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बेटियां लिख रही हैं हायर एजुकेशन की नई कहानी, लगातार सातवें साल लड़कों से आगे; STEM में भी बढ़ी मजबूत भागीदारी

हायर एजुकेशन में बेटियां लगातार सातवें साल भी लड़कों से आगे रहीं. AISHE 2023-24 रिपोर्ट के अनुसार STEM में नामांकन पहली बार 1 करोड़ के पार पहुंचा.

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  • उच्च शिक्षा में 2.2 करोड़ छात्राओं ने दाखिला लिया.

देश में हायर एजुकेशन की तस्वीर तेजी से बदल रही है. अब कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में दाखिले के मामले में बेटियां लगातार अपनी बढ़त बनाए हुए हैं. अखिल भारतीय उच्च शिक्षा सर्वेक्षण (AISHE) 2023-24 के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, यह लगातार सातवें साल है जब उच्च शिक्षा में छात्राओं का नामांकन छात्रों से अधिक रहा. इतना ही नहीं, विज्ञान (Science) जैसे प्रमुख STEM सब्जेक्ट में भी छात्राओं की संख्या छात्रों से ज्यादा दर्ज की गई है.

रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2023-24 में उच्च शिक्षा में महिला सकल नामांकन अनुपात (GER) 31.2 प्रतिशत रहा, जबकि पुरुषों का GER 28.9 प्रतिशत दर्ज किया गया. इसी वजह से जेंडर पैरिटी इंडेक्स (GPI) 1.08 पर पहुंच गया. GPI का 1 से अधिक होना इस बात का संकेत है कि उच्च शिक्षा में महिलाओं की भागीदारी पुरुषों से अधिक है. खास बात यह है कि वर्ष 2017-18 से यह आंकड़ा लगातार 1 से ऊपर बना हुआ है.

पिछले कुछ वर्षों में छात्राओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिली है. 2014-15 की तुलना में 2023-24 में उच्च शिक्षा में पढ़ने वाली महिलाओं की संख्या बढ़कर 2.2 करोड़ हो गई है. यह करीब 42.2 प्रतिशत की वृद्धि है, जो पुरुषों की तुलना में अधिक तेज रही. सर्वे में अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग की छात्राओं की भागीदारी अच्छी रही. एससी वर्ग का GPI 1.11 और एसटी वर्ग का GPI 1.08 दर्ज किया गया. इसका मतलब है कि इन वर्गों में भी छात्राएं उच्च शिक्षा की ओर तेजी से बढ़ रही हैं.

1 करोड़ का आंकड़ा पार

साइंस, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित यानी STEM विषयों की बात करें तो इन कोर्स में पढ़ने वाले छात्रों की संख्या पहली बार एक करोड़ के आंकड़े को पार कर गई है. 2023-24 में कुल 1,01,88,988 छात्रों ने STEM विषयों में दाखिला लिया. इनमें करीब 57 लाख पुरुष और 44.8 लाख महिलाएं शामिल हैं.

STEM के भीतर सबसे ज्यादा लोकप्रिय सब्जेक्ट साइंस रहा, जिसमें 55.55 लाख से अधिक छात्र-छात्राएं पढ़ाई कर रहे हैं. इस विषय में छात्राओं की हिस्सेदारी 54.6 प्रतिशत रही, यानी विज्ञान में लड़कियां अब लड़कों से आगे निकल चुकी हैं. स्नातकोत्तर स्तर पर यह भागीदारी और बढ़कर 61.4 प्रतिशत तक पहुंच गई.

हालांकि, इंजीनियरिंग और टेक्नोलॉजी में अभी भी लैंगिक अंतर बना हुआ है. इस क्षेत्र में कुल 46.33 लाख छात्रों का नामांकन हुआ, लेकिन स्नातक स्तर पर छात्राओं की हिस्सेदारी केवल 31.1 प्रतिशत रही. यानी इंजीनियरिंग में लड़कियों की भागीदारी बढ़ने की अभी भी काफी गुंजाइश है.

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ये रहा पसंदीदा कोर्स

इंजीनियरिंग शाखाओं में कंप्यूटर इंजीनियरिंग सबसे पसंदीदा कोर्स रहा, जिसमें 18.4 लाख से ज्यादा छात्रों ने प्रवेश लिया. इसके बाद इलेक्ट्रॉनिक्स, मैकेनिकल और सिविल इंजीनियरिंग का स्थान रहा. वहीं, नई तकनीकों से जुड़े आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एंड मशीन लर्निंग (AI & ML) तथा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एंड डेटा साइंस जैसे कोर्स भी तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं. AISHE सर्वे में पहली बार इन दोनों विषयों को अलग श्रेणी के रूप में शामिल किया गया.

शोध के क्षेत्र में भी विज्ञान सबसे आगे रहा. देश में पंजीकृत 3.43 लाख पीएचडी शोधार्थियों में सबसे अधिक 23.4 प्रतिशत विज्ञान विषय से जुड़े हैं. इसके बाद इंजीनियरिंग एवं टेक्नोलॉजी और सोशल साइंस का स्थान रहा. रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि देश में महिलाओं के लिए समर्पित विश्वविद्यालयों की संख्या बढ़कर 18 हो गई है, जबकि 2014-15 में यह संख्या 11 थी.

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रजनी उपाध्याय बीते करीब छह वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. उत्तर प्रदेश से ताल्लुक रखने वाली रजनी ने आगरा विश्वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएशन किया है. बचपन से ही पढ़ने-लिखने में गहरी रुचि थी और यही रुचि उन्हें मीडिया की दुनिया तक ले आई.

अपने छह साल के पत्रकारिता सफर में रजनी ने कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया. उन्होंने न्यूज, एंटरटेनमेंट और एजुकेशन जैसे प्रमुख वर्टिकल्स में अपनी पहचान बनाई. हर विषय में गहराई से उतरना और तथ्यों के साथ-साथ भावनाओं को भी समझना, उनकी पत्रकारिता की खासियत रही है. उनके लिए पत्रकारिता सिर्फ खबरें लिखना नहीं, बल्कि समाज की धड़कन को शब्दों में ढालने की एक कला है.

रजनी का मानना है कि एक अच्छी स्टोरी सिर्फ हेडलाइन नहीं बनाती, बल्कि पाठकों के दिलों को छूती है. वर्तमान में वे एबीपी लाइव में कार्यरत हैं, जहां वे एजुकेशन और एग्रीकल्चर जैसे अहम सेक्टर्स को कवर कर रही हैं.

दोनों ही क्षेत्र समाज की बुनियादी जरूरतों से जुड़े हैं और रजनी इन्हें बेहद संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के साथ संभालती हैं. खाली समय में रजनी को संगीत सुनना और किताबें पढ़ना पसंद है. ये न केवल उन्हें मानसिक सुकून देते हैं, बल्कि उनकी रचनात्मकता को भी ऊर्जा प्रदान करते हैं.

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