Blinkit से लेकर Zepto तक, आपको 10 मिनट में डिलीवरी करने वालों की खुल रही पोल
क्विक कॉमर्स कंपनियों लगातार घेरे में आ रही हैं. साफ- सफाई से लेकर सुरक्षा तक पर सवाल उठाए जा रहे हैं. धीरे- धीरे 10 मिनट में डिलीवरी करने वालों की पोल खुल रही है.

सुबह दूध चाहिए, अचानक मेहमान आ गए तो स्नैक्स चाहिए या घर में कोई जरूरी सामान खत्म हो गया ऐसे समय में ब्लिंकिट, जेप्टो और स्विगी इंस्टामार्ट और दूसरे क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म लोगों के लिए सुपरमैन का काम करते हैं. कुछ साल पहले जहां सामान पहुंचने में घंटों या अगले दिन तक का इंतजार करना पड़ता था, वहीं अब कुछ ही मिनट में सामान मिल जाता है.
लेकिन इस तेजी के पीछे की पूरी तस्वीर अब सामने आने लगी है. डिलीवरी पार्टनर्स की सुरक्षा से लेकर डार्क स्टोर में रखे सामान की हाइजीन तक, क्विक कॉमर्स कंपनियों पर लगातार सवाल उठ रहे हैं. खासकर हाल के दिनों में ब्लिंकिट और जेप्टो के वेयरहाउस पर हुई कार्रवाई ने एक बार फिर इस बिजनेस मॉडल पर चर्चा तेज कर दी है.
सरकार ने क्यों लगाई रोक?
क्विक कॉमर्स कंपनियों का सबसे बड़ा यूएसपी ही उनकी स्पीड थी. ब्लिंकिट, जेप्टो और स्विगी इंस्टामार्ट जैसे प्लेटफॉर्म लंबे समय तक 10 मिनट में सामान पहुंचाने को अपने बिजनेस और मार्केटिंग का हिस्सा बनाते रहे. लेकिन जनवरी 2026 में केंद्र सरकार ने कंपनियों से 10 मिनट की डिलीवरी के दावे को प्रमोट नहीं करने को कहा है. इसके पीछे सबसे बड़ी चिंता डिलीवरी राइडर्स की सुरक्षा को लेकर थी. इतने कम समय में ऑर्डर पहुंचाने के प्रेशर से राइडर्स गाड़ी तेज चलाते हैं. इसके बाद ब्लिंकिट, जेप्टो और दूसरे प्लेटफॉर्म ने अपनी ब्रांडिंग से 10 मिनट वाली लाइन हटानी शुरू कर दी है. 
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स्पीड से लेकर कमाई तक सवाल
10 मिनट की डिलीवरी के मॉडल में हम लोगों को सिर्फ तेजी दिखाई देती है, लेकिन उसके पीछे डिलीवरी पार्टनर पर पड़ने वाला दबाव नहीं दिखाई देता है. अगर किसी राइडर को ऑर्डर लेने, स्टोर से सामान उठाने और ट्रैफिक के बीच ग्राहक तक पहुंचने के लिए कम समय मिले तो हर मिनट वो तेजी में रहता है. इसी वजह से क्विक कॉमर्स सेक्टर में राइडर्स की सुरक्षा को लेकर सवाल उठते रहे हैं. गिग वर्कर्स के संगठनों ने भी कहा है कि ऐसे टाइम-बाउंड डिलीवरी मॉडल से सड़क पर जल्दबाजी और काम के दबाव का खतरा बढ़ता है.
हाइजीन पर भी सवाल
क्विक कॉमर्स कंपनियों के पास डार्क स्टोर मॉडल होता है. यहां ऑनलाइन ऑर्डर के लिए सामान स्टोर और पैक किया जाता है. ग्राहक यहां खरीदारी करने नहीं जाता, लेकिन उसके घर पहुंचने वाला सामान यहीं से निकलता है. यहीं अब खाद्य सुरक्षा को लेकर भी गंभीर सवाल सामने आए हैं. हाल ही में महाराष्ट्र एफडीए ने मुंबई के मलाड वेस्ट स्थित ब्लिंक कॉमर्स यानी ब्लिंकिट के डार्क स्टोर का फूड लाइसेंस सस्पेंड कर दिया है. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक निरीक्षण के दौरान वहां फल और सब्जियों के आसपास कॉकरोच और गंदगी थी.
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जेप्टो के वेयरहाउस में क्या मिला?
सिर्फ ब्लिंकिट ही नहीं, जेप्टो के एक वेयरहाउस पर भी कार्रवाई हुई है. बेंगलुरु के होस्कोटे तालुक में जेप्टो से जुड़े एक वेयरहाउस को फ़ूड सेफ्टी एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन डिपार्टमेंट ने सील किया है. जांच में खाने के सामान की स्टोरेज और हैंडलिंग से जुड़ी कई कमियां सामने आई हैं.

सामान की सुरक्षा है जरूरी
क्विक कॉमर्स का पूरा मॉडल सुविधा और स्पीड बेस्ड है. लेकिन खाने-पीने की चीजों के मामले में सिर्फ तेजी काफी नहीं है. मान लीजिए दूध, फल, सब्जियां, ब्रेड या कोई पैकेज्ड फूड कुछ मिनट में घर पहुंच गया, लेकिन उसकी स्टोरेज सही तरीके से नहीं हुई थी. ऐसे में ग्राहक के लिए 10 या 15 मिनट की डिलीवरी का कोई फायदा नहीं रह जाता है.
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गिग वर्कर्स पर है ध्यान
क्विक कॉमर्स सेक्टर की कहानी सिर्फ डिलीवरी टाइम और सामान तक नहीं है. इसके पीछे बड़ी संख्या में गिग वर्कर्स काम करते हैं. सरकार ने 2026 में ब्लिंकिट, जेप्टो और स्विगी इंस्टामार्ट, जोमेटो, उबर, ओला और रैपिडो जैसे प्लेटफॉर्म से अपने गिग वर्कर्स को ई श्रम पोर्टल पर रजिस्टर करने और उनके लिए सोशल सिक्योरिटी का दायरा बढ़ाने की दिशा में कदम उठाने को कहा है.





















