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महंगाई की दोहरी मार: खाने का तेल ₹182 के पार, रिटेल इंफ्लेशन 3.4% पर पहुंची, बड़े झटके की चेतावनी

Palm Oil Prices rise: ईरान-अमेरिका तनाव के चलते पाम ऑयल की सप्लाई और ट्रांसपोर्ट महंगा हो गया है, जिससे खाने का तेल, साबुन, बिस्किट और LPG तक के दाम बढ़कर आम आदमी का बजट बिगड़ रहा है.

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  • रसोई गैस ₹60, व्यावसायिक गैस ₹195.50 महंगी हुई।

US-Iran War: लगभग दो महीने से चल रही ईरान-अमेरिका की जंग के कारण अब हालात यह हैं कि खाने का तेल, रसोई गैस, साबुन, बिस्किट हर चीज़ धीरे-धीरे महंगी हो रही है और सबसे बड़ा झटका आम आदमी को पाम ऑयल दे रहा है. साबुन, बिस्किट, हेयर ऑयल, नूडल्स और खाने का तेल. इन सबमें पाम ऑयल होता है. बाज़ार में मिलने वाले Fortune, Gemini, Ruchi Gold जैसे खाने के तेल के ब्रांड्स में भी बड़ा हिस्सा पाम ऑयल का होता है. यही वजह है कि पाम ऑयल की कीमत बढ़ने का असर सीधे रसोई के बजट पर पड़ता है.

आता इंडोनेशिया से है - जंग ने महंगा कर दिया

भारत हर साल करीब 1.67 करोड़ टन खाद्य तेल आयात करता है. इसमें सबसे बड़ा हिस्सा करीब 40 फीसदी पाम ऑयल का होता है जो इंडोनेशिया और मलेशिया से आता है. यह तेल Strait of Malacca के रास्ते समुद्री जहाज़ों से भारत पहुंचता है लेकिन ईरान-अमेरिका जंग के कारण पूरी दुनिया में समुद्री जहाज़रानी का बीमा महंगा हो गया है और freight costs बढ़ गई हैं यह सारा बोझ आखिरकार उस तेल की कीमत पर आया जो आप बाज़ार से खरीदते हैं.

दूसरी तरफ इंडोनेशिया ने तो अब  बोल दिया कि वो अब इसको बाहर बेचने पर कंट्रोल लगाएगा ख़ुद ही इस्तेमाल करेगा क्योंकि पाम ऑयल से बायो-डीज़ल भी बनाया जाता है और इंडोनेशिया में तो डीज़ल में इसको मिलाया भी जाता है तो इसकी सप्लाई को लेकर लगातार संशय बना हुआ है.

मार्च में 19 फीसदी कम आया Palm ऑयल

मार्च 2026 में भारत का पाम ऑयल आयात 19 फीसदी गिरकर तीन महीने के सबसे निचले स्तर पर आ गया. वजह साफ है कीमतें इतनी बढ़ गईं कि भारतीय आयातकों ने खरीद ही कम कर दी लेकिन मुसीबत यहीं नहीं रुकी फरवरी 2026 में सनफ्लावर ऑयल का आयात भी करीब आधा हो गया West Asia संकट और बढ़ती कीमतों की वजह से.

अप्रैल में भी सनफ्लावर ऑयल की सप्लाई दबाव में बनी हुई है. जब दोनों बड़े आयातित तेल एक साथ कम हों तो बाज़ार में दाम चढ़ेंगे ही और यही हो भी रहा है. कुछ बाज़ारों में तो  खाने का तेल ₹182 प्रति लीटर तक पहुंच गया है. ईरान-अमेरिका युद्ध के असर से खाने का तेल औसतन 7 फीसदी महंगा हुआ है.

साबुन, हेयर ऑयल, बिस्किट - पाम ऑयल हर जगह 

पाम ऑयल सिर्फ खाने के तेल में नहीं होता. Lux, Lifebuoy, Cinthol जैसे साबुनों में पाम ऑयल डेरिवेटिव होता है. बालों में लगाने वाले कई हेयर ऑयल प्रोडक्ट्स palm kernel oil से बनते हैं. Parle, Britannia जैसी बड़ी कंपनियां बिस्किट और नमकीन बनाने में पाम ऑयल का भारी इस्तेमाल करती हैं. अब जब पाम ऑयल की input cost बढ़ गई है तो FMCG कंपनियां दो में से एक रास्ता अपना रही हैं या तो कीमत बढ़ाओ या फिर उतने ही दाम में मात्रा घटा दो. इसे Shrinkflation कहते हैं. दोनों में नुकसान आपका ही है.

