एक्सप्लोरर

Opinion: पांच राज्यों के चुनावी नतीजों से प्रभावित हो सकता है लोकसभा चुनाव

पांच राज्यों- राजस्थान, मिजोरम, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और तेलंगाना- में चुनाव की तारीखें चुनाव आयोग ने आज 9 अक्टूबर को घोषित कर दी हैं. इन राज्यों में नवंबर के महीने में चुनाव होंगे और 7, 17, 23 और 30 नवंबर को इन राज्यों में वोटिंग होगी.  3 दिसंबर को सभी राज्यों में चुनाव के नतीजे आ जाएंगे. हालांकि, चुनाव की घोषणा के साथ ही कयासों का बाजार भी गर्म हो गया है, लेकिन अभी यह कहना बेहद मुश्किल होगा कि चुनावी नतीजों का ऊंट किस करवट बैठेगा? 

ये चुनाव किधर ले जाएंगे, यह भविष्य में

अभी चुनाव की घोषणा हुई है बस, इसलिए अभी कुछ देखना या कुछ कयास लगाना तो थोड़ी जल्दबाजी होगी, हालांकि कई लोग होते हैं चुनाव के साथ ही नतीजों को भी प्रतीक्षित मानते हैं. पिछले कुछ चुनाव से यह परसेप्शन बनता है कि फलां पार्टी जीतने जा रही है या फलां पार्टी हारने जा रही है. यह धारणा भी हमारे शहरी यानी नागर समाज में अधिक बनती है, जहां मीडिया साक्षरता काफी है. मीडिया की अति साक्षरता और अति सक्रियता जहां व्याप्त है, वहीं यह देखने को मिलता है. चुनाव हालांकि जमीनी स्तर पर कुछ और होते हैं औऱ नतीजे बार-बार यही साबित करते हैं, इसलिए क्या होने जा रहा है, यह तो केवल कयास लगाने जैसा ही होगा, इस पर शायद कुछ चुनावी पंडित बोल सकें, लेकिन कायदे से कुछ कहना शायद ही संभव हो.

हां, इतना तय है कि अब तैयारियां पूरी जोर-शोर से शुरू हो जाएंगी, खासकर भाजपा और कांग्रेस के लिए, क्योंकि तीन बड़े राज्यों- राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में तो इन दोनों की ही सीधी टक्कर है और तेलंगाना में भी सत्ताधारी बीआरएस यानी भारत राष्ट्र समिति और कांग्रेस के बीच ही मुकाबला होगा. मिजोरम भी इसी में शामिल है. देखना यही है कि इन पांचों राज्यों के चुनाव पर घरेलू और अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों का क्या असर पड़ता है, खासकर मिजोरम जिसका पड़ोसी राज्य मणिपुर है और जहां अभी तक हिंसा पर लगाम नहीं लग सकी है, वहां क्या असर होगा, यह देखने का होगा. 

चुनाव आयोग का फैसला सोचा-समझा

चुनाव आयोग की प्रेस कांफ्रेंस में यह सवाल पूछा गया कि छत्तीसगढ़ जैसे छोटे राज्य में, जहां सरकार भी यह दावा कर रही है कि वहां नक्सली समस्या पर काबू पा लिया गया है, वहां भला दो चरणों में चुनाव कराने का क्या औचित्य है? इस पर चुनाव आयुक्त ने बड़ी कायदे की बात कही कि चुनाव आयोग का निष्पक्ष चुनाव कराना, फ्री एंड फेयर चुनाव कराना, कहीं कोई कमी न रह जाए, यही ड्यूटी है और इसी के लिए चुनाव आयोग ने यह काम किया है. यह तो मानना ही होगा कि हाल-हाल तक छत्तीसगढ़ में नक्सली प्रभाव बहुत हद तक रहा है, इसलिए शायद एहतियात के नाते चुनाव आयोग ने दो चरणों में वहां चुनाव कराने का फैसला लिया है. हालांकि, चुनाव आयोग के पास यह जवाब नहीं था कि तेलंगाना में जो छग से सटा हुआ राज्य ही है और जहां नक्सली प्रभाव लगभग वैसा ही था तो वहां भला एक चरण में चुनाव कैसे हो रहा है, लेकिन हमें यह भी ध्यान रखना चाहिए कि चुनाव आयोग जब भी चुनाव करवाता है, तो लगभग महीनों उसकी तैयारी करता है, इनपुट लेता है. चुनाव आयोग के पास अपनी साख बनाए रखने की चुनौती भी है और उसने कमोबेश उसको बनाए रखा है. खासकर, टीएन शेषन के बाद जो भी साख थी, वह बची हुई है. 

