दूध, पनीर, मक्खन और मावा, मिलावट पर सख्त नियम बना रहा FSSAI
FSSAI खाद्य उत्पादों की लेबलिंग पर सख्ती की तैयारी कर रहा है. खासकर डेयरी जैसे उत्पादों पर निगरानी बढ़ेगी, जिनमें दूध की जगह वनस्पति तेल या स्टार्च इस्तेमाल होता है.

अगर आप भी बाजार से पनीर, दूध, मक्खन या मावा खरीदते हैं, तो यह जानकारी आपके लिए अहम है. भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने एक डेयरी उत्पादों की पहचान और लेबलिंग को लेकर नए नियमों का मसौदा पेश किया है. इसका मकसद ग्राहकों को यह साफ तौर पर बताना है कि वह जो उत्पाद खर्द रहे हैं, उसमें असल में कौन-कौन सी सामग्री इस्तेमाल हुई है.
दरअसल, बाजार में कुछ ऐसे उत्पाद भी बिक्री की जाती हैं जो दिखने और इस्तेमाल में बिल्कुल डेयरी प्रोडक्ट जैसे लगते हैं, लेकिन उन्हें बनाने में दूध से मिलने वाली सामग्री के बजाय वनस्पति तेल, स्टार्च या दूसरी गैर-डेयरी चीजों का इस्तेमाल किया जाता है. प्रस्तावित नियमों के तहत खासतौर पर ऐसे उत्पादों को 'पनीर' जैसे डेयरी नाम से बेचने या मार्केटिंग करने पर रोक लगाई जा सकती है.
'पनीर' नाम से नहीं बिक सकेंगे एनालॉग उत्पाद?
- FSSAI ने एनालॉग पनीर की बिक्री और लेबलिंग को लेकर सख्त नियमों का प्रस्ताव रखा है.
- दूध से प्राप्त सामग्री के बजाय गैर-डेयरी सामग्री से बने उत्पादों की पहचान उनके असल नाम से बतानी होगी.
- ऐसे उत्पादों के नाम, लेबल, पैकेजिंग और मार्केटिंग में 'पनीर' शब्द के इस्तेमाल पर रोक लगाई जा सकती है.
- वनस्पति तेल, स्टार्च या दूसरी वैकल्पिक सामग्री से बने उत्पादों को असली डेयरी पनीर से अलग तरीके से पेश करना होगा.
क्यों लाया जा रहा है यह प्रस्ताव?
इस बदलाव का खास मकसद खरीदारी के समय ग्राहकों के बीच होने वाले उलझन को कम करना है. कई बार कुछ उत्पाद देखने में पनीर जैसा होता है, लेकिन उसमें दूध से प्राप्त सामग्री की जगह दूसरी चीजों का इस्तेमाल किया गया होता है. ऐसे में नए नियम लागू होने पर लेबल पर उत्पाद की असल पहचान ज्यादा साफ तरीके से बतानी होगी.
पहले से बिक रहे उत्पाद भी आ सकते हैं दायरे में
प्रस्तावित नियमों का असर सिर्फ नए उत्पादों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि पहले से लाइसेंस या रजिस्ट्रेशन वाले कुछ उत्पाद भी इसके दायरे में आ सकते हैं. ऐसी स्थिति में कंपनियों को अपने उत्पादों की पैकेजिंग, लेबलिंग और मार्केटिंग में बदलाव करना पड़ सकता है.
कितने दिनों में मांगे गए सुझाव?
FSSAI ने इस मसौदे पर हितधारकों, खाद्य उद्योग और आम लोगों से सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं. हालांकि, इसके लिए 60 दिनों का समय दिया गया है. इसके बाद मिले हुए सुझावों पर विचार करने के बाद अंतिम नियम जारी किए जा सकते हैं.
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