ईरान संकट के बाद घरेलू रसोई गैस सिलेंडर पहले ही ₹60 महंगा हो चुका है. Commercial LPG यानी जो ढाबों, छोटे रेस्टोरेंट और होटलों में इस्तेमाल होती है उसमें ₹195.50 की बढ़ोतरी हो चुकी है. इसका मतलब यह है कि जो खाना आप बाहर खाते हैं वो भी अब पहले से महंगा होगा. एक तरफ घर की रसोई का बजट बिगड़ रहा है दूसरी तरफ बाहर खाना भी अब राहत नहीं देता.

सरकारी महंगाई के आंकड़े भी चढ़ रहे हैं

मार्च 2026 में भारत की खुदरा महंगाई यानी Retail Inflation बढ़कर 3.4 फीसदी हो गई जो फरवरी में यह 3.2 फीसदी थी. खाना पकाने के ईंधन की महंगाई 4 फीसदी से ऊपर चली गई. Wholesale Price Inflation मार्च में 3.88 फीसदी हो गई crude rates में उछाल की वजह से और अब तो एक्सपर्ट्स की चेतावनी यह है कि अप्रैल में food inflation और भी ऊपर जा सकती है यानी जो आंकड़ा अभी दिख रहा है वो पूरी तस्वीर नहीं है असली असर अभी आना बाकी है.

यहां तक की Reserve Bank of India ने खुद माना है कि ईरान-अमेरिका युद्ध का असर भारत की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है. RBI ने पांच बड़े खतरे गिनाए हैं और भारत की high growth, low inflation  दबाव में है. सरकार ने तेल आपूर्ति बचाने के लिए Russia से crude imports बढ़ाए हैं. लेकिन खाद्य तेल की कहानी अलग है क्योंकि वहां रूस से कोई substitute नहीं आता.

अब इसको ऐसे समझ लीजिये की एक सामान्य चार लोगों के मध्यमवर्गीय परिवार का हिसाब लगाएं तो 5 लीटर खाने के तेल पर करीब ₹45 ज़्यादा खर्च, LPG सिलेंडर पर ₹60 ज़्यादा, साबुन-हेयर ऑयल-बिस्किट  पर मिलाकर ₹45 से ₹60 ज़्यादा यानी हर महीने ₹150 से ₹165 का अतिरिक्त बोझ. साल भर में यह रकम ₹1,800 से ₹2,000 तक बनती है और यह सिर्फ शुरुआत है FMCG कंपनियों पर FY27 में भी input cost का दबाव बना रहेगा.

यह समझे की सरकार के पास क्या विकल्प हैं?

सरकार के पास आयात शुल्क घटाने का विकल्प है जो 2024 में भी आज़माया जा चुका है. NMEO-OP यानी National Mission on Edible Oils - Oil Palm के तहत देश में पाम ऑयल की खेती बढ़ाने की कोशिश भी जारी है लेकिन खेती बढ़ाना एक लंबी प्रक्रिया है - इसका असर तुरंत नहीं दिखता. फिलहाल जब तक कोई ठोस राहत नहीं मिलती रसोई का बजट आम आदमी को खुद ही संभालना होगा.

About the author वरुण भसीन

वरुण भसीन एबीपी न्यूज़ में प्रिंसिपल कॉरेस्पॉन्डेंट हैं. पिछले 9 साल से पत्रकारिता कर रहे हैं. वे एयरलाइंस, रेलवे और सड़क-परिवहन से जुड़ी खबरें कवर करते हैं. इससे पहले वे कई संस्थानों में काम कर चुके हैं. वरुण न्यूज जगत से जुड़ी डॉक्यूमेंट्री फिल्में भी बनाते आए हैं. वरुण ने MBM यूनिविर्सिटी जोधपुर से पढ़ाई की है. संपर्क करने के लिए मेल आईडी है- varunb@abpnetwork.com

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