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IMD में कैसे मिलती है नौकरी, 8वें वेतन आयोग से कितनी हो जाएगी यहां की सैलरी?

IMD में साइंटिफिक असिस्टेंट बनने के लिए लिखित परीक्षा के जरिए चयन होता है और यह नौकरी विज्ञान से जुड़े युवाओं के लिए बेहतरीन मौका है.

अगर आप सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे हैं और विज्ञान से जुड़ा करियर बनाना चाहते हैं, तो भारत मौसम विज्ञान विभाग यानी IMD आपके लिए एक बेहतरीन विकल्प हो सकता है. मौसम की भविष्यवाणी से लेकर आपदा प्रबंधन तक अहम भूमिका निभाने वाला IMD समय-समय पर विभिन्न पदों पर भर्तियां निकालता है.

इनमें से एक प्रमुख पद है साइंटिफिक असिस्टेंट इस पद पर न सिर्फ सम्मानजनक नौकरी मिलती है, बल्कि सैलरी और भविष्य की ग्रोथ भी काफी अच्छी होती है. खास बात यह है कि आने वाले समय में 8वें वेतन आयोग के लागू होने से IMD कर्मचारियों की सैलरी में बड़ा इजाफा हो सकता है.

IMD में कैसे मिलती है नौकरी?

IMD में नौकरी पाने के लिए उम्मीदवारों को लिखित परीक्षा और कभी-कभी इंटरव्यू की प्रक्रिया से गुजरना होता है. भर्ती प्रक्रिया केंद्र सरकार के नियमों के तहत होती है. नोटिफिकेशन में पदों की संख्या, योग्यता, उम्र सीमा और चयन प्रक्रिया की पूरी जानकारी दी जाती है. इच्छुक उम्मीदवारों को तय समय के भीतर ऑनलाइन आवेदन करना होता है.

साइंटिफिक असिस्टेंट का काम क्या होता है?

IMD में साइंटिफिक असिस्टेंट का काम मौसम से जुड़े आंकड़ों को इकट्ठा करना, उनका विश्लेषण करना और वरिष्ठ वैज्ञानिकों की मदद करना होता है. इसके अलावा मौसम पूर्वानुमान, डाटा रिपोर्ट तैयार करना, कंप्यूटर सिस्टम पर काम करना और तकनीकी सहायता देना भी इस पद की जिम्मेदारी में शामिल है. यह नौकरी उन युवाओं के लिए खास है, जिन्हें विज्ञान, तकनीक और रिसर्च में रुचि हो.

पात्रता क्या चाहिए?

IMD में साइंटिफिक असिस्टेंट बनने के लिए उम्मीदवार के पास संबंधित विषय में पढ़ाई होना जरूरी है. अगर आपने फिजिक्स, मैथ्स, मौसम विज्ञान, वायुमंडलीय विज्ञान, कंप्यूटर साइंस, आईटी या कंप्यूटर एप्लीकेशन में बीएससी की डिग्री ली है और आपके कम से कम 60 प्रतिशत अंक हैं, तो आप इस पद के लिए योग्य माने जाते हैं.

इसके अलावा जिन उम्मीदवारों ने इलेक्ट्रॉनिक्स एंड टेलीकम्युनिकेशन, कंप्यूटर साइंस या इससे जुड़े किसी क्षेत्र में बीई या बीटेक किया है, वे भी आवेदन कर सकते हैं. वहीं, इलेक्ट्रॉनिक्स एंड टेलीकम्युनिकेशन इंजीनियरिंग में तीन साल का डिप्लोमा करने वाले उम्मीदवार, जिनके 60 प्रतिशत अंक हों, उन्हें भी मौका दिया जाता है. आमतौर पर इस पद के लिए न्यूनतम उम्र 18 साल और अधिकतम उम्र 30 साल रखी जाती है. हालांकि आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को सरकार के नियमों के अनुसार उम्र में छूट मिलती है.

IMD में अभी कितनी मिलती है सैलरी?

फिलहाल साइंटिफिक असिस्टेंट का पद 7वें वेतन आयोग के तहत लेवल-5 में आता है. इस लेवल पर कर्मचारियों की बेसिक सैलरी करीब 29,200 रुपये प्रति माह है. इसके साथ महंगाई भत्ता, मकान किराया भत्ता, यात्रा भत्ता और अन्य सरकारी सुविधाएं भी मिलती हैं.

8वें वेतन आयोग से कितनी बढ़ सकती है सैलरी?

रिपोर्ट्स के अनुसार अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि 8वें वेतन आयोग के बाद सैलरी कितनी हो जाएगी. अगर फिटमेंट फैक्टर 2.15 रखा जाता है, तो लेवल-5 पर काम कर रहे साइंटिफिक असिस्टेंट की बेसिक सैलरी सीधे बढ़कर करीब 62,780 रुपये प्रति माह हो सकती है. यानी मौजूदा बेसिक सैलरी के मुकाबले लगभग 33,580 रुपये का सीधा फायदा मिलेगा.

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रजनी उपाध्याय बीते करीब छह वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. उत्तर प्रदेश से ताल्लुक रखने वाली रजनी ने आगरा विश्वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएशन किया है. बचपन से ही पढ़ने-लिखने में गहरी रुचि थी और यही रुचि उन्हें मीडिया की दुनिया तक ले आई.

अपने छह साल के पत्रकारिता सफर में रजनी ने कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया. उन्होंने न्यूज, एंटरटेनमेंट और एजुकेशन जैसे प्रमुख वर्टिकल्स में अपनी पहचान बनाई. हर विषय में गहराई से उतरना और तथ्यों के साथ-साथ भावनाओं को भी समझना, उनकी पत्रकारिता की खासियत रही है. उनके लिए पत्रकारिता सिर्फ खबरें लिखना नहीं, बल्कि समाज की धड़कन को शब्दों में ढालने की एक कला है.

रजनी का मानना है कि एक अच्छी स्टोरी सिर्फ हेडलाइन नहीं बनाती, बल्कि पाठकों के दिलों को छूती है. वर्तमान में वे एबीपी लाइव में कार्यरत हैं, जहां वे एजुकेशन और एग्रीकल्चर जैसे अहम सेक्टर्स को कवर कर रही हैं.

दोनों ही क्षेत्र समाज की बुनियादी जरूरतों से जुड़े हैं और रजनी इन्हें बेहद संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के साथ संभालती हैं. खाली समय में रजनी को संगीत सुनना और किताबें पढ़ना पसंद है. ये न केवल उन्हें मानसिक सुकून देते हैं, बल्कि उनकी रचनात्मकता को भी ऊर्जा प्रदान करते हैं.

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