एक सफाई और रिलायंस के शेयर में जून 2024 के बाद सबसे बड़ी गिरावट, कंपनी को 1 लाख करोड़ का नुकसान
रिलायंस इंडस्ट्रीज ने मंगलवार को कहा कि उसे करीब तीन सप्ताह से रूस से कोई कच्चा तेल नहीं मिला है, और जनवरी में भी इसकी आपूर्ति की कोई संभावना नहीं है.

Reliance Share Tumbles: रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) के शेयरों में मंगलवार को पिछले सात महीनों की सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई. शेयर 4.5 प्रतिशत टूटकर 1,507.60 रुपये पर बंद हुआ, जो 4 जून 2004 के बाद का सबसे निचला स्तर है. कारोबार के दौरान बिकवाली के दबाव में यह 5.1 प्रतिशत तक गिरकर 1,496.30 रुपये तक पहुंच गया. इसकी वजह से कंपनी के मार्केट वैल्यूएशन में करीब एक लाख करोड़ रुपये की कमी आ गई है.
इस गिरावट के पीछे कई वजहें मानी जा रही हैं, जिनमें भू-राजनीतिक तनाव, वैश्विक व्यापार अनिश्चितता और मुनाफावसूली प्रमुख हैं. शेयरों में यह कमजोरी ऐसे समय आई जब कंपनी ने स्पष्ट किया कि उसने पिछले तीन महीनों से रूस से कच्चे तेल की कोई खरीदारी नहीं की है और जनवरी में भी किसी डिलीवरी की उम्मीद नहीं है.
रूस-भारत ऊर्जा संबंधों पर बढ़ा दबाव
रिलायंस की यह सफाई ऐसे वक्त आई है जब भारत और रूस के ऊर्जा संबंधों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सवाल उठ रहे हैं. इसी बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी कि यदि भारत रूसी तेल की खरीदारी बंद नहीं करता है तो भारत पर टैरिफ और बढ़ाए जा सकते हैं. ट्रंप की इस टिप्पणी ने भू-राजनीतिक तनाव और व्यापार संबंधों को लेकर निवेशकों की चिंता बढ़ा दी, जिसका असर सीधे शेयर बाजार पर दिखा.
रिलायंस की आधिकारिक सफाई
रिलायंस इंडस्ट्रीज ने मंगलवार को कहा कि उसे करीब तीन सप्ताह से रूस से कोई कच्चा तेल नहीं मिला है, और जनवरी में भी इसकी आपूर्ति की कोई संभावना नहीं है. कंपनी ने इससे पहले 20 नवंबर 2025 को बताया था कि उसने यूरोपीय संघ के प्रतिबंधों का पालन करने के लिए गुजरात के जामनगर स्थित अपनी निर्यात-विशेष (SEZ) रिफाइनरी में रूसी कच्चे तेल का प्रसंस्करण बंद कर दिया है.
गौरतलब है कि रिलायंस पहले भारत में रूसी तेल की सबसे बड़ी खरीदार थी. कंपनी जामनगर के विशाल रिफाइनिंग कॉम्प्लेक्स में कच्चे तेल को प्रोसेस कर पेट्रोल और डीजल जैसे उत्पाद बनाती थी. इस परिसर में दो रिफाइनरियां हैं—
- एक SEZ इकाई, जहां से ईंधन का निर्यात यूरोपीय संघ, अमेरिका और अन्य बाजारों में किया जाता है
- दूसरी घरेलू बाजार की जरूरतों को पूरा करने वाली पुरानी इकाई
यूरोपीय संघ रिलायंस के लिए एक बड़ा बाजार है और उसने रूस के ऊर्जा राजस्व को निशाना बनाते हुए रूसी कच्चे तेल से बने ईंधन के आयात और बिक्री पर कड़े प्रतिबंध लगाए हैं. इन्हीं शर्तों के तहत रिलायंस ने अपनी निर्यात-आधारित रिफाइनरी में रूसी तेल का उपयोग बंद किया है. हालांकि शेयर में भारी गिरावट देखी गई है, लेकिन अधिकांश बाजार विशेषज्ञ रिलायंस को लेकर अब भी सकारात्मक रुख रखते हैं. ज्यादातर ब्रोकरेज फर्मों ने स्टॉक पर ‘बाय’ रेटिंग बरकरार रखते हुए 1,685 रुपये का टारगेट प्राइस तय किया है.
डिस्क्लेमर: (यहां मुहैया जानकारी सिर्फ़ सूचना हेतु दी जा रही है. यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है. निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें. ABPLive.com की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है.)
टॉप हेडलाइंस
Source: IOCL






















