UP में INDIA अलायंस को मैनेज कर लेंगे अखिलेश यादव? सपा के इस कदम से नाराज हो सकती है कांग्रेस!
UP Politics: उत्तर प्रदेश में वर्ष 2027 में विधानसभा होने हैं. इससे पहले समाजवादी पार्टी के सामने एक बड़ा धर्मसंकट खड़ा हो सकता है. अब यह देखना होगा कि सपा चीफ अखिलेश यादव इस संकट से कैसे निकलेंगे?

इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इंक्लूसिव अलायंस (INDIA Bloc), राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में अहम बैठक करने जा रही है. यह बैठक वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव के लगभग एक साल बाद हो रही है. इस बैठक में आम आदमी पार्टी शामिल नहीं हो रही है. राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने 7 जून, रविवार को पत्रकारों से बात करते हुए स्पष्ट कहा था कि आम आदमी पार्टी, इंडिया अलायंस का हिस्सा नहीं है.
आम आदमी पार्टी नेता के इस बयान से सिर्फ दिल्ली ही नहीं बल्कि लखनऊ की सियासत भी गर्म हो गई है. दरअसल, अप्रैल में एक कार्यक्रम में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव सुल्तानपुर गए थे. यहां उनके साथ आप सांसद संजय सिंह भी थे. इस दौरान जब पत्रकारों ने उनसे सीट बंटवारे और आम आदमी पार्टी के यूपी में भविष्य पर सवाल किया तो अखिलेश यादव ने कहा कि मैं और संजय सिंह मिलकर तय करेंगे कि क्या करना है.
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अब जबकि आप ने स्पष्ट कर दिया है कि वह इंडिया अलायंस में नहीं है और वह बैठक में भी नहीं शामिल हुई, ऐसे में यह सवाल उठ रहे हैं कि अगर सपा ने अरविंद केजरीवाल की पार्टी को स्पेस दिया तो भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का इस कदम पर क्या रुख होगा?
दीगर है कि साल 2024 का लोकसभा चुनाव हो या साल 2022 का विधानसभा चुनाव, दोनों ही मौकों पर यह चर्चा होती थी कि आम आदमी पार्टी, सपा के साथ चुनाव लड़ सकती है. हालांकि साल 2022 के चुनाव में बात नहीं बनी और आप ने अपने प्रत्याशी उतारे.
2024 में आप ने दिया था सपा को समर्थन?
वहीं साल 2024 के चुनाव में आम आदमी पार्टी ने समाजवादी पार्टी को अपना समर्थन दिया और एक भी सीट पर चुनाव नहीं लड़ा.
इधर, वर्ष 2027 के चुनाव को देखते हुए आम आदमी पार्टी, यूपी में काफी एक्टिव है. प्रयागराज समेत कई जिलों में संजय सिंह का दौरा हुआ और वह अलग-अलग मुद्दों के जरिए राज्य में पार्टी की पैठ बनाने में जुटे हुए हैं.
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दिल्ली के विधानसभा चुनाव में भी सपा ने आम आदमी पार्टी को अपना समर्थन दिया था, जबकि लोकसभा चुनाव में कांग्रेस और सपा ने यूपी में अच्छा प्रदर्शन किया था. हालांकि कांग्रेस ने अखिलेश के इस फैसले पर कोई खास प्रतिक्रिया नहीं दी थी.
राजनीतिक जानकारों की मानें तो सपा के लिए आप को कुछ सीटों पर यूपी में सियासी स्पेस देना कोई बड़ी बात नहीं है लेकिन अखिलेश के असल संकट कांग्रेस को मनाना है. दिल्ली चुनाव में कांग्रेस और आप ने एक दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ा था. दोनों ही राजनीतिक दलों के अलाकमानों ने एक दूसरे पर जमकर आरोप प