नतीजे जो भी हों, लेकिन ईवीएम पर सवाल उठेंगे

मौजूदा राजनीति बहुत बदली है. इजरायल पर हमास और हिजबुल्ला गुट के हमले के बाद भारतीय राजनीति भी बंटी हुई है. भारत के एक विश्वविद्यालय अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में हमास के समर्थन में रैली निकलती है और सोशल मीडिया पर भी यह विभाजन दिख रहा है. राजनीति की बात हो ही चुकी है. भारत की राजनीति बहुत बदलने वाली नहीं है. हमारा जो अति-लोकतांत्रिक समाज है, वह बहुत बदलनेवाला नहीं है. तीन राज्यों के चुनाव नतीजे जो भी आएं, ईवीएम पर सवाल उठेगा ही, खासकर अगर सत्ताधारी भाजपा जीतती है. अगर वह नहीं जीती और इंडिया अलायंस जीता तो कुछ ही महीनों बाद आम चुनाव होने वाले हैं और वह बिल्कुल यह बताने की कोशिश करेगी कि चुनाव आयोग केंद्र सरकार की कठपुतली है. वह फेंस के आसपास खड़े वोटर्स को लुभाने की कोशिश करेगी. आज तो यह साफ है कि हरेक दल का एक प्रतिबद्ध वोटर है और वह अपना मन बना चुका होता है. वह कई साधनों से अपनी राय बनाता है, लेकिन जो फ्लोटिंग वोटर है, जो दुविधा में है, जो फेंस-सिटर है, वैसे वोटर्स को लुभाने की कोशिश होती है. अगर भाजपा जीत गयी इन तीनों राज्यों में या तेलंगाना में उसने बड़ी दस्तक दी तो उसके विरोधी ईवीएम से लेकर चुनाव प्रक्रिया तक पर सवाल उठाएगी. यह कोई ढंकी-छुपी बात नहीं है. 

यह बहुत लोडेड सवाल है कि इन पांचों राज्यों में परिणाम क्या होंगे? इसका जवाब देना अभी तो बहुत मुश्किल है. हां, जब चुनाव की गर्मी पूरी तरह बढ़ जाएगी, तो इसका जवाब देने की कोशिश की जा सकती है. हिमाचल प्रदेश के चुनाव में लगभग भाजपा जीत चुकी थी, लेकिन स्थानीय राजनीति की वजह से वह हार गयी. यही काम कर्नाटक में हुआ. 7, 17, 23 और 30 नवंबर को इन राज्यों में चुनाव होने हैं, 17 और 23 को बड़े राज्यों- राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़- में चुनाव होने हैं और वहां 6 नवंबर तक ही माहौल बनेगा. तभी कुछ कहा जा सकता है.

इसका एक उदाहरण भी है कि किसी ने सोचा नहीं था कि 2004 में अटलजी हार जाएंगे, पर वे हारे. जहां तक पीएम के राजस्थान में यह कहने की बात है कि भाजपा का उम्मीदवार कमल है, वह तो संवैधानिक बात ही है. कहीं भी उम्मीदवार घोषित कर चुनाव लड़ने की बात नहीं की जाती है. हां, व्यक्तिवाद हावी होने के बाद ये सवाल उठते रहे हैं. कई बार इसका फायदा भी मिलता है, कई बार नुकसान भी होता है. तो, फिलहाल यही कहा जा सकता है कि अभी इंतजार करने का समय है और बस देखा जाए कि आगे क्या होने वाला है? 

[नोट- उपरोक्त दिए गए विचार लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं. यह जरूरी नहीं कि एबीपी न्यूज़ ग्रुप इससे सहमत हो. इस लेख से जुड़े सभी दावे या आपत्ति के लिए सिर्फ लेखक ही ज़िम्मेदार है.]

