(Source: ECI/ABP News)
नियमित निवेश और धैर्य की ताकत; SIP कैसे बदल सकता है आपकी आर्थिक किस्मत, जानें स्मार्ट इन्वेस्टमेंट का तरीका
आज के समय में सिर्फ पैसे बचा लेना ही समझदारी नहीं मानी जाती, बल्कि उसे सही जगह और सही तरीके से निवेश करना ज्यादा जरूरी हो गया है. आइए जानते हैं, इस बारे में....

- एसआईपी में नियमित, छोटी बचत से लंबी अवधि में अच्छी रकम बनती है।
- निवेश को पांच हिस्सों में बांटना, 5 फिंगर फ्रेमवर्क, जोखिम कम करता है।
- बाजार के उतार-चढ़ाव में धैर्य रखकर टिके रहने से बेहतर रिटर्न मिलता है।
- 7 साल बाद कंपाउंडिंग का असर दिखता है, छोटे उतार-चढ़ाव बेअसर होते हैं।
SIP Investment Strategy: आज के समय में सिर्फ पैसे बचा लेना ही समझदारी नहीं मानी जाती, बल्कि उसे सही जगह और सही तरीके से निवेश करना ज्यादा जरूरी हो गया है. अगर निवेश बिना योजना के किया जाए, तो उसका पूरा फायदा नहीं मिल पाता. सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) में निवेश आज लोगों की पसंद बनती जा रही है.
एसआईपी के जरिए नियमित रूप से थोड़ी-थोड़ी बचत करके लंबे समय में अच्छी रकम तैयार की जा सकती है. वहीं अनुशासन, संतुलन और सही सोच के साथ आगे बढ़ने से यह निवेशकों को बेहतरीन रिटर्न देता है. जिससे भविष्य की आर्थिक स्थिति और मजबूत होती है. आइए जानते हैं, इस बारे में....
निवेश में संतुलन बनाना है जरूरी
निवेश करते समय इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि सारे पैसे एक की जगह पर नहीं लगाने चाहिए. निवेश को अलग-अलग हिस्सों में बांटने की सलाह दी जाती है. 5 फिंगर फ्रेमवर्क इसी सोच पर काम करता है. जिसमें अपनी बचत को पांच भागों में बांटकर निवेश किया जाता है.
इसमें भरोसेमंद और मजबूत विकल्प, कम कीमत पर मिलने वाले भविष्य के मौके, ग्रोथ और वैल्यू का संतुलन, मिड और स्मॉल लेवल के विकल्प और विदेशी बाजारों में निवेश शामिल होता है. इस तरह की रणनीति से नुकसान का खतरा कम होता है और बेहतर रिटर्न की संभावना बढ़ जाती है.
बाजार में टिके रहना है सफलता का मंत्र
ऐसा अक्सर देखा जाता है निवेशक एसआईपी में दिख रहे नुकसान से घबरा जाते हैं और इसे बेचने का फैसला उठा लेते हैं. हालांकि, अगर आप लंबे समय तक निवेश करने के लिए तैयार हैं तो, ऐसा हो सकता है कि आपको अपने निवेश पर बेहतर रिटर्न मिले. इसलिए ऐसी स्थिति में बाजार में टिके रहना ही सफलता का मंत्र है.
लंबे समय में मिलता है बेहतर नतीजा
निवेश के शुरुआती दौर में बाजार की हलचल कई बार निवेशकों को परेशान कर देती है. कभी तेजी तो कभी गिरावट देखकर धैर्य बनाए रखना आसान नहीं होता. लेकिन जब कोई निवेश करीब 7 साल तक लगातार जारी रहता है, तो उस पर कंपाउंडिंग का असर साफ नजर आने लगता है.
इस दौरान पैसा धीरे-धीरे बढ़कर खुद नई कमाई बनाने लगता है. यही वजह है कि लंबे समय तक निवेश में बने रहना जरूरी माना जाता है. क्योंकि समय के साथ छोटे उतार-चढ़ाव बेअसर हो जाते हैं और रिटर्न ज्यादा स्थिर होने लगता है.
डिस्क्लेमर: (यहां मुहैया जानकारी सिर्फ़ सूचना हेतु दी जा रही है. यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है. निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें. ABPLive.com की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है.)
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