अंतरिक्ष मिशन से कितना कमा पाएंगे भारतीय एस्ट्रोनॉट शुभांशु शुक्ला? जानिए लीजिए जवाब
Axiom-4 Mission: रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत एक्जियोम-4 मिशन के लिए 548 करोड़ रुपये खर्च किया है. इसमें ट्रेनिंग, लॉजिस्टिक्स , ट्रैवल और शुक्ला की तरफ की जाने वाली रिसर्च पर खर्च भी शामिल है.

Shubhanshu Shukla Axiom-4 Mission: एक्सिओम-4 मिशन के लिए भारत की ओर से अंतरिक्ष यात्रा करने जाने वाले इंडियन एयर फोर्स के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला तीन अन्य के साथ स्पेस में जा रहे हैं. वे ऐसे दूसरे भारतीय हैं जो इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पहुंचकर इतिहास रचने जा रहे हैं. अमेरिका के फ्लोरिडा स्थित नासा के कैनेडी अंतरिक्ष सेंटर के लॉन्च कॉम्प्लैक्स 39ए से एक्सिओम मिशन-4 को लॉन्च किया गया. स्पेसएक्स का फाल्कन 9 रॉकेट सफलतापूर्वक भेजा गया.
41 साल के लंबे अंतराल पर गए एयरफोर्स के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला उस अमेरिकी वाणिज्यिक उड़ान का हिस्सा है, जिसे अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन भेजा गया है. वे एक सौ चालीस करोड़ भारतीय की उम्मीदों को लेकर धरती से रवाना हुए हैं. लेकिन कई लोगों की धारणाओं के विपरीत अंतरिक्ष में 14 दिनों तक रहने के लिए शुभांशु शुक्ला को कुछ भी वेतन के तौर पर भुगतान नहीं किया जाएगा.
शुभांशु शुक्ला को नहीं मिलेगा वेतन
ऐसा इसलिए क्योंकि एक्जियोम-4 मिशन ISRO और NASA का संयुक्त अभियान है. इसमें भारत पूरी तरह से इस अभियान की फंडिंग कर रहा है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत एक्जियोम-4 मिशन के लिए 548 करोड़ रुपये खर्च कर रहा है. इसमें ट्रेनिंग, लॉजिस्टिक्स , ट्रैवल और शुक्ला की तरफ से की जाने वाली रिसर्च पर खर्च भी शामिल है. 2027 के भारत के गगनयान मिशन के लिए इस मिशन में शुभांशु की मौजूदगी को मील के पत्थर के तौर पर देखा जा रहा है.
भले ही शुभांशु शुक्ला के अंतरिक्ष में जाने पर उन्हें इसके लिए अलग से किसी तरह का कोई भुगतान नहीं किया जा रहा है, लेकिन भारत के अंतरिक्ष भविष्य के लिए ये बहुत बड़ा निवेश है. इससे देश की उन्नत अंतरिक्ष प्रशिक्षण और अंतरराष्ट्रीय सहयोग समेत अंतरिक्ष अनुसंधान तक सीधी पहुंच हो जाएगी. राकेश शर्मा के 1984 में अंतरिक्ष मिशन पर जाने के बाद वे ऐसे दूसरे भारतीय हैं, जिन्हें इस मिशन पर भेजा गया है.
भारत के लिए महत्वपूर्ण मिशन
गौरतलब है कि एक्जियोम-4 मिशन के लिए बुधवार की दोपहर 12 बजकर 1 मिनट पर तीन अन्य अंतरिक्ष यात्रियों के साथ शुभांशु शुक्ला रवाना हो चुके हैं. भारत के लिए इस मिशन का काफी अहमियत है. इस दौरान शुभांशु शुक्ला माइक्रोग्रैविटी में जैविक प्रक्रिया की स्टडी और अंतरिक्ष में फसलों की खेती सेमत कई वैज्ञानिक प्रयोग करेंगे.
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