अमेरिकी डॉलर की मजबूती के सामने नहीं टिक पा रहा भारतीय रुपया, फिर हुआ धराशायी
Indian Currency: फेडरल रिजर्व ने अपनी एफओएमसी बैठक में ब्याज दरों में 0.25 प्रतिशत की कटौती तो की, लेकिन चेयरमैन जेरोम पावेल की टिप्पणियों ने बाजार की उम्मीदों को झटका दिया.

Dollar vs Rupee: भारतीय रुपया गुरुवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 48 पैसे गिरकर 88.70 (अस्थायी) पर बंद हुआ. रुपया की यह कमजोरी मुख्य रूप से मजबूत अमेरिकी डॉलर, कमजोर घरेलू शेयर बाजारों और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के आक्रामक रुख के कारण देखी गई. फेडरल रिजर्व ने अपनी एफओएमसी बैठक में ब्याज दरों में 0.25 प्रतिशत की कटौती तो की, लेकिन चेयरमैन जेरोम पावेल की टिप्पणियों ने बाजार की उम्मीदों को झटका दिया.
क्यों कमजोर हो रहा रुपया?
उन्होंने स्पष्ट कहा कि दिसंबर में दरों में कटौती की कोई गारंटी नहीं है क्योंकि मुद्रास्फीति अब भी लक्ष्य से ऊपर है और श्रम बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है. इस बयान के बाद अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और डॉलर में मजबूती देखने को मिली.
घरेलू स्तर पर, तेल विपणन कंपनियों की डॉलर मांग और विदेशी पूंजी की निकासी ने रुपये पर अतिरिक्त दबाव बनाया. अंतरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया 88.37 पर खुला और कारोबार के दौरान 88.74 के निचले स्तर तक पहुंचा.
रुपये में अभी रह सकता है दबाव
वहीं, बुधवार को रुपया डॉलर के मुकाबले 88.22 पर बंद हुआ था. विश्लेषकों का कहना है कि आने वाले दिनों में भी रुपये पर दबाव बना रह सकता है. मिराए एसेट शेयरखान के अनुज चौधरी के अनुसार, मजबूत डॉलर, कमजोर घरेलू बाजार और फेड की सख्त नीति रुपये को निचले स्तर की ओर धकेल सकती है.
इस बीच, डॉलर इंडेक्स 0.09 प्रतिशत की मामूली गिरावट के साथ 99.12 पर रहा, जबकि ब्रेंट क्रूड ऑयल 0.65 प्रतिशत गिरकर 64.50 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया. घरेलू शेयर बाजारों में भी भारी गिरावट दर्ज की गई, जहां सेंसेक्स 592 अंक टूटकर 84,404 पर और निफ्टी 176 अंक गिरकर 25,878 पर बंद हुआ. विदेशी संस्थागत निवेशकों ने बुधवार को 2,540 करोड़ रुपये के शेयरों की बिकवाली की, जिससे बाजार और रुपये दोनों पर दबाव बढ़ा.
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