भारत में रीजनल जेट बनाने की बड़ी तैयारी, अडानी ग्रुप ने की ब्राजील की एम्ब्रेयर के साथ पार्टनरशिप
Adani Group:

Adani Group: गौतम अडानी की अगुवाई वाली कंपनी अडानी एयरोस्पेस अब भारत में बड़े पैमाने पर रीजनल जेट बनाने की तैयारी में जुट गई है. इसके चलते कंपनी ने ब्राजील की एयरोस्पेस कंपनी एम्ब्रेयर (Embraer) के साथ मिलकर पार्टनरशिप की है. ये जेट छोटी से मध्यम दूरी के रूट पर चलते हैं और इनमें 70 से 146 यात्रियों के बैठने की क्षमता होती है. अडानी ग्रुप के उठाए गए इस कदम के साथ भारत जल्द ही उन चुनिंदा देशों में शामिल हो जाएगा जिनके पास कमर्शियल फिक्स्ड-विंग एयरक्राफ्ट के लिए फाइनल असेंबली लाइन (FAL) है.
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले महीने अडानी एयरोस्पेस ने ब्राजील की कंपनी एम्ब्रेयर के साथ FAL के लिए एक MoU साइन किया, जो एविएशन सेक्टर में PM मोदी के मेक-इन-इंडिया प्रोग्राम के लिए सबसे बड़ा बूस्ट है. प्रस्तावित FAL के लिए साइट और इन्वेस्टमेंट जैसी डिटेल्स और यह कब चालू होगा, इसकी जानकारी अभी तक नहीं है. इस महीने के आखिर में हैदराबाद एयर शो में एक औपचारिक घोषणा होने की उम्मीद है.
क्या होता है रीजनल जेट?
रीजनल जेट का इस्तेमाल पर आमतौर पर छोटे शहरों को बड़े हवाई अड्डों से जोड़ने के लिए किया जाता है. अडानी ग्रुप और एम्ब्रेयर के साथ-साथ HAL (हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड) और NAL (नेशनल एयरोस्पेस लैबोरेटरीज) भी स्वेदशी विमान (RTA-70) पर काम कर रहे हैं. भारत अपने एविएशन सेक्टर को और मजबूत बनाना चाहता है इसलिए रीजनल जेट बनाने पर जोर दे रहा है क्योंकि देश के एविशन सेक्टर का दायरा बढ़ रहा है और छोटे शहरों में भी अब हवाई यात्रा की मांग बढ़ने लगी है. लोकल लेवल पर रीजनल जेट बनाए जाएंगे, तो इकोनॉमी को आगे बढ़ने में मदद मिलेगी, रोजगार के अवसर बढ़ेंगे.
इंजन MRO पर भी नजर
अडानी ग्रुप ने पिछले साल दिसंबर में कहा था कि उसका प्लान आने वाले समय में इंजन MRO (मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल) और पैसेंजर एयरक्राफ्ट-टू-फ्रेटर (P2F) कन्वर्जन बिजनेस में उतरने का है. अडानी एयरपोर्ट होल्डिंग्स लिमिटेड (AAHL) के डायरेक्टर जीत अडानी ने पिछले हफ्ते एक बातचीत के दौरान PTI को बताया, "हमने दोनों (एविएशन) को अलग कर दिया है. एक एयरपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर है और दूसरा एयरक्राफ्ट सर्विसेज बिज़नेस है. इसमें ड्यूल यूज, डिफेंस और सिविलियन यूज शामिल हो सकते हैं इसलिए इंडामेर और एयर वर्क्स (MROs) के बीच हम अब प्लेटफॉर्म को एक सिंगल बड़ी MRO कंपनी में मिला रहे हैं."
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Source: IOCL






















