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अनुच्छेद 370 हटने के बाद कश्मीर में हालात बदलने तय हैं बस सरकार पर विश्वास करना होगा

पाकिस्तान नहीं सुधरेगा ये समझा जा सकता है, लेकिन कश्मीर की आवाम को समझना होगा कि अगर सबका साथ, सबका विकास से सियासत की तस्वीर बदलती है तो इस फैसले पर विश्वास करना ही सबके हित में है और इस सबमें पड़ोसी पाकिस्तान भी है ये भी उसे समझ लेना चाहिए।

अनुच्छेद 370 हटने के बाद जम्मू कश्मीर की फिजा धीरे-धीरे बदल रही है। सरकार इसे बदलने में जुटी है। हालात पर काबू पाने की कोशिश में सुरक्षा बल जुटे हुए हैं। एनएसए डोभाल की तस्वीर बताती है कि कश्मीर के लोग सरकार के फैसले को समझ रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी के संबोधन से तमाम सवालों और आशंकाओं पर पूर्ण विराम लग जाना लाजमी है। लेकिन गुलाम नबी आजाद जैसे कांग्रेस नेता के बयान न केवल भड़काने का काम कर रहे हैं बल्कि जाने अनजाने पाकिस्तान को मुद्दा थमा रहे हैं। वो पाकिस्तान जो अब तक कश्मीर में खून खराबा फैलाने, अवाम को बरगलाने, गुमराह करने जैसे काम करता आ रहा है। यहां अलगाववादियों को बढ़ावा देकर उनके ज़रिए कश्मीर के नौजवानों का भविष्य बर्बाद करता रहा है। जिसको समझते हुए सरकार ने 370 को गैर जरूरी मानते हुए हटाने का फैसला किया।

ज़ाहिर है कश्मीर को ढाल बनाकर जिन लोगों ने यहां 70 सालों तक सियासत की है। तकलीफ तो उन्हें होगी लेकिन उनकी तकलीफों का इलाज अब कश्मीर के युवा करेंगे। वो युवा जो जानते हैं कि बिना विकास कश्मीर को जन्नत नहीं माना जा सकता है। बिना रोजगार घाटी में बारूद की फसल बोई जाती रहेगी। नासूर बने आतंकवाद, अलगाववाद और परिवारवार ने घाटी समेत पूरे जम्मू-कश्मीर का जो नुकसान किया। उसकी भरपाई का समय आ चुका है और इसके लिए कश्मीर के लोग साथ आएंगे। ये भरोसा हिंदुस्तान की सरकार को भी है। बावजूद इसके कश्मीर को लेकर जो आशंकाए हैं। उन्हें लेकर कई सवाल हैं जो खड़े होते हैं। जैसे कि क्या कश्मीर के युवाओं और देश के सपनों का कश्मीर हकीकत में जन्नत बन पाएगा और क्या कश्मीर से अलगाववाद, आतंकवाद और परिवारवाद का खात्मा होगा ?

दरअसल, जम्मू कश्मीर से ताल्लुक रखने वाले और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद की सोच ये है कि राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के साथ संवाद बनाने वालों को पैसे पर आए लोग बता दिया। जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 की वापसी के बाद हिंदुस्तान के नेताओं की सोच को बयां करता ये बयान बताता है कि कैसे मोदी सरकार के इस फैसले को शक की निगाह से देखा जा रहा है और अपने ही इलाके के लोगों को लेकर गुलाम नबी आजाद की ऐसी सोच क्या हिकारत को जन्म नहीं देती है। तो क्या ये सोच कश्मीर के लोगों का अपमान नहीं करती है ?

वैसे सच तो ये है कि गुलाम नबी ही नहीं पाकिस्तान भी सरकार के फैसले को लेकर बौखलाया हुआ है। भारत सरकार के फैसले का असर उसकी बेचैनियों को देख कर समझा जा सकता है। उसके फैसलों में हड़बड़ी साफतौर पर दिख रही है। पाकिस्ता ने अभी तक भारतीय उच्चायुक्त को वापस भेज दिया है। हवाई रूट के 9 रास्तों में से तीन को पूरी तरह बंद कर दिया है। समझौता एक्सप्रेस की सेवा को अपनी तरफ से रोक चुका है। भारत से कारोबारी रिश्तों को फिलहाल खत्म कर दिया है। भारतीय फिल्मों पर पूरी तरह पाबंदी लगा दी है और अनुच्छेद 370 की वापसी के फैसले को UN ले जाने की धमकी दी है।

सूत्रों की मानें तो पाकिस्तान यहीं नहीं रूकना चाहता है। माना जा रहा है कि भारत के फैसले से घाटी में बारूद की खेती और अमन में सुराख करने वालों के हौसले पस्त हो चुके है। लिहाजा अपने भाड़े के ट्टूओं को भेजकर वो दहशत का खूनी खेल भी खेलने की फिराक में है।

कश्मीर को लेकर जिस तरह से अलगाववादियों, आतंकवादियों के सुर एक रहे हैं और सियासत इन सुरों को दबाने की बजाय सबक लेने की जगह दोहरा रवैया अपनाती रही है। उससे ये तो साफ है कि सरकार के फैसले ने ऐसे लोगों का इलाज कर दिया है। हताशा में ये हिंदुस्तान के खिलाफ अपनी हरकतों से बाज नहीं आएंगे। इसलिए सरकार ने न केवल पुख्ता तैयारी की है बल्कि पाकिस्तान से बचने की सलाह दी है।

ज़ाहिर है जिस तरह से हिंदुस्तान की सरकार के फैसले को देश भर में समर्थन मिला है। उससे कोई भी घबड़ा सकता है। जम्हूरियत की दुहाई देने वाले पाकिस्तान में सैनिकों के तख्तापलट को दुनिया देखती आई है। ऐसे में एक चुनी हुई सरकार के साहसी फैसले से पाकिस्तान की नींद उड़ी हुई है। कश्मीर के नौजवानों को अब न बरगला पाने का मलाल उसे चैन से बैठने नहीं दे रहा है। सवाल यही है कि अनुच्छेद 370 हटने के बाद कश्मीर के युवाओं और देश के सपनों का कश्मीर क्या हकीकत में बनेगा जन्नत ?

वैसे कुल मिलाकर एक बात साफ है कि कश्मीर को लेकर पाकिस्तान का छाती पीटना समझ से परे है, हालांकि वो ऐसा 70 साल से करता आ रहा है।अनुच्छेद 370 के हटने के बाद कश्मीर में दौर बदलेगा। यहां होने वाले विकास से लोगों का नजरिया बदलेगा। ज़ाहिर है इससे पाकिस्तान खौफ में है, उसका यही खौफ उसे गीदड़भभकी देने के लिए उकसा रहा है । पाकिस्तान नहीं सुधरेगा ये समझा जा सकता है, लेकिन कश्मीर की आवाम को समझना होगा कि अगर सबका साथ, सबका विकास से सियासत की तस्वीर बदलती है तो इस फैसले पर विश्वास करना ही सबके हित में है और इस सबमें पड़ोसी पाकिस्तान भी है ये भी उसे समझ लेना चाहिए।

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