सोना डेढ़ लाख तो चांदी पहुंची तीन लाख के पार, क्या ये खरीदने का सही वक्त? जानें कहां जाकर थमेगी कीमत
कीमतों में इस जबरदस्त तेजी के पीछे कई बड़े अंतरराष्ट्रीय कारण बताए जा रहे हैं. सबसे अहम वजह ग्रीनलैंड संकट और उससे जुड़ा भू-राजनीतिक तनाव है, जिसने वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता का माहौल बना दिया है.

Gold and Silver Price Predictions: देश और दुनिया में सोने और चांदी की कीमतें लगातार नए रिकॉर्ड बना रही हैं और भू-राजनीतिक तनावों के बीच इनकी चमक दिन-ब-दिन तेज होती जा रही है. ऐसे माहौल में हर निवेशक और आम आदमी के मन में यही सवाल है कि क्या यह सोना-चांदी खरीदने का सही समय है या अब इंतजार करना चाहिए. मौजूदा स्थिति यह है कि 10 ग्राम यानी एक तोला सोना 1.5 लाख रुपये के पार पहुंच चुका है और सोने का भाव 1,53,831 रुपये प्रति 10 ग्राम के नए ऑल टाइम हाई पर चला गया है. वहीं चांदी ने भी सारे पुराने रिकॉर्ड तोड़ते हुए 3,26,487 रुपये प्रति किलो का स्तर छू लिया है, यानी चांदी अब पूरे तीन लाख रुपये किलो से भी महंगी हो चुकी है.
अगर सीधे-सीधे रिटर्न की बात करें तो सोने-चांदी ने निवेशकों को चौंका दिया है. आंकड़ों के मुताबिक, जिसने ठीक एक साल पहले 10 ग्राम सोना खरीदा था, उसे आज करीब 80 फीसदी तक का मुनाफा मिल चुका है. जहां बैंक की एफडी में पैसा डबल होने में 7 से 8 साल का वक्त लग जाता है, वहीं सोने और चांदी ने महज एक साल में ही ऐसा रिटर्न दे दिया है, जो कई बड़े शेयर भी नहीं दे पाए. यही वजह है कि निवेशकों का रुझान तेजी से कीमती धातुओं की ओर बढ़ रहा है.
कीमत चढ़ने के क्या कारण?
कीमतों में इस जबरदस्त तेजी के पीछे कई बड़े अंतरराष्ट्रीय कारण बताए जा रहे हैं. सबसे अहम वजह ग्रीनलैंड संकट और उससे जुड़ा भू-राजनीतिक तनाव है, जिसने वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता का माहौल बना दिया है. जब भी युद्ध या बड़े टकराव की आशंका बढ़ती है, निवेशक शेयर बाजार जैसे जोखिम वाले निवेश से पैसा निकालकर सोने जैसे सुरक्षित विकल्पों की ओर रुख करते हैं. इसी को सेफ हेवन डिमांड कहा जाता है, जिसने सोने की कीमतों को मजबूत सहारा दिया है.
इसके अलावा अमेरिकी डॉलर का कमजोर होना और जापान के सरकारी बॉन्ड्स में आई गिरावट ने भी सोने की चमक बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है. जब करेंसी और बॉन्ड्स कमजोर पड़ते हैं, तो निवेशक सोने में पैसा लगाना ज्यादा सुरक्षित मानते हैं. वहीं अमेरिका और यूरोप के बीच टैक्स और संभावित ट्रेड वॉर की आशंकाओं ने भी बाजार में डर का माहौल बनाया है. बड़े संस्थागत निवेशक जोखिम लेने के बजाय गोल्ड में निवेश बढ़ा रहे हैं, जिससे मांग लगातार ऊंची बनी हुई है.
खरीदें या इंतजार करें?
चांदी की बात करें तो उसकी तेजी सोने से भी ज्यादा तेज नजर आ रही है. इसकी एक बड़ी वजह इंडस्ट्रियल डिमांड है. सोलर पैनल, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स और एआई सर्वर जैसे आधुनिक सेक्टर्स में चांदी की भारी जरूरत होती है. मांग तेजी से बढ़ रही है, लेकिन सप्लाई सीमित है, जिसके चलते चांदी के भाव रॉकेट की तरह ऊपर चढ़ रहे हैं.
आगे के रुख को लेकर एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर वैश्विक तनाव और अनिश्चितता बनी रहती है तो सोने और चांदी की यह तेजी कुछ समय और जारी रह सकती है. बाजार में यह चर्चा भी है कि चांदी के दाम 3.5 से 4 लाख रुपये प्रति किलो तक जा सकते हैं, जबकि सोने के भाव भी और ऊपर के स्तर छू सकते हैं. हालांकि, विशेषज्ञ यह भी चेतावनी दे रहे हैं कि अगर हालात सुधरते हैं या ब्याज दरों में बदलाव आता है तो कीमतों में तेज करेक्शन यानी गिरावट भी देखने को मिल सकती है.
ऐसे में आम निवेशकों के लिए सबसे बड़ा सवाल यही है कि खरीदें या इंतजार करें. विशेषज्ञों की सलाह है कि जिन परिवारों को शादी-ब्याह या किसी जरूरी जरूरत के लिए सोना-चांदी खरीदनी है, वे जरूरत के हिसाब से चरणबद्ध तरीके से खरीदारी करें. वहीं निवेशकों को एक साथ बड़ी रकम लगाने के बजाय धीरे-धीरे और सोच-समझकर निवेश करने की सलाह दी जा रही है, ताकि कीमतों में उतार-चढ़ाव का जोखिम कम किया जा सके.
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Source: IOCL

























