साल भी इन कोर्सों में कम आवेदन आए थे या नहीं. अगले शैक्षणिक सत्र में ये कोर्स जारी रहेंगे या नहीं, इसका फैसला उस समय मिलने वाले आवेदनों के आधार पर किया जाएगा.

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रजनी उपाध्याय बीते करीब छह वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. उत्तर प्रदेश से ताल्लुक रखने वाली रजनी ने आगरा विश्वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएशन किया है. बचपन से ही पढ़ने-लिखने में गहरी रुचि थी और यही रुचि उन्हें मीडिया की दुनिया तक ले आई.

अपने छह साल के पत्रकारिता सफर में रजनी ने कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया. उन्होंने न्यूज, एंटरटेनमेंट और एजुकेशन जैसे प्रमुख वर्टिकल्स में अपनी पहचान बनाई. हर विषय में गहराई से उतरना और तथ्यों के साथ-साथ भावनाओं को भी समझना, उनकी पत्रकारिता की खासियत रही है. उनके लिए पत्रकारिता सिर्फ खबरें लिखना नहीं, बल्कि समाज की धड़कन को शब्दों में ढालने की एक कला है.

रजनी का मानना है कि एक अच्छी स्टोरी सिर्फ हेडलाइन नहीं बनाती, बल्कि पाठकों के दिलों को छूती है. वर्तमान में वे एबीपी लाइव में कार्यरत हैं, जहां वे एजुकेशन और एग्रीकल्चर जैसे अहम सेक्टर्स को कवर कर रही हैं.

दोनों ही क्षेत्र समाज की बुनियादी जरूरतों से जुड़े हैं और रजनी इन्हें बेहद संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के साथ संभालती हैं. खाली समय में रजनी को संगीत सुनना और किताबें पढ़ना पसंद है. ये न केवल उन्हें मानसिक सुकून देते हैं, बल्कि उनकी रचनात्मकता को भी ऊर्जा प्रदान करते हैं.

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