Sugar Import: महंगी चीनी पर बड़़ी खबर, सरकार का ये फैसला लगाएगा कीमतों पर लगाम
Sugar Import Duty: चीनी की बढ़ती हुई कीमतों को देखते हुए सरकार ने एक फैसला किया है. जिसके तहत अब चीनी के आयात पर लगाया जाने वाला शुल्क कम किया जाएगा.

Sugar Import Duty: त्यौहारी सीजन आते ही चीनी की कीमतों में लगातार इजाफा देखा जा रहा है. इस बार तो कीमतें इस तरह आसमान छू रही हैं, जैसा कि कभी भी नहीं देखा गया है. ऐसे में सरकार भी लगातार इस जुगत में लगी हुई है कि कैसे त्यौहारों को फीका होने से बचाया जाए. इसके लिए अब सरकार ने एक तरीका भी खोज लिया है. जिसके तहत अब शुगर की इम्पोर्ट ड्यूटी में बदलाव किया जाएगा.
क्या है सरकार का मास्टर प्लान?
दरअसल मंगलवार को ब्लूमबर्ग ने अपनी एक रिपोर्ट में बताया कि भारत चीनी पर लगने वाली 100 प्रतिशत इम्पोर्ट ड्यूटी को कम करने या खत्म करने के बारे में सोच रहा है. क्योंकि देश में चीनी की कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई हैं. त्यौहारी सीजन को देखते हुए ये कदम उठाया जा रहा है. क्योंकि इस सीजन में सबसे ज्यादा मिठाईयां बनती हैं, ऐसे में चीनी की खपत भी ज्यादा लगती है.
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आपूर्ति बढ़ाने के लिए उठाया कदम
सरकार ने ये कदम स्थानीय आपूर्ति बढ़ाने के उद्देश्य से उठाया गया है. इस रिपोर्ट के मुताबिक, अधिकारी विभिन्न प्रस्तावों पर विचार कर रहे हैं, लेकिन अभी तक कोई फाइनल डिसीजन नहीं लिया गया है. इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (आईएसएमए) के अनुसार, महाराष्ट्र में हाल ही में मिल से प्राप्त चीनी की कीमतें लगभग 46 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गईं, जो अब तक का उच्चतम स्तर है.
सप्लाई को लेकर है चिंता
दुनियाभर में चीनी की सप्लाई को लेकर काफी चिंता का माहौल है, इसी बीच इम्पोर्ट ड्यूटी में कटौती की जा रही है. अल नीनो की वजह से फसल को लेकर काफी चिंता बढ़ी हुई है और इसने न्यूयॉर्क में चीनी की भविष्य को लेकर चिंता खड़ी कर दी है. ऐसे में भारत को भी इस मौसम संबंधित चिंताओं का सामना करना पड़ रहा है. भारतीय मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक मानसून की बारिश, जिस पर गन्ने की फसल निर्भर करती है वो सामान्य से 13 प्रतिशत कम रही है.
इससे पहले यानी बारिश के मौसम से पहले जून के आखिर में ये कमी 40 प्रतिशत से ज्यादा थी. जिससे कुछ फसलों की बुवाई में देरी हुई. कृषि मंत्रालय के अनुसार, 14 अगस्त तक 58.3 लाख हेक्टेयर जमीन पर गन्ने की बुवाई हो चुकी थी, जो पिछले साल इसी समय के स्तर से थोड़ा कम है.
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