नोएल टाटा से मतभेद और बोर्ड में असहमति, क्यों चंद्रशेखरन को छोड़ना पड़ा पद?
N Chandrasekaran Resigns: टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने कंपनी की 18 अगस्त को होने वाली सालाना आम बैठक (AGM) से पहले पद छोड़ने का फैसला लिया है. हालांकि, वह अपना मौजूदा कार्यकाल पूरा करेंगे.

N Chandrasekaran Resignation: टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है और उन्होंने स्पष्ट किया है कि वे 20 फरवरी 2027 को अपना मौजूदा कार्यकाल समाप्त होने के बाद दोबारा इस पद के लिए दावेदारी नहीं करेंगे.
चंद्रशेखरन ने क्यों दिया इस्तीफा?
अचानक इस्तीफा देने की मुख्य वजह टाटा संस के बोर्ड में उनके कार्यकाल विस्तार को लेकर सर्वसम्मति का न होना और टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा के साथ रणनीतिक मतभेद हैं.
एन चंद्रशेखरन ने अपने आधिकारिक बयान में बताया कि सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट और सर रतन टाटा ट्रस्ट ने उनके कार्यकाल को अगले 5 वर्षों के लिए बढ़ाने की सिफारिश की थी. 24 फरवरी 2026 को हुई टाटा संस की बोर्ड मीटिंग में इस प्रस्ताव को रखा गया, लेकिन बोर्ड के एक सदस्य ने इसका समर्थन नहीं किया. टाटा ग्रुप की परंपरा और नियमों के अनुसार इतने बड़े फैसले बिना सर्वसम्मति के आगे नहीं बढ़ाए जाते, जिसके कारण चंद्रशेखरन ने खुद इस फैसले को टालने का अनुरोध किया था. 6 महीने बीत जाने के बाद भी इस पर कोई आम सहमति नहीं बन सकी.
कौन नहीं चाहता था कि चंद्रशेखरन टाटा संस के येरमैन के पद पर दोबारा नियुक्त हों?
सूत्रों के मुताबिक नोएल टाटा चंद्रशेखरन के पक्ष में नहीं थे. अक्टूबर 2024 में रतन टाटा के निधन के बाद टाटा ट्रस्ट की कमान संभालने वाले नोएल टाटा, चंद्रशेखरन की नीतियों और कुछ फैसलों के खिलाफ थे. नोएल टाटा ने एयर इंडिया के अधिग्रहण, सेमीकंडक्टर फैब, ईवी बैटरी और टाटा न्यू जैसे नए व्यवसायों में हो रहे भारी निवेश, कर्ज और नुकसान पर चिंता जताई थी.
नोएल टाटा चंद्रशेखरन को 5 साल के बजाय केवल 2 साल का कार्यकाल देने के पक्ष में थे, क्योंकि टाटा ग्रुप में कार्यकारी पदों के लिए रिटायरमेंट की उम्र 65 वर्ष तय है. हालांकि, इस आयुसीमा को बोर्ड की मंजूरी से बढ़ाया जा सकता है. नोएल टाटा चाहते थे कि चंद्रशेखरन यह लिखित गारंटी दें कि टाटा संस को कभी भी शेयर बाजार में लिस्ट नहीं किया जाएगा. चंद्रशेखरन का मानना था कि आरबीआई के नियमों के कारण यह फैसला पूरी तरह उनके नियंत्रण में नहीं है, इसलिए वे ऐसा कोई वादा नहीं कर सकते थे.
आगे क्या होगा?
टाटा संस की AGM 18 अगस्त 2026 को होने वाली है, जिसमें चंद्रशेखरन को बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स के सदस्य और टाटा संस चेयरमैन के पद पर फिर से नियुक्त किए जाने पर वोटिंग होनी थी. चंद्रशेखरन ने अपने बयान में लिखा है कि चूंकि अभी तक उनकी दोबारा नियुक्ति पर बोर्ड में सर्वसम्मति नहीं बन पाई है.
चंद्रशेखरन ने कहा कि टाटा संस को फरवरी 2027 के बाद के नेतृत्व को लेकर जल्द स्पष्टता चाहिए. चंद्रशेखरन किसी भी विवादित वोटिंग या कड़वाहट से बचना चाहते थे, इसलिए उन्होंने एजीएम से ठीक पहले ही पद छोड़ने की घोषणा कर दी.
चंद्रशेखरन फरवरी 2027 तक अपना कार्यकाल पूरा करेंगे ताकि इस दौरान समूह में लीडरशिप का ट्रांजिशन आसानी से हो सके और बोर्ड नया उत्तराधिकारी ढूंढ सके. 18 अगस्त की एजीएम में अब टाटा संस के नए नेतृत्व की प्रक्रिया को लेकर आधिकारिक रूप से विचार विमर्श शुरू किया जाएगा.
क्या नोएल टाटा बनेंगे टाटा संस के नए चेयरमैन
नोएल टाटा सीधे तौर पर टाटा संस के चेयरमैन नहीं बन सकते. टाटा संस के बोर्ड ने हितों के टकराव से बचने और कॉर्पोरेट संचालन को बेहतर बनाने के लिए फरवरी 2022 में एक विशेष प्रस्ताव पारित करके यह स्पष्ट नियम बनाया था कि दोनों संस्थाओं के प्रमुख अलग-अलग व्यक्ति होने चाहिए.
नोएल टाटा, टाटा ट्रस्ट के चेयरमैन हैं इसलिए वो इस पद पर रहते टाटा संस के चेयरमैन नहीं बन सकते. आखिरी बार रतन टाटा ही ऐसे व्यक्ति थे जो 2012 तक टाटा संस और टाटा ट्रस्ट दोनों के चेयरमैन थे. रतन टाटा 2012 में टाटा संस के चेयरमैन के पद से हट गए थे और सायरस मिस्त्री को टाटा संस का चेयरमैन बनाया गया था.
चंद्रशेखरन के नेतृत्व में टाटा संस की तरक्की
- चंद्रशेखरन 2017 में टाटा संस के पहले गैर-पारिवारिक पेशेवर चेयरमैन बने थे. उनके नेतृत्व में टाटा समूह ने अभूतपूर्व तरक्की की.
- ग्रुप का कुल रेवेन्यू FY 2020 के 7.89 लाख करोड़ रुपए से दोगुना होकर FY 2026 में 16.24 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गया.
- समूह का टैक्स के बाद मुनाफा पांच गुना से अधिक बढ़कर 32000 करोड़ रुपए से 1.71 लाख करोड़ रुपए हो गया.
- इस्तीफे की खबर आते ही टीसीएस और टाटा स्टील जैसी बड़ी टाटा कंपनियों के शेयर 1 फीसदी से 5 फीसदी तक टूट गए.
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