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Admissions 2020: क्या हैं ऑनलाइन एडमिशन की चुनौतियां, कैसे पाएं इनसे पार, यहां जानें

इस बार कोरोना की वजह से लगभग सभी यूनिवर्सिटीज और इंस्टीट्यूट्स में एडमीशन प्रॉसेस को पूरी तरह ऑनलाइन कर दिया गया है. ऑनलाइन एडमिशन की राह में आने वाली बाधाओं पर डालते हैं एक नजर.

Online Admissions 2020 Challenges: इस साल कोरोना की वजह से शिक्षा के क्षेत्र में बड़े-बड़े बदलाव हुए हैं. इन्हीं में से एक है एडमिशन प्रक्रिया को पूरी तरह ऑनलाइन कर देना. ऑफलाइन आवेदनों का विकल्प इस बार अधिकतर यूनिवर्सिटीज या इंस्टीट्यूट्स नहीं अपना रहे हैं. ऐसा स्टूडेंट्स साथ ही संस्थान के स्टाफ की सुरक्षा के लिए किया जा रहा है.

ऑनलाइन एडमिशन, इस साल कम से कम च्वॉइस की जगह कंपल्सन हैं क्योंकि कोरोना के कारण कोई ऑप्शन बचा ही नहीं है सिवाय इसके कि ऑनलाइन ही पूरी प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाए. ऑनलाइन एडमिशन के जहां अपने फायदे हैं, वहीं नुकसान भी हैं. एकदम से इस स्थिति के बन जाने से बहुत सी यूनिवर्सिटीज या इंस्टीट्यूट्स अभी भी टेक्नोलॉजिकली इतने उन्नत नहीं हो पाए हैं कि पूरी प्रक्रिया को ऑनलाइन संपन्न कर लें. आज जानते हैं ऑनलाइन एडमीशंस की चुनौतियां, संस्थान साथ ही स्टूडेंट्स के लिए क्या हैं.

नहीं बना पाए यूजर फ्रेंडली एप्लीकेशन फॉर्म

कोरोना के पहले तक बहुत से संस्थान ऑनलाइन एडमीशन को एक विकल्प के तौर पर लेते थे. ऐसे में कई जगहों पर वे टेक्नोलॉजिकली इक्विपड नहीं हैं जो इस तरह के प्रेशर को इतनी बड़ी संख्या में संभाल पाएं. पहले हर स्टूडेंट केवल ऑनलाइन फॉर्म नहीं भरता था, इसलिए जितने ऑनलाइन फॉर्म उन्हें मिलते थे, उतने मैनेज करने के लिए वे तैयार थे लेकिन अब सारे फॉर्म भी ऑनलाइन हो गए हैं. इसके साथ ही उनके यहां का कंप्यूटर विभाग भी इस तरह की समस्याओं के लिए तैयार नहीं था. कई जगहों पर तो इतने टेक सेवी लोग ही नहीं हैं जो इस स्थिति को हैंडल करने में सक्षम हों. इसका नतीजा यह हुआ कि कई जगहों पर यूजर फ्रेंडली एप्लीकेशन सिस्टम बन ही नहीं पाया. स्टूडेंट्स को फॉर्म भरने में तमाम तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ा.

स्टूडेंट्स का पक्ष- कुछ जगहों पर फॉर्म यूजर फ्रेंडली न होने से स्टूडेंट्स को उन्हें भरने में बड़ी समस्या हुई. कहीं फॉर्म कंप्यूटर, लैपटॉप पर तो खुल रहे थे पर मोबाइल पर नहीं. इससे फॉर्म भरने में बहुत समय लग रहा था और छोटी-छोटी गलतियां हो रही थीं. इससे स्टूडेंट्स को संतुष्टि भी नहीं मिल रही थी कि सब कुछ सही हुआ है या नहीं.

क्या हो सकता है संभावित उपाय- अपने एडमिशन फॉर्म ऐसे बनाएं जो अधिक से अधिक प्लेटफॉर्म्स पर आसानी से खुलें. यूजर फ्रेंडली एप्लीकेशन फॉर्म होने से स्टूडेंट्स की क्वैरी 50 प्रतिशत तक कम हो सकती है. इन्हें भरने में कम समय लगता है और इन्हें कम टेक्नो सेवी स्टूडेंट्स भी आसानी से फिल कर सकते हैं. फाइल्स ज्यादा भारी न हों तो बेहतर है क्योंकि हर जगह वाईफाई क्वालिटी बहुत अच्छी नहीं होती.

स्टाफ नहीं है इन चुनौतियों के लिए तैयार

कुछ समय पहले तक टेक्नोलॉजी का इतना प्रयोग होता ही नहीं था, जितना अब होता है. एकदम से नया स्टाफ हायर करके उसे नया काम देना या पुराने स्टाफ से ही अधिकतम आउटपुट की उम्मीद करना बेमानी है. जो हैं उन्हीं को सब मैनेज करना है और ऐसे में गलतियां होना स्वाभाविक है. इसके साथ ही टेक्नोलॉजिकल एरर ऐसी समस्या है जिसके लिए किसी को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता न ही किसी को रातों-रात टेक्नोसेवी बनाया जा सकता है. संस्थान बड़ी मात्रा में स्टूडेंट्स का डेटा संभालने में भी समस्या का सामना कर रहे हैं. डेटा की सुरक्षा भी एक बड़ा मुद्दा है जिससे संस्थान जूझ रहे हैं. कुछ दिन पहले डीयू के डेटा पर हैकर्स ने अटैक कर दिया था.

स्टूडेंट्स का पक्ष- स्टूडेंट्स का कहना है कि उनके साथ न जाने कितनी बार ऐसा हुआ कि फॉर्म भरते समय कभी फोटो अपलोड नहीं हो रही है तो कभी डॉक्यूमेंट्स. यही नहीं कई जगहों पर प्रोफाइल बनाने के बाद रजिस्ट्रेशन कराने का नियम था. ऐसी जगहों पर स्टूडेंट्स ने घंटो मेहनत करके प्रोफाइल बना ली पर वो अपलोड नहीं हुयी. इस तरह की तमाम समस्याओं का सामना वे ऑनलाइन फॉर्म भरते समय कर रहे हैं.

क्या हो सकता है संभावित उपाय- जो हेल्पलाइन नंबर या ईमेल आदि यूनिवर्सिटीज और इंस्टीट्यूट्स द्वारा स्टूडेंट्स की मदद के लिए उपलब्ध कराए जाते हैं, उन पर जल्दी और प्रॉपर रिस्पांस दिया जाए ये आवश्यक है. कई बार हेल्पलाइन नंबर उठता ही नहीं, कई बार मेल का जवाब कई दिनों तक नहीं आता, इनसे बचा जाए. इसके साथ ही ऐसी व्यवस्था हो सकती है जिसके अंतर्गत संस्थान द्वारा कंफर्मेशन मेल या मैसेज स्टूडेंट तक पहुंचे ताकि वे श्योर हो सकें कि उन्होंने सफलतापूर्वक फॉर्म जमा कर लिया है. साथ ही चैट का ऑप्शन भी दिया जा सकता है जहां स्टूडेंट की समस्या का समाधान तुरंत हो सके.

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