संकट के बीच भारत को एक और झटका! गोल्डमैन सैक्स का अनुमान- GDP में 50 bps की आएगी गिरावट
India Growth Forecast: गोल्डमैन सैक्स ने 2026 के लिए महंगाई दर को लेकर अपने अनुमान को 3.9 परसेंट से बढ़ाकर 4.6 परसेंट कर दिया है. यानी कि आम आदमी पर महंगाई का खतरा मंडरा रहा है.

India Growth Forecast: गोल्डमैन सैक्स (Goldman Sachs) ने कारोबारी साल 2025-26 के लिए भारत की जीडीपी (GDP) ग्रोथ के अनुमान को घटाकर 5.9 परसेंट कर दिया है. इससे पहले उन्होंने 7 परसेंट का अनुमान लगाया था. यह गिरावट मुख्य रूप से वैश्विक तनाव और तेल की बढ़ती कीमतों के चलते आई है.
गोल्डमैन ने रिपोर्ट में क्या कहा?
गोल्डमैन ने मंगलवार को एक रिपोर्ट में कहा कि उन्हें उम्मीद है कि साल 2026 में भारतीय अर्थव्यवस्था 5.9 परसेंट की दर से बढ़ेगी, जबकि ईरान में जंग शुरू होने से पहले उनका अनुमान 7 परसेंट था. वॉल स्ट्रीट के इस बैंक ने बीते 13 मार्च को भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए अपने विकास के अनुमान को घटाकर 6.5 परसेंट कर दिया था.
गोल्डमैन के विश्लेषकों द्वारा विकास के अनुमान में यह ताजा कटौती तेल की कीमतों और आपूर्ति में रुकावट की अवधि के बारे में उनकी मान्यताओं में बदलाव के बाद की गई है. कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, शुद्ध ऊर्जा आयातक भारत के लिए विदेशी मुद्रा, मुद्रास्फीति और राजकोषीय जोखिम का एक प्रमुख कारण हैं.
ग्रोथ अनुमान घटाने के कारण
- ईरान-इजरायल और अमेरिका में तनाव के चलते वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता का माहौल है. गोल्डमैन को अब उम्मीद है कि होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते होने वाली सप्लाई में लगभग पूरी तरह से आई रुकावट अप्रैल के मध्य तक जारी रहेगी और उसके बाद अगले 30 दिनों में स्थिति सामान्य हो जाएगी. इस दौरान ब्रेंट क्रूड की औसत कीमत मार्च में 105 डॉलर और अप्रैल में 115 डॉलर रहेगी. इसके बाद साल की चौथी तिमाही में यह गिरकर 80 डॉलर प्रति बैरल हो जाएगी.
- बैंक के विश्लेषकों को अब उम्मीद है कि भारत में मुद्रास्फीति 2026 में बढ़कर 4.6 परसेंट हो जाएगी, जबकि पहले उनका अनुमान 3.9 परसेंट था. हालांकि यह अभी भी भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की टॉलरेंस लिमिट (स्वीकार्य सीमा) के भीतर ही रहेगी. फिर भी गोल्डमैन को उम्मीद है कि भारतीय मुद्रा में हो रही गिरावट के दबाव का मुकाबला करने के लिए पॉलिसी रेपो दर में 50 बेसिस पॉइंट्स की बढ़ोतरी की जाएगी.
- रुपये में गिरावट भी गोल्डमैन के लगाए गए अनुमान की एक बड़ी वजह है. पिछले साल 4.7 परसेंट कमजोर होने के बाद 2026 में अब तक रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 4 परसेंट तक गिर चुका है. रुपया अभी अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर (93-95 रुपये के आसपास) पर है. इससे आयात अभी महंगा बना हुआ है. गोल्डमैन ने कहा कि चूंकि मुद्रा पर गिरावट का दबाव बना हुआ है इसलिए खुदरा कीमतों पर विदेशी मुद्रा विनिमय दर में बदलाव का असर (FX pass-through) काफी अधिक होने की संभावना है. बैंक ने अपनी रिपोर्ट में आगे कहा कि 2026 में भारत का चालू खाता घाटा बढ़कर GDP का 2 परसेंट तक पहुंच सकता है. अक्टूबर-दिसंबर 2025 की अवधि में भारत का चालू खाता घाटा GDP का 1.3 परसेंट रहा था.
आम आदमी पर असर
गोल्डमैन के महंगाई को लेकर लगाए गए 4.6 परसेंट के अनुमान से यह साफ है कि आने वाले समय में महंगाई बढ़ सकती है, जिसका आम आदमी की जेब पर असर पड़ेगा. इधर, कच्चे तेल की कीमत बढ़ेगी तो ऑटोमोबाइल से लेकर लॉजिस्टिक्स तमाम कंपनियों के मुनाफे पर असर पड़ेगा. इसकी भरपाई कंपनियां चीजों की कीमतें बढ़ाकर करेंगी. ऊपर से पहले अनुमान लगाया जा रहा था कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) अगली मौद्रिक नीति की बैठक में रेपो रेट में कटौती करेगा, लेकिन अब इसमें 0.50 परसेंट की बढ़ोतरी का अनुमान लगाया जा रहा है.
ये भी पढ़ें:
रिकॉर्ड लो के बाद संभला रुपया, डॉलर के मुकाबले मजबूती दिखाते हुए खुला; जानें क्या है इसकी वजह
Source: IOCL



























