8th Pay Commission में सरकारी कर्मचारियों की चमकेगी किस्मत, उम्मीद से कहीं ज्यादा मिलेगा HRA!
8th Pay Commission HRA: आठवें वेतन आयोग को लेकर बताया जा रहा है कि इसमें हाउस रेंट अलाउंस (HRA) को उम्मीद से कहीं ज्यादा इजाफा हो सकता है क्योंकि यह सीधे-सीधे बेसिक सैलरी से जुड़ा हुआ है.

- 8वें वेतन आयोग में हाउस रेंट अलाउंस (HRA) बढ़ेगा, संभावना है.
- बेसिक सैलरी में बढ़ोतरी से सीधे HRA में महत्वपूर्ण इजाफा होगा.
- विभिन्न फिटमेंट फैक्टर से नए HRA की गणना की जा रही है.
- कर्मचारियों ने X-श्रेणी शहरों में HRA 36% तक करने की मांग की है.
8th Pay Commission: 8वें वेतन आयोग को लेकर को लेकर अब यह खबर सामने आ रही है इसमें हाउस रेंट अलाउंस (HRA) में बढ़ोतरी केंद्रीय कर्मचारियों की उम्मीदों से कहीं ज्यादा बढ़कर होगी. इसकी बड़ी वजह है कि HRA सीधे आपकी बेसिक सैलरी से जुड़ा होता है और नए वेतन आयोग में बेसिक सैलरी में इजाफा होना तय है. HRA का कैलकुलेशन बेसिक सैलरी के आधार पर होता है. 8वें वेतन आयोग के तहत 2.0, 2.28, 2.57 जैसे अलग-अलग फिटमेंट फैक्टर पर विचार किया जा रहा है.
कितना बढ़ जाएगा HRA?
उदाहरण के तौर पर, Level-1 किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी अभी 18000 रुपये है. अगर 2.0 फिटमेंट फैक्टर लागू होता है, तो उसकी बेसिक सैलरी बढ़कर 36000 रुपये पर पहुंच जाएगी और हाउस रेंट अलाउंस भी उस हिसाब से पहले के 5400 रुपये के मुकाबले 10800 रुपये तक पहुंच जाएगा.
इसी तरह से अगर Level-1 कर्मचारियों के लिए 2.57 फिटमेंट फैक्टर लागू होता है, तो उनकी बेसिक सैलरी भी 18000 से सीधे बढ़कर 46260 रुपये हो जाएगी और HRA में 13880 रुपये तक का इजाफा होगा. ठीक इसी तरह Level-10 श्रेणी के कर्मचारियों का HRA X- कैटेगरी के शहरों के लिए 43250 रुपये प्रति माह तक पहुंच सकता है.
HRA को लेकर क्या है मांग?
केंद्र सरकार के कर्मचारियों को उनकी पोस्टिंग वाली जगह के आधार पर अभी तीन अलग-अलग दरों पर HRA मिलता है-
- X-कैटेगरी के शहरों के लिए बेसिक सैलरी का 30%
- Y-कैटेगरी के शहरों के लिए 20%
- Z-कैटेगरी के शहरों के लिए 10%
हालांकि, ऑल इंडिया एनपीएस कर्मचारी संघ और दूसरे संगठनों का तर्क है कि दिल्ली-NCR और मुंबई जैसे महानगरों में मकानों का किराया जिस तेजी से बढ़ रहा है, उसके मुकाबले मौजूदा दरें काफी कम हैं. उनकी मांग HRA की मौजूदा दरों को बढ़ाकर X-कैटेगरी के शहरों के लिए बेसिक सैलरी का 36%, Y-कैटेगरी के शहरों के लिए 24% और Z-कैटेगरी के शहरों के लिए 12% करने की है. कुछ संगठनों ने तो इसे X-कैटेगरी के शहरों के लिए 40% तक करने की मांग की है.
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