अगर 40 की उम्र है तो हो जाएं सावधान! बेरोजगारी का सबसे बड़ा खतरा आप पर है, किसने दी चेतावनी?
Shantanu Deshpande: बॉम्बे शेविंग कंपनी के सीईओ शांतनु देशपांडे ने कहा कि 40 साल की उम्र पार कर चुके लोगों पर नौकरी जाने का खतरा सबसे ज्यादा है. उन्होंने इसके लिए कई कारण गिनाए हैं.

Corporate Cost Cutting: बॉम्बे शेविंग कंपनी के सीईओ शांतनु देशपांडे ने कहा कि बड़े पैमाने पर छंटनी के दौरान 40 साल की आयु के कर्मचारी अधिक प्रभावित होते हैं, क्योंकि वे आमतौर पर सबसे अधिक सैलरी अर्जित करते हैं. देशपांडे के मुताबिक, कॉर्पोरेट जगत में यह एक बढ़ती हुई चिंता है.
उन्होंने हाल ही में सोशल मीडिया पर कहा, "जब बड़े पैमाने पर छंटनी होने वाली होती है तो 40 की उम्र वाले लोग सबसे ज्यादा असुरक्षित होते हैं, क्योंकि उन्हें सबसे ज्यादा सैलरी मिलती है." उन्होंने आगे कहा कि यह ट्रेंड केवल भारत या फिर किसी एक देश में नहीं है, बल्कि यह ट्रेंड वैश्विक स्तर पर बढ़ रहा है. इसकी वजह आर्थिक अस्थिरता और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस्तेमाल में वृद्धि होना है. देशपांडे ने आगे कहा, "कंपनियां अब लागत कम करने और ऑपरेशंस को सुव्यवस्थित करने पर अधिक ध्यान केंद्रित कर रही हैं, जिसके कारण कई दौर की छंटनी हुई है."
नौकरी खोना भावनात्मक और वित्तीय झटका- देशपांडे
देशपांडे ने यह भी बताया कि जीवन के इस चरण में नौकरी खोना भावनात्मक और वित्तीय झटका हो सकता है. देशपांडे ने आगे कहा, "40 की उम्र पार कर चुके लोगों को अकसर एक साथ कई जिम्मेदारियां संभालनी पड़ती हैं. उनके बच्चे कॉलेज में हो सकते हैं, जिसके लिए उन्हें काफी वित्तीय सहायता की जरूरत होती है और उनके माता-पिता 70 या 80 की उम्र पार कर चुके होते हैं, जिन्हें डॉक्टरी देखभाल और देखभाल की जरूरत होती है."
'40 की उम्र में होती हैं सबसे ज्यादा जिम्मेदारियां'
उन्होंने आगे कहा, "40 की उम्र में नौकरी छूटना आर्थिक और भावनात्मक रूप से बहुत बड़ा संकट है. इस उम्र में आपके ऊपर सबसे ज्यादा जिम्मेदारियां होती हैं जिसमें ईएमआई, बच्चों की पढ़ाई और बूढ़े माता-पिता की देखभाल शामिल हैं." देशपांडे ने कहा, "यह जिम्मेदारियां किसी भी व्यक्ति की सेविंग्स को जल्दी से खत्म कर सकती हैं."
उन्होंने आगे कहा कि यह वह समय है जब लोग उच्च प्रबंधन तक पहुंचने और अपने सुनहरे सैलरी के सालों में प्रवेश करने की उम्मीद करते हैं. इसलिए, 40 की उम्र में नौकरी खोना आर्थिक और भावनात्मक दोनों रूप से बहुत बड़ी अस्थिरता पैदा कर सकता है. उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाएं प्रभावित कर्मचारियों के लिए ‘भावनात्मक और वित्तीय आपदा’ में बदल सकती हैं.
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Source: IOCL






















