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अग्निवीरों के लिए नया नियम! परमानेंट सैनिक बनने से पहले शादी पर रोक, गाइडलाइन जारी

भारतीय सेना ने अग्निवीरों के स्थायीकरण को लेकर नया नियम बनाया है, जिसके तहत स्थायी नियुक्ति से पहले शादी करने पर उम्मीदवार चयन से बाहर हो जाएगा.

अग्निवीर योजना के तहत सेना में भर्ती हुए लाखों युवाओं के मन में एक ही सपना होता है चार साल की सेवा के बाद भारतीय सेना में स्थायी सैनिक बनना. अब ऐसे युवाओं के लिए भारतीय सेना की ओर से एक नया और अहम नियम सामने आया है, जिसे जानना हर अग्निवीर के लिए बेहद जरूरी है. यह नियम सीधे तौर पर उनके निजी जीवन से जुड़ा है, क्योंकि इसमें शादी को लेकर साफ दिशा-निर्देश दिए गए हैं.

भारतीय सेना ने अग्निवीरों के स्थायीकरण की प्रक्रिया को लेकर यह तय किया है कि जो अग्निवीर स्थायी सैनिक बनना चाहते हैं, वे तब तक शादी नहीं कर सकते, जब तक उन्हें सेना में परमानेंट नियुक्ति नहीं मिल जाती. अगर कोई अग्निवीर इस प्रक्रिया के दौरान या स्थायी सैनिक बनने से पहले विवाह कर लेता है, तो वह स्थायी सेवा के लिए अयोग्य माना जाएगा. ऐसे अग्निवीर न तो स्थायी सैनिक बनने के लिए आवेदन कर पाएंगे और न ही चयन प्रक्रिया का हिस्सा बन सकेंगे.

इस नए नियम के सामने आते ही अग्निवीरों के बीच कई सवाल उठने लगे हैं. सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर वे शादी कब कर सकते हैं, ताकि उनका स्थायी सैनिक बनने का सपना भी पूरा हो और निजी जीवन भी आगे बढ़ सके. सेना की ओर से इस पर भी स्थिति साफ कर दी गई है.

विवाह से रहना होगा दूर

नए नियम के अनुसार, अग्निवीर तभी शादी कर सकते हैं जब वे भारतीय सेना में स्थायी सैनिक के रूप में नियुक्त हो जाएं. यानी जब तक स्थायी नियुक्ति का अंतिम परिणाम नहीं आ जाता, तब तक उन्हें विवाह से दूर रहना होगा. हालांकि इसमें ज्यादा लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा. अग्निवीरों को अपनी चार साल की सेवा पूरी करने के बाद लगभग 4 से 6 महीने का समय और देना होगा, जिसमें स्थायीकरण की पूरी प्रक्रिया पूरी की जाएगी.

कब हुई इसकी शुरुआत?

अग्निवीर योजना की शुरुआत साल 2022 में की गई थी. इस योजना के तहत भर्ती हुए पहले बैच की चार साल की सेवा अब पूरी होने वाली है. जून और जुलाई 2026 के आसपास 2022 बैच के अग्निवीरों की सेवा अवधि समाप्त हो जाएगी. अनुमान है कि पहले बैच में करीब 20 हजार युवा शामिल थे, जो अब सेवामुक्त होने जा रहे हैं.

इन सभी अग्निवीरों में से करीब 25 प्रतिशत को भारतीय सेना में स्थायी सैनिक बनने का मौका मिलेगा. इसके लिए चयन शारीरिक दक्षता, लिखित परीक्षा और अन्य मानकों के आधार पर किया जाएगा. चयन प्रक्रिया पूरी तरह से मेरिट और प्रदर्शन पर आधारित होगी. जो अग्निवीर इस प्रक्रिया में सफल होंगे, उन्हें सेना में परमानेंट नियुक्ति दी जाएगी.

हालांकि, स्थायी सैनिक बनने की प्रक्रिया सेवा खत्म होते ही उसी दिन पूरी नहीं हो जाती. इसके लिए अग्निवीरों को आवेदन करना होगा और फिर चयन की पूरी प्रक्रिया चलेगी. यह प्रक्रिया आमतौर पर 4 से 6 महीने तक चल सकती है. इसी दौरान सेना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जब तक अंतिम सूची जारी नहीं हो जाती, तब तक किसी भी अग्निवीर को शादी नहीं करनी चाहिए.

कब मिलेगी छूट?

रिपोर्ट्स के अनुसार सेना का कहना है कि अगर कोई अग्निवीर इस बीच विवाह करता है, तो उसे स्थायी सैनिक बनने की दौड़ से बाहर कर दिया जाएगा. ऐसे उम्मीदवार का आवेदन स्वीकार नहीं किया जाएगा, चाहे उसकी योग्यता कितनी ही अच्छी क्यों न हो. इसलिए अग्निवीरों को इस नियम को गंभीरता से समझने और मानने की सलाह दी गई है.

वहीं, जो अग्निवीर स्थायी सैनिक के रूप में चयनित हो जाते हैं, उन्हें नियुक्ति मिलने के बाद शादी करने की पूरी छूट होगी. एक बार सेना में परमानेंट जॉइन करने के बाद वे अपनी सुविधा और इच्छा के अनुसार कभी भी विवाह कर सकते हैं. उस समय उन पर यह पाबंदी लागू नहीं होगी.

यह भी पढ़ें - यूपी पुलिस कॉन्स्टेबल भर्ती में अब 3 साल की छूट, अब इतने साल तक के युवा कर सकेंगे आवेदन

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रजनी उपाध्याय बीते करीब छह वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. उत्तर प्रदेश से ताल्लुक रखने वाली रजनी ने आगरा विश्वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएशन किया है. बचपन से ही पढ़ने-लिखने में गहरी रुचि थी और यही रुचि उन्हें मीडिया की दुनिया तक ले आई.

अपने छह साल के पत्रकारिता सफर में रजनी ने कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया. उन्होंने न्यूज, एंटरटेनमेंट और एजुकेशन जैसे प्रमुख वर्टिकल्स में अपनी पहचान बनाई. हर विषय में गहराई से उतरना और तथ्यों के साथ-साथ भावनाओं को भी समझना, उनकी पत्रकारिता की खासियत रही है. उनके लिए पत्रकारिता सिर्फ खबरें लिखना नहीं, बल्कि समाज की धड़कन को शब्दों में ढालने की एक कला है.

रजनी का मानना है कि एक अच्छी स्टोरी सिर्फ हेडलाइन नहीं बनाती, बल्कि पाठकों के दिलों को छूती है. वर्तमान में वे एबीपी लाइव में कार्यरत हैं, जहां वे एजुकेशन और एग्रीकल्चर जैसे अहम सेक्टर्स को कवर कर रही हैं.

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