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SIP शुरू करने से पहले जानिए कौन सी हैं बड़ी गलतफहमियां? निवेशकों के लिए जरूरी गाइड

भारतीय निवेशकों के बीच म्यूचुअल फंड में SIP बेहद लोकप्रिय बन गया है. लेकिन इसके बारे में कई गलत धारणाएं भी बाजार में घूमती रहती हैं. आइए जानते हैं, एसआईपी के कुछ गलतफहमियों के बारे में....

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  • SIP से तुरंत ऊंचा रिटर्न मिलना तय नहीं होता है।
  • अधिक फंड, बेहतर रिटर्न की गारंटी नहीं देता है।
  • SIP को आवश्यकतानुसार रोका या बंद किया जा सकता है।

SIP Investment Myths: भारतीय निवेशकों के बीच म्यूचुअल फंड में सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) बेहद लोकप्रिय बन गया है. लाखों लोग हर महीने छोटी रकम लगाकर लंबी अवधि में बड़ा फंड तैयार करने की कोशिश कर रहे हैं. यह तरीका आसान जरूर है, लेकिन इसके बारे में कई गलत धारणाएं भी बाजार में घूमती रहती हैं. 

कुछ लोग इसे गारंटीड रिटर्न मान लेते हैं तो कुछ समय से पहले ही बेहतरीन रिटर्न के सपने देखते हैं. ऐसे भ्रम कई बार निवेशकों को परेशानी में डाल देते हैं. जिससे लंबी अवधि के नतीजों पर असर भी पड़ता है. आइए जानते हैं, एसआईपी के कुछ गलतफहमियों के बारे में....

1. SIP से तुरंत ऊंचा रिटर्न मिलना तय नहीं
 
कई नए निवेशक यह सोच लेते हैं कि SIP शुरू करते ही हर साल स्थिर और ऊंचा रिटर्न मिलेगा. सोशल मीडिया पर भी इसे जल्दी अमीर बनने का आसान तरीका बताकर पेश किया जाता है, जबकि सच इससे अलग है. SIP कोई शॉर्टकट नहीं, बल्कि लंबी अवधि में इसमें बेहतर रिटर्न मिलने की उम्मीद है.

इसमें फायदा समय और नियमित निवेश से मिलता है. अगर फंड का प्रदर्शन कमजोर है तो SIP भी चमत्कार नहीं कर सकता. आमतौर पर ठोस ग्रोथ 7, 10 या 15 साल जैसे लंबे समय में ही नजर आता है.

2. अधिक फंड, बेहतर रिटर्न की गारंटी नहीं है

एसआईपी निवेशको के बीच अक्सर यह भ्रम रहता है कि जितने अधिक फंड पोर्टफोलियो में जोड़ दिए जाएं तो उतना रिटर्न भी बढ़ जाएगा. इसी सोच के कारण कई लोग बिना गहराई से समझे 8–10 अलग-अलग फंड्स में SIP शुरू कर देते हैं.

लेकिन यह तरीका हमेशा फायदेमंद नहीं होता. बहुत सारे फंड रखने से पोर्टफोलियो संभालना मुश्किल हो जाता है. समझदारी इसी में है कि 3 से 5 मजबूत फंड चुने जाएं. जिसके लिए विशेषज्ञों की सहायता भी ली जा सकती है. अपने लक्ष्य के अनुसार एसआईपी निवेश में संतुलन बनाना चाहिए.

3. SIP बंद करना होता है गलत

अक्सर ही यह मिथ्य लोगों के बीच होता है कि SIP को कभी रोकना या बंद करना नहीं चाहिए. हालांकि, यह सही सोच नहीं है. हालात बदलते रहते हैं, आय में उतार-चढ़ाव आ सकता है. आपात स्थिति आ सकती है या फिर आपका वित्तीय लक्ष्य भी बदल सकता हैं.

SIP कोई कानूनी बंधन नहीं है. अपनी जरूरत के अनुसार इसे रोका या बंद किया जा सकता है. अगर कोई फंड लगातार कमजोर प्रदर्शन कर रहा हो, तो बेहतर फंड में स्विच करना समझदारी हो सकती है.

डिस्क्लेमर: (यहां मुहैया जानकारी सिर्फ़ सूचना हेतु दी जा रही है. यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है. निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें. ABPLive.com की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है.)

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