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एआई के आने से सबसे ज्यादा कौन से सेक्टर पर मंडरा रहा छंटनी का खतरा? जानें क्या कहती है रिपोर्ट्स

2025 में गूगल, माइक्रोसॉफ्ट और टीसीएस जैसी दिग्गज कंपनियों ने हजारों कर्मचारियों की छंटनी कर दी. इससे यह साफ संकेत मिलता है कि आने वाले समय में एआई नौकरी बाज़ार को तेज़ी से बदलने वाला है.

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  • एआई के बढ़ते प्रभाव से 2025 में गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, टीसीएस जैसी कंपनियों ने छंटनी की।
  • भारत में अगले पांच वर्षों में चार करोड़ नौकरियां बदलेंगी, रिटेल, फाइनेंस, आईटी प्रभावित।
  • कॉल सेंटर, डेटा एंट्री, लेखन और अनुवाद पर एआई का सबसे अधिक खतरा।
  • चैटबॉट और एआई-संचालित सिस्टम कस्टमर केयर और डेटा एंट्री का काम संभाल रहे।

AI Impact on Jobs: देश और दुनिया में तेज़ी से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) अपनी जगह बना रहा है. टेक और आईटी कंपनियों से लेकर हॉस्पिटैलिटी सेक्टर तक, लगभग हर उद्योग में एआई को लेकर बड़े पैमाने पर निवेश हो रहा है. इसी बदलते परिदृश्य का असर यह हुआ कि 2025 में गूगल, माइक्रोसॉफ्ट और टीसीएस जैसी दिग्गज कंपनियों ने हजारों कर्मचारियों की छंटनी कर दी. इससे यह साफ संकेत मिलता है कि आने वाले समय में एआई नौकरी बाज़ार को तेज़ी से बदलने वाला है. सबसे बड़ा सवाल यही है कि किन सेक्टरों की नौकरियों पर इसका सबसे अधिक प्रभाव होगा.

किस सेक्टर पर सबसे ज्यादा AI का असर?

विभिन्न रिसर्च रिपोर्ट एआई के प्रभाव को लेकर चौंकाने वाले आंकड़े प्रस्तुत करती हैं. कंसल्टिंग एजेंसी EY ने अपनी एक रिपोर्ट में अनुमान लगाया है कि भारत में आने वाले पाँच वर्षों में लगभग चार करोड़ नौकरियाँ पूरी तरह बदल जाएंगी. इसका अर्थ है कि वर्तमान में जो काम आप कर रहे हैं, भविष्य में वही काम अलग रूप और कौशल के साथ किया जाएगा. रिपोर्ट के अनुसार तीन सेक्टर—रिटेल, फाइनेंस और आईटी—एआई से सबसे अधिक प्रभावित होंगे.

हालाँकि अलग-अलग अध्ययनों से यह स्पष्ट होता है कि सबसे पहले और सबसे अधिक खतरा कॉल सेंटर यानी कस्टमर केयर सेक्टर पर मंडरा रहा है. पहले ग्राहक सेवा प्रतिनिधि कॉल पर सहायता देते थे, लेकिन अब उनकी जगह चैटबॉट और एआई-संचालित सिस्टम ले रहे हैं. कई कंपनियाँ तेजी से एआई को प्रशिक्षण देकर उसे ग्राहक सहायता की जिम्मेदारी सौंप रही हैं.

कस्टमर केयर के बाद डेटा इंट्री पर गाज!

कस्टमर केयर के बाद जिस नौकरी पर सबसे बड़ा खतरा है, वह है डेटा एंट्री ऑपरेटर की. केवाईसी वेरिफिकेशन, अकाउंटिंग क्लर्क और बेसिक डेटा एंट्री जैसे काम अब एआई-संचालित सिस्टम आसानी से कर पा रहे हैं. कंप्यूटर खुद डेटा को पहचानकर प्रोसेस करने लगा है, जिससे ऐसे पदों की मांग आने वाले समय में sharply कम हो सकती है.

तीसरी सबसे जोखिम वाली नौकरी लेखन और अनुवाद की बताई जा रही है. पत्रकारिता से जुड़े कई क्षेत्रों में पहले अनुवादकों और बेसिक राइटिंग करने वालों की काफी मांग थी, लेकिन अब एआई टूल्स आसानी से सामान्य लेखन और ट्रांसलेशन कर पा रहे हैं. हालांकि विशेषज्ञता वाले लेखन की अभी भी मांग बनी रहेगी, लेकिन बेसिक कंटेंट राइटिंग और ट्रांसलेशन पर एआई का खतरा लगातार बढ़ रहा है.

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राजेश कुमार पत्रकारिता जगत में पिछले करीब 14 सालों से ज्यादा वक्त से अपना योगदान दे रहे हैं. राष्ट्रीय और सामाजिक मुद्दों से लेकर अपराध जगत तक, हर मुद्दे पर वह स्टोरी लिखते आए हैं. इसके साथ ही, किसी खबरों पर किस तरह अलग-अलग आइडियाज के साथ स्टोरी की जाए, इसके लिए वह अपने सहयोगियों का लगातार मार्गदर्शन करते रहे हैं. इनकी अंतर्राष्ट्रीय जगत की खबरों पर खास नज़र रहती है, जबकि भारत की राजनीति में ये गहरी रुचि रखते हैं. इन्हें क्रिकेट खेलना काफी पसंद और खाली वक्त में पसंद की फिल्में भी खूब देखते हैं. पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखने से पहले उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में मास्टर ऑफ ब्रॉडकास्ट जर्नलिज्म किया है. राजनीति, चुनाव, अंतरराष्ट्रीय संबंधों और अर्थव्यवस्था जैसे मुद्दों पर राजेश कुमार लगातार लिखते आ रहे हैं.
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