पोंजी स्कीम-गैर कानूनी जमा योजनाओं पर कैबिनेट ने दी नए विधेयक को मंजूरी
कोई भी संस्था प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से, विज्ञापन के जरिए या फिर लोगो से आग्रह कर अनियमित जमा योजना नहीं चलाएगी.

नई दिल्लीः झांसा देकर जुटाये या बगैर-कायदे कानून के चलने वाली जमा योजनाओं पर नकेल कसने के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल ने एक नए विधेयक The Banning of Unregulated Deposit Schemes Bill, 2018 को मंजूरी दे दी है. विधेयक के कानून बनने के बाद ऐसे जमा जुटाने वालों को 10 साल तक जेल की सजा और जुटायी रकम के दोगुने तक बतौर जुर्माना भरना होगा. उम्मीद है कि जब अगले महीने संसद का दोबारा बजट सत्र शुरु होगा, तब इस विधेयक को लोकसभा में पेश किया जाएगा.
क्या है गैर-कानूनी जमा गैर-कानूनी जमा योजना को कुछ इस तरह से परिभाषित किया गया है, ”एक ऐसी योजना या व्यवस्था जहां कोई जमा जुटाने वाली संस्था कारोबार के रूप में ऐसी जमा स्वीकार करती है जो नियमित नहीं है.” नियमित का यहां मतलब किसी संस्था के साथ पंजीकरण होना है. एक बात यहां गौर करना जरूरी है कि किसी संस्था का पंजीकरण होना जमा जुटाने की छूट नहीं देता. जमा के लिए तय रेग्युलेटर मसलन सेबी या रिजर्व बैंक से अनुमति जरूरी है. आम तौर पर कई संस्थाएं, कॉरपोरेट अफेयर मंत्रालय से कराए पंजीकरण को जमा जुटाने की मुहिम में कुछ इस तरह प्रचारित करती है कि अमुक जमा योजना के लिए सरकार का समर्थन है और लोग झांसे में आ जाते हैं. लिहाजा ये जरूर देख ले कि संस्था ही नहीं, किसी जमा योजना के लिए सरकारी अनुमति है या नहीं.
वैसे तो कानून के मसौदे में ऐसी जमाओं की कोई लिस्ट नहीं दी गयी है, लेकिन परिभाषा के आधार पर बाजार मे चल रही नीचे दी गयी जमा योजनाओं को पोंजी स्कीम कहा जा सकता है:1. बिल्डर की ओर से पोजेशन तक जमा रकम पर तय रिटर्न का वादा करना
2. किसी भी ज्वैलर की ओऱ से मासिक किश्त की योजना शुरु करना. कई जाने माने ब्रांड योजना चलाते हैं जिसमें 11 किश्तें ग्राहक को देनी होती है औऱ 12 वीं किश्त ज्वैलर्स जमा कराता है. पूरी रकम से गहने खरीदने की सुविधा दी जाती है. ऐसी ही एक योजना के तहत 11 किश्त पूरी होने के बाद किश्त का 50 फीसदी तक बतौर पर डिस्काउंट देने की बात कही जाती है.
3. कार्यालयों में थेफ्ट-क्रेडिट सोसायटी के अलावा चलने वाली कमेटियां. कई दफ्तरों में कमेटियां चलती है जिसमें हर सदस्य एक तय रकम हर महीने जमा करते हैं औऱ हर महीने एक-एक सदस्य को कमेटी की पूरी राशि दी जाती है.
गैर-कानूनी जमा को आप पोंजी स्कीम, कलेक्टिव इनवेस्टमेंट स्कीम, मल्टी लेयर मार्केटिंग स्कीम या फिर किसी भी नाम से पुकार सकते है, सबमें एक चीज आम होती है और वो है बाजार के चलन से कहीं ज्यादा कमाई का झांसा. आप इसे कुछ यूं भी समझ सकते हैं. जब सरकारी सुरक्षा के साथ लायी गयी नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट (NSC) या पब्लिक प्रॉविडेंट फंड (PPF) में 7.6 फीसदी का ब्याज मिल रहा होता है तो आपके सामने 18 से 24 फीसदी की दर से सालाना ब्याज का झांसा दिया जाता है. इस लालच में निरक्षर ही नहीं, अच्छे खासे पढ़े लिखे लोग भी आते रहे हैं. वैसे तो बीते सालों में समय-समय पर इस तरह की योजनाओं पर लगाम लगने की बात लगती रही, लेकिन शारदा चिटफंड घोटाले के बाद मुहिम ने जोड़ पकड़ी.
क्या है प्रस्तावित कानून में ? विधेयक के तहत प्रस्तावित है कि
- कोई भी संस्था प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से, विज्ञापन के जरिए या फिर लोगो से आग्रह कर अनियमित जमा योजना नहीं चलाएगी.
- इस प्रावधान का उल्लंघन करने पर कम से कम तीन और ज्यादा से ज्यादा 10 साल तक के लिए जेल भेजा जा सकता है. इसके साथ ही कुल जुटायी जमा का दो गुना तक बतौर जुर्माना भरना होगा
- यदि कोई संस्था नियमित जमा योजना में मियाद पूरी होने पर धोखा कर पैसा वापस नहीं चुकाए तो उसके लिए सात साल तक की सजा का प्रावधान है. इसके साथ या इसके अलावा 5 लाख से 25 करोड़ रुपये तक का जुर्माना भी हो सकता है.
- बार-बार जुर्म करने वालों को 10 साल तक की सजा भुगतनी पड़ सकती है और 50 करोड़ रुपये तक का जुर्माना देना पड़ सकता है.
- यदि जुर्म किसी कम्पनी पर साबित होता है तो जुर्म के वक्त जवाबदेह अधिकारी पर कार्रवाई होगी और उसे जेल जाना पड़ सकता है. अधिकारियों में कम्पनी के निदेशक से लेकर प्रबंधक तक शामिल होगा.
- जमाकर्ताओं के पैसे जुटाने के लिए संपत्ति जब्त करने का भी प्रावधान है. इसके साथ गलत तरीके से कमाए गए मुनाफे को प्रभावित लोगों के बीच बांटने का भी व्यवस्था होगी. तकनीकी भाषा में इस व्यवस्था को डिस्कगॉरजमेंट कहते हैं.
- संपत्ति जब्त करने और प्रभावित लोगों को मदद पहुंचाने का काम तय समय सीमा के भीतर होगा.
- एक ऑनलाइन डाटाबेस बनेगा जिसमें गैर कानून या गैर नियमित जमा योनजाओं की पूरी जानकारी उपलब्ध होगी.
Source: IOCL



























