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देश के स्टील इंडस्ट्री की बढ़ी बहुत बड़ी मुसीबत, जल्द उठाने होंगे ये कदम, जानें क्या है पूरा मामला

भारत ने अपनी आवश्यक खपत को पूरा करने के लिए इस्पात उत्पादों का आयात किया. 2024-25 की पहली छमाही में भारत के लौह एवं इस्पात आयात में 10.7 प्रतिशत वृद्धि हुई, जबकि दूसरी छमाही में इसमें कमी आई, जिसका मुख्य कारण सेफगार्ड शुल्क था.

RBI on Steel Industry: देश के इस्पात क्षेत्र को 2023-24 और 2024-25 के दौरान प्रमुख वैश्विक इस्पात उत्पादकों के सस्ते आयात और डंपिंग के कारण भारी चुनौतियों का सामना करना पड़ा है. यह जानकारी भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के अक्टूबर 2024 बुलेटिन में प्रकाशित लेख में दी गई है.

लेख में कहा गया है कि इस्पात आयात में वृद्धि का मुख्य कारण आयात कीमतों में कमी है, जिससे घरेलू इस्पात उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है. लेख का शीर्षक है ‘स्टील अंडर सीज: अंडरस्टैंडिंग द इम्पैक्ट ऑफ डंपिंग ऑन इंडिया’, जिसमें कहा गया है कि वैश्विक उत्पादकों के सस्ते इस्पात की डंपिंग से घरेलू उत्पादन को खतरा हो सकता है, लेकिन इसे उपयुक्त नीतिगत उपायों से नियंत्रित किया जा सकता है. हाल ही में लगाए गए सुरक्षा शुल्क (सेफगार्ड ड्यूटी) आयात डंपिंग के खिलाफ सुरक्षा प्रदान करते हैं.

इस्पात उद्योग के लिए बढ़ी चुनौती

भारत ने अपनी आवश्यक खपत को पूरा करने के लिए इस्पात उत्पादों का आयात किया. 2024-25 की पहली छमाही में भारत के लौह एवं इस्पात आयात में 10.7 प्रतिशत वृद्धि हुई, जबकि दूसरी छमाही में इसमें कमी आई, जिसका मुख्य कारण सेफगार्ड शुल्क था. अंतरराष्ट्रीय बाजार में इस्पात की कम कीमतों के कारण भारत ने 2023-24 में अपने इस्पात आयात में 22 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की.

भारत लगभग 45 प्रतिशत इस्पात दक्षिण कोरिया (14.6%), चीन (9.8%), अमेरिका (7.8%), जापान (7.1%) और ब्रिटेन (6.2%) से आयात करता है. 2024-25 में चीन, जापान, दक्षिण कोरिया, इंडोनेशिया और वियतनाम से इस्पात आयात में वृद्धि हुई. इसके अलावा, अप्रैल 2022 से नवंबर 2024 तक भारत की इस्पात खपत औसतन 12.9 प्रतिशत मासिक वृद्धि दर के हिसाब से बढ़ी है.

लेख में कहा गया कि घरेलू खपत और उत्पादन के बीच अंतर बढ़ गया है, और अप्रैल 2022 से घरेलू और वैश्विक दोनों स्तरों पर इस्पात की कीमतें कम हुई हैं. आरबीआई के सांख्यिकी एवं सूचना प्रबंधन विभाग के अधिकारी अनिर्बन सान्याल और संजय सिंह ने लिखा है कि हाल के दिनों में भारत के इस्पात क्षेत्र को बढ़ते आयात और प्रतिस्पर्धी मूल्य निर्धारण के कारण चुनौतियों का सामना करना पड़ा है.

डंपिंग और कम आयात लागत बड़े फैक्टर

इन कारकों ने घरेलू बाजार हिस्सेदारी को प्रभावित किया, क्षमता उपयोग कम किया और घरेलू उत्पादकों पर दबाव बढ़ाया. साथ ही, निर्यातक देशों की मूल्य निर्धारण रणनीतियां इस्पात उद्योग के लिए चिंता का विषय बनी हुई हैं. लेख में सुझाव दिया गया है कि इन चुनौतियों से निपटने के लिए संतुलित दृष्टिकोण की जरूरत है, जिसमें नीतिगत समर्थन, नवोन्मेषण, लागत दक्षता और टिकाऊ व्यवहार के माध्यम से भारत के इस्पात उत्पादन की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ाने की पहल शामिल हो.

लेखकों के अनुसार, आयात में वृद्धि मुख्य रूप से इस्पात की कम आयात कीमतों के कारण हुई, जिसका प्रतिकूल प्रभाव घरेलू इस्पात उत्पादन पर पड़ा है. आरबीआई ने स्पष्ट किया कि लेख में व्यक्त विचार लेखकों के अपने हैं और भारतीय रिजर्व बैंक के विचारों को प्रतिबिंबित नहीं करते.

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