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Crude Oil Crisis: कच्चे तेल से बिगाड़ेगा घर का बजट! 100 डॉलर के पार पहुंचा क्रूड, अर्थशास्त्री ने दी बड़ी चेतावनी

Crude Oil Crisis: पश्चिम एशिया के संकट का असर भारत के करोड़ों परिवारों की जेब पर पड़ सकता है. अगर कच्चे तेल की कीमत ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं तो आने वाले समय में महंगाई और खर्च दोनों बढ़ सकते हैं.

Crude Oil Crisis: पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर अब दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं पर दिखने लगा है. सबसे ज्यादा चिंता कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों को लेकर है. हालात ऐसे बन गए हैं कि ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर चुका है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर ये स्थिति लंबे समय तक बनी रही तो भारत में पेट्रोल-डीजल महंगा हो सकता है और आम लोगों के घरेलू बजट पर दबाव बढ़ सकता है.

क्यों बढ़ रही हैं तेल की कीमतें?

इंफोमेरिक्स रेटिंग्स के मुख्य अर्थशास्त्री मनोरंजन शर्मा ने ANI से हुई बातचीत में बताया है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में पैदा हुई बाधाओं ने वैश्विक तेल आपूर्ति को प्रभावित किया है. यह समुद्री मार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल व्यापार मार्गों में से एक है. भारत भी अपनी तेल जरूरतों के लिए इस रास्ते पर काफी हद तक निर्भर है. शर्मा के मुताबिक, भारत के कुल आयातित कच्चे तेल का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के जरिए आता है.

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100 डॉलर तक पहुंचा कच्चा तेल

विशेषज्ञों के अनुसार, जब पश्चिम एशिया में तनाव की शुरुआत हुई थी तब कच्चे तेल की कीमत 67-68 डॉलर प्रति बैरल के आसपास थी. लेकिन हालात बिगड़ने के बाद इसमें तेजी से उछाल आया है. वर्तमान में ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच चुका है, जबकि स्पॉट मार्केट में कीमतें 120 से 130 डॉलर प्रति बैरल तक बताई जा रही हैं. यह बढ़ोतरी वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए चिंता का विषय बन गई है.

आम आदमी पर क्या होगा असर?

कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर पेट्रोल और डीजल के दामों पर पड़ता है. ईंधन महंगा होने से परिवहन लागत बढ़ जाती है, जिसका असर खाद्य पदार्थों, सब्जियों, फलों और अन्य जरूरी सामानों की कीमतों पर भी दिखाई देता है. मनोरंजन शर्मा का कहना है कि बढ़ती ईंधन कीमतें घरेलू बजट को प्रभावित करेंगी और परिवारों के लिए अतिरिक्त आर्थिक बोझ पैदा करेंगी.

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सरकार के सामने चुनौती

हालांकि सरकार लगातार आम लोगों को राहत देने की कोशिश कर रही है, लेकिन वैश्विक ऊर्जा संकट के सामने उसकी भी सीमाएं हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय तक बढ़ी हुई लागत को सरकार या तेल कंपनियां अपने ऊपर नहीं ले सकतीं. यही वजह है कि पिछले कुछ सप्ताहों में ईंधन की कीमतों में धीरे-धीरे बढ़ोतरी देखने को मिली है.

क्या है समाधान?

मनोरंजन शर्मा का मानना है कि भारत को भविष्य में ऐसे झटकों से बचने के लिए नवीकरणीय ऊर्जा और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों पर अधिक ध्यान देना होगा. उन्होंने कहा कि देश पहले से इस दिशा में आगे बढ़ रहा है और भारत के कुल ऊर्जा उत्पादन में नवीकरणीय ऊर्जा की हिस्सेदारी करीब एक-तिहाई तक पहुंच चुकी है. हालांकि आयातित जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने में अभी समय लगेगा.

About the author सृष्टि

'एबीपी नेटवर्क' में सीनियर कॉपी-एडिटर के तौर पर काम कर रहीं सृष्टि का डिजिटल मीडिया में 4 सालों से अधिक का अनुभव है.बिजनेस, एंटरटेनमेंट, धर्म, लाइफस्टाइल और यात्रा सेक्शन में लेखन, इंटरव्यू और विश्लेषण इनकी विशेषज्ञता है.सीसीएसयू से मास कम्युनिकेशन में स्नातक कर चुकीं सृष्टि ने अपने करियर की शुरुआत नवभारत टाइम्स के साथ की थी, जिसके बाद वो 2.5 साल तक टाइम्स नाउ नवभारत का हिस्सा भी रहीं.फाइनेंस के साथ फिल्मी कीड़ा होना न केवल इनका पेशा बल्कि हिस्सा है.

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