View More

ओपिनियन

Sponsored Links by Taboola
25°C
New Delhi
Rain: 100mm
Humidity: 97%
Wind: WNW 47km/h

टॉप हेडलाइंस

अमित शाह 20 अक्टूबर को जाएंगे पंजाब, नशाखोरी-कानून व्यवस्था पर AAP सरकार पर साधा निशाना
अमित शाह 20 अक्टूबर को जाएंगे पंजाब, नशाखोरी-कानून व्यवस्था पर AAP सरकार पर साधा निशाना
'बीजेपी फर्जी वोट और बेईमानी को अपनी ताकत...', अखिलेश यादव का तीखा हमला
'बीजेपी फर्जी वोट और बेईमानी को अपनी ताकत...', अखिलेश यादव का तीखा हमला
चेतेश्वर पुजारा ने चुनी NZ टेस्ट सीरीज के लिए बेस्ट प्लेइंग XI; कुलदीप को किया इग्नोर
चेतेश्वर पुजारा ने चुनी NZ टेस्ट सीरीज के लिए बेस्ट प्लेइंग XI; कुलदीप को किया इग्नोर
'मंदादि' क्लोजिंग बॉक्स ऑफिस कलेक्शन, बनाया बड़ा रिकॉर्ड, कमाया 176.48%  प्रॉफिट
'मंदादि' क्लोजिंग बॉक्स ऑफिस कलेक्शन, बनाया बड़ा रिकॉर्ड, कमाया 176.48% प्रॉफिट

वीडियोज

Sandeep Chaudhary : जनता परेशान...कारोबार का नुकसान...कब समाधान? |  Rahul Gandhi | SIR | Neha Bora
Kolkata Durga Pandal Stampede: दुर्गा पंडाल में मौत की भगदड़! | Bengal | Suvendu Adhikari | Breaking
Mahadangal: 'तख्तापलट' की आस...अराजकता का प्रयास? Abhijeet Dipke | Neha Bora | CJP | Rahul Gandhi
France Protest 2026 | Breaking News: यूरोप के सुलगे देश...सड़कों पर 'आक्रोश' | Europe | ABP News
Bollywood News: 'कॉफी विद करण 9' में 'विरोश' का तड़का: काउच पर दिखेगा विजय और रश्मिका का रोमांस! (18.10.26)

पर्सनल कार्नर

टॉप आर्टिकल्स
टॉप रील्स
अमित शाह 20 अक्टूबर को जाएंगे पंजाब, नशाखोरी-कानून व्यवस्था पर AAP सरकार पर साधा निशाना
अमित शाह 20 अक्टूबर को जाएंगे पंजाब, नशाखोरी-कानून व्यवस्था पर AAP सरकार पर साधा निशाना
'बीजेपी फर्जी वोट और बेईमानी को अपनी ताकत...', अखिलेश यादव का तीखा हमला
'बीजेपी फर्जी वोट और बेईमानी को अपनी ताकत...', अखिलेश यादव का तीखा हमला
चेतेश्वर पुजारा ने चुनी NZ टेस्ट सीरीज के लिए बेस्ट प्लेइंग XI; कुलदीप को किया इग्नोर
चेतेश्वर पुजारा ने चुनी NZ टेस्ट सीरीज के लिए बेस्ट प्लेइंग XI; कुलदीप को किया इग्नोर
'मंदादि' क्लोजिंग बॉक्स ऑफिस कलेक्शन, बनाया बड़ा रिकॉर्ड, कमाया 176.48%  प्रॉफिट
'मंदादि' क्लोजिंग बॉक्स ऑफिस कलेक्शन, बनाया बड़ा रिकॉर्ड, कमाया 176.48% प्रॉफिट
'भारत के लिए रची गई थी बांग्लादेश-फ्रांस जैसी हिंसक साजिश', किरेन रिजिजू का विपक्ष पर बड़ा हमला
'भारत के लिए रची गई थी बांग्लादेश-फ्रांस जैसी हिंसक साजिश', रिजिजू का विपक्ष पर बड़ा हमला
नेहा बोरा को लेकर चिराग पासवान का राहुल पर निशाना- 'जिस लड़की की तस्वीर...'
नेहा बोरा को लेकर चिराग पासवान का राहुल पर निशाना- 'जिस लड़की की तस्वीर...'
YSR प्रमुख जगनमोहन रेड्डी का CEC पर चौंकाने वाला बयान- 'मेरी भूल थी कि...'
YSR प्रमुख जगनमोहन रेड्डी का CEC पर चौंकाने वाला बयान- 'मेरी भूल थी कि...'
किस सेगमेंट की कार में कितना होना चाहिए टायर प्रेशर, जान लें
किस सेगमेंट की कार में कितना होना चाहिए टायर प्रेशर, जान लें
Embed widget