अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरों में नहीं किया बदलाव, जानें भारत पर इसका असर
US Fed Meeting: ईरान संघर्ष के चलते कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता है. तेल की कीमतें बढ़ने से ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट बढ़ेगा, जिससे बाकी चीजों की भी कीमतें बढ़ेंगी, फिर महंगाई बढ़ने का खतरा बना रहेगा.

US Fed Meeting 2026: अमेरिका के केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व ने लगातार पांचवीं बैठक में ब्याज दरों को स्थिर रखने का फैसला लिया है. 29 जुलाई को समाप्त हुई इस बैठक में फेड रिजर्व ने अपनी बेंचमार्क दर को 3.5%-3.75% पर बनाए रखा. जैसा कि पहले ही बताया जा चुका है कि यह फेड रिजर्व की इस साल लगातार ऐसी पांचवीं नीतिगत बैठक है, जिसमें ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया.
महंगाई पर क्या है फेड का रुख?
ईरान और अमेरिका में छिड़ी जंग के चलते तेल की कीमतों के फिर से बढ़ने का खतरा बना हुआ है. फेड यह देखना चाहता है कि इस सप्लाई शॉक का महंगाई पर क्या स्थायी असर होगा. चेयरमैन केविन वॉर्श ने कीमतों में स्थिरता बनाए रखने के लिए फेड की प्रतिबद्धता पर जोर देते हुए कहा कि फेड रिजर्व महंगाई को काबू में रखने और आर्थिक स्थिरता बनाए रखने के बीच बैलेंस बनाकर चल रहा है.
फेड प्रमुख ने यह साफ कह दिया कि केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में बदलाव को लेकर हड़बड़ी में ऐसा कोई कदम नहीं उठाएगा, जिससे अमेरिकी अर्थव्यवस्था मंदी की चपेट में आ जाए. अमेरिका में महंगाई दर साल-दर-साल के आधार पर अभी 3.5% पर बनी हुई है. फेड को भरोसा है कि सख्त मौद्रिक नीतियां इसे धीरे-धीरे इसके आदर्श 2% पर ले जाएगी. फेड प्रमुख ने कहा, ''हमने एक नया चैप्टर शुरू किया है और हम समझते हैं कि पांच साल से ज्यादा समय से टारगेट से ऊपर चल रही महंगाई को नौ हफ्तों में या कीमतों में आई मामूली कमी से एक महीने में ठीक नहीं किया जा सकता. फेड महंगाई को वापस 2% के टारगेट पर लाने के अपने इरादे से पीछे नहीं हटेगा.''
फेडरल रिजर्व की आंतरिक असहमति का नतीजा
फेड रिजर्व की बैठक में 3 सदस्यों का मानना था कि महंगाई दर पांच साल से अधिक समय तक 2% के लक्ष्य से ऊपर हे इसलिए ब्याज दर में तुरंत 0.25% की कटौती की जानी चाहिए. इसके विपरीत केविन के नेतृत्व वाले बहुमत का मानना था कि ईरान-अमेरिका युद्ध के चलते पैदा हुए सप्लाई शॉक और तेल की कीमतों में अस्थिरता के बीच तुरंत दरें बढ़ाना जल्दबाजी होगी. इससे अमेरिकी आर्थिक विकास को झटका लग सकता है.
भारत पर फेड रिजर्व के फैसले का असर
दरें न बढ़ाने के फेड रिजर्व के फैसले से भारतीय शेयर बाजार को स्थिरता मिलेगी. सेंसेक्स और निफ्टी में किसी बड़ी बिकवाली का खतरा टल गया. फेड के इस फैसले से भारत में भी लोगों को महंगे कर्ज से राहत मिली है क्योंकि जब फेड ब्याज दरें बढ़ाता है, तो भारतीय रिजर्व बैंक भी रुपये को संभालने और महंगाई को रोकने के लिए रेपो रेट को बढ़ा देता है. इससे भारत में होम लोन, कार लोन महंगे हो जाते हैं.
इस एक फैसले से रुपया भी बड़ी गिरावट से बच गया क्योंकि फेड के ब्याज दर बढ़ाने से निवेशक भारतीय शेयर बाजार से भारी मात्रा में डॉलर निकालकर अमेरिकी शेयर बाजार में लगाते हैं. इससे डॉलर तो मजबूत होता है, लेकिन रुपया कमजोर पड़ जाता है. ऐसे में दरों के स्थिर रहने से रुपये को संभालने में मदद मिली.
ये भी पढ़ें:
FD में 1.5% ज्यादा ब्याज से कमाएं 1.5 लाख रुपए, जानें सही कैल्कुलेशन
























