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महाराष्ट्र: चुनाव जीते बगैर कैसे हासिल करेंगे उद्धव ठाकरे अपना पुराना मुकाम?

किसी शायर ने लिखा है-

"अगर मौजें डुबो देतीं तो कुछ तस्कीन हो जाती,
किनारों ने डुबोया है मुझे इस बात का गम है."

अपनों की बगावत के चलते महाराष्ट्र की सत्ता खोने वाले शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे का भी यही दर्द है. लेकिन अब वे इस गम से उबरने और बागियों को सबक सिखाने के लिए अपनी पार्टी के काडर में नया जोश भर रहे हैं. वे शिव सैनिकों को संदेश दे रहे हैं कि अब हमारा एकमात्र उद्देश्य यही है कि पार्टी से गद्दारी करने वालों को सबक सिखाया जाए और इसका सबसे बड़ा जरिया है कि आगामी चुनाव में इनको पराजय की धूल चटाई जाये.

गौरतलब है कि आगामी नवंबर में बृहन मुंबई महानगरपालिका यानी बीएमसी के चुनाव हैं जहां पिछले कई बरसों से शिवसेना का ही एकछत्र राज है. महाराष्ट्र  की राजनीति में राज्य की सत्ता के बाद बीएमसी को ही  सबसे ज्यादा ताकतवर माना जाता है, जिसका काफी मोटा बजट है. 

बीजेपी की निगाह इस पर कब्जा करने की है और उसे लगता है कि शिवसेना बागियों के सहारे अब उसे भी हथियाया जा सकता है. हालांकि बीएमसी के चुनाव से पहले ही कानूनी दांव-पेंच अपनाने की नौबत भी आ सकती है. इसलिए कि उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिव सेना और सीएम एकनाथ शिंदे गुट के उम्मीदवार, दोनों ही शिव सेना के चुनाव चिन्ह पर अपना चुनाव लड़ने का दावा ठोकेंगे. ऐसी सूरत में चुनाव से पहले ही दोनों गुटों के बीच कानूनी लड़ाई होना लगभग तय माना जा रहा है. ऐसे में,पहले तो ये देखना होगा कि उस लड़ाई में किसकी जीत होती है.

लेकिन उद्धव ठाकरे ने अपने शिव सैनिकों से कह दिया है वे चुनाव की तैयारी में जमीनी स्तर पर पूरी तरह से जुट जाएं. सत्ता खोने के बाद हताश-निराश हो चुके शिव सैनिकों में नई जान फूंकने के मकसद से शिवसेना की महिला इकाई ने शिवसेना भवन में मंगलवार को एक कार्यक्रम आयोजित किया था. इसमें बागियों के ख़िलाफ़ उद्धव जमकर बरसे लेकिन साथ ही अपने कार्यकर्ताओं से कहा कि वे अपना पूरा ध्यान सिर्फ चुनाव की तरफ ही लगाएं. फिलहाल राजनीति का जो खेल चल रहा है, उसकी परवाह न करें क्योंकि उससे निपटने में वो सक्षम हैं.

उद्धव का सारा जोर इस पर था कि शिव सेना को बीएमसी समेत अन्य महानगरपालिका के चुनाव हर हाल में जीतने हैं, इसलिए शिव सैनिकों की जिम्मेदारी है कि वे पार्टी के इन गद्दारों के ख़िलाफ़ लोगों में गुस्सा पैदा करें. हालांकि उन्होंने ये भी दावा किया कि कोई भी चुनाव हो, उसमें असली शिवसेना ही शिंदे गुट को धूल चटाने को ताकत रखती है. दरअसल,अपना पुराना मुकाम हासिल करने और पार्टी पर मजबूत पकड़ बनाये रखने के लिए उद्धव के पास बीएमसी समेत उन सभी महानगर पालिकाओं का चुनाव जीतने के अलावा और कोई चारा भी नहीं है, जहां शिव सेना का कब्ज़ा है. वह इसलिये कि बीएमसी में शिव सेना अगर अपना कब्जा बरकरार नहीं रख पाती है, तो पार्टी में बिखराव शुरू हो जाएगा और फिर मजबूत कार्यकर्ता भी उद्धव का साथ छोड़कर शिंदे गुट की तरफ भागने लगेंगे.

विधानसभा में खुद को बागी बताने वाले सीएम शिंदे के मकसद का खुलासा करते हुए उद्धव ने ये भी कहा कि उनका असली प्लान तो ये था कि एक शिव सैनिक दूसरे सैनिक से खुले आम सड़कों पर लड़ने लगे. शिंदे सिर्फ शिव सेना को तोड़ना ही नहीं बल्कि इसे पूरी तरह से खत्म कर देना चाहते थे लेकिन वे इसमें कामयाब नहीं हो पाए. सीएम शिंदे पर तंज कसते हुए ठाकरे ने कहा कि एकनाथ शिंदे पर बीजेपी का सिर्फ नियंत्रण ही नहीं है, बल्कि उनको पूरी तरह से दबा दिया गया है. कल विधानसभा में उनसे माइक छीन लिया गया. आगे और पता नहीं क्या-क्या उनसे छीन लिया जाएगा.

नोट- उपरोक्त दिए गए विचार व आंकड़े लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं. ये जरूरी नहीं कि एबीपी न्यूज ग्रुप इससे सहमत हो. इस लेख से जुड़े सभी दावे या आपत्ति के लिए सिर्फ लेखक ही जिम्मेदार है.

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