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Silver ETF है Gold ETF की तरह निवेश का आकर्षक विकल्प, जानें इसके बारे में 

Silver ETF: अब निवेशकों के पास सोने के साथ चांदी के एक्सचेंज ट्रेडेड फंड में भी निवेश करने का मौका है और इसके लिए सिल्वर ETF का ऑप्शन उनके पास है.

Silver ETF: सोने (Gold) और चांदी (Silver) का इस्तेमाल आभूषणों (Jewellery) के अलावा निवेश (Investment) के लिए भी किया जाता है. पारंपरिक तौर पर भारत में लोग लम्बे समय से सोने और चांदी में निवेश करते आये हैं. वजह यह है कि एक तो लोग सोन- चांदी में निवेश को सुरक्षित मानते हैं और दूसरा क्योंकि इनके दाम सीधे  तौर पर महंगाई (Inflation) से जुड़े होते हैं. महंगाई बढ़ने के साथ-साथ सोने-चांदी के दामों में भी बढ़ोतरी देखी जा सकती है जिसका फायदा निवेशकों को मिलता है. 

पिछले कुछ सालों में सोने में निवेश के कई विकल्प खुल गए जैसे कि सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड स्कीम, गोल्ड ईटीएफ और गोल्ड म्युचअल फंड इत्यादि किन्तु चांदी में निवेश के लिए अब तक सीमित विकल्प मौजूद थे जैसे कि चांदी के गहने और सिक्के लेकिन सेबी द्वारा हरी झंडी मिलने के बाद अब सिल्वर ईटीएफ और फंड और फंड का विकल्प भी खुल गया है.  

चांदी में निवेश के फायदे
ऑप्टिमा मनी मैनेजर्स के CFP पंकज मठपाल का कहना है कि सिल्वर यानि चांदी का इस्तेमाल आभूषणों के अलावा औद्योगिक क्षेत्र जैसे की सोलर पैनल, मेडिकल इंस्ट्रूमेंट, रिन्यूएबल एनर्जी, स्विचेस, और सैटेलाइट इत्यादि  में भी होता है इसलिए चांदी की मांग भविष्य में और भी बढ़ने की सम्भवना है जिससे निवेशकों को मुनाफा हो सकता है. चांदी विद्युत की सुचालक है. हालांकि यह तांबे की तुलना में महंगी है किन्तु विशेष औद्योगिक विद्युत उत्पादों में जहां लागत के हिसाब से सम्भव हो सके चांदी का इस्तेमाल होता है. 

शेयर बाजार और सिल्वर का आपस में विपरीत संबंध
सिल्वर का इक्विटी के साथ को-रिलेशन यानि कि पारस्परिक सम्बन्ध अच्छा नहीं है यानि की यदि कभी शेयर बाजार में मंदी आती है तो उस वक्त सिल्वर में तेजी देखी जा सकती है. इसलिए डायवर्सिफिकेशन के हिसाब से भी इन्वेस्टमेंट पोर्टफोलियो में सिल्वर का होना सही साबित हो सकता है. यदि दो असेट के बीच गहरा पारस्परिक सम्बन्ध हो तो एक समय पर दोनों में एक साथ तेजी या गिरावट देखी जा सकती है लेकिन शेयर बाजार और चांदी के बीच ऐसा जरूरी नहीं है. 

चांदी में निवेश करने से पोर्टफोलियो डायवर्सिफिकेशन का फायदा
अनिश्चितता के माहौल में चांदी की मांग और भी बढ़ जाती है क्योंकि चांदी को ऐसी स्थिति में एक सुरक्षित निवेश के रूप में देखा जाता है. साल 2008- 2009 की वैश्विक मंदी के दौरान 1 जनवरी 2008 से 27 फरवरी 2009 के बीच जहां निफ्टी-50 टोटल रिटर्न इंडेक्स ने 54.43 प्रतिशत का घाटा दर्ज किया था वहीं सिल्वर ने 13.08 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की थी. कहने का मतलब यह है कि बाकी चीजों के साथ सिल्वर में निवेश होने से पोर्टफोलियो डायवर्सिफिकेशन का फायदा मिलता है.  

ऐतिहासिक तौर पर देखा गया है कि जब-जब महंगाई बढ़ती है तब तब चांदी के दाम बढ़ते हैं और ऐसे में चांदी निवेश का एक आकर्षक विकल्प बन जाती है.  पिछले लगभग एक दशक में चांदी की उद्योग जगत में काफी मांग बड़ी है. हालंकि पिछले प्रदर्शन से इस बात की गारंटी नहीं मिलती कि भविष्य में भी वैसा ही प्रदशन देखने को मिलेगा किन्तु यह जानकर अच्छा लगता है कि चांदी ने पिछले तीन  साल में लगभग 74 प्रतिशत का शुद्ध मुनाफा दर्ज किया है.

निवेश के विकल्प
निवेशकों के पास अब ईटीएफ फंड ऑफ फंड की सुविधा है. सिल्वर ईटीएफ निवेशकों के पैसों को सिल्वर यानि कि चांदी में निवेश करते हैं और सिल्वर ईटीएफ फंड ऑफ फंड सिल्वर ईटीएफ में. तो सिल्वर फंड ऑफ फंड और सिल्वर ईटीएफ दोनों का ही निवेश आखिर में चांदी में ही होता है. ईटीएफ में निवेश  के लिए डीमैट अकाउंट की आवश्यकता होती है किन्तु फंड ऑफ फंड में डीमैट अकाउंट के बिना भी निवेश किया जा सकता है. सिल्वर ईटीएफ और फंड ऑफ फंड का उद्देश्य यह है कि इसमें निवेश करने पर निवेशकों को घरेलू बाजार में शुद्ध चांदी में निवेश पर मिलने वाले मुनाफे के सामान मुनाफा मिल सके. जरूरत पड़ने पर इन्हे आसानी से बेचा जा सकता है और इनके रख-रखाव की लागत भी कम होती है. निवेशक सिल्वर ईटीएफ फंड ऑफ फंड में एसआईपी के जरिये भी निवेश कर सकते हैं.

क्या है टैक्स बेनिफिट
पंकज मठपाल का कहना है कि हालांकि सिल्वर ईटीएफ में निवेश करने पर सीधे तौर पर इनकम टैक्स में छूट नहीं मिलती किन्तु यदि तीन साल से अधिक समय तक इसमें निवेशित रहने के बाद इसे बेचा जाये तो इस पर जो लाभ होगा उस पर इंडेक्सेशन का फायदा मिलता है जिससे मुनाफे पर लगने वाला टैक्स कम हो सकता है.

देश में पहला सिल्वर ETF
मार्किट रेगुलेटर सेबी से अनुमति मिलने के बाद देश में पहली बार सिल्वर ईटीएफ लॉन्च किया जा चुका है और साथ ही एक फंड ऑफ फंड भी लांच होने जा रहा है. निवेशक न्यूनतम 100 रुपये से निवेश शुरू कर सकते है. ये दोनों ही ओपन एंडेड स्कीम हैं यानि कि एनएफओ बंद होने के बाद भी बाजार भाव पर इनमें निवेश किया जा सकेगा. आने वाले समय में और भी म्यूचुअल फंड कंपनियां सिल्वर ईटीएफ लेकर आ सकती हैं.

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डिस्क्लेमर: (यहां मुहैया जानकारी सिर्फ़ सूचना हेतु दी जा रही है. यहां बताना ज़रूरी है की मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है. निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें. ABPLive.com की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है.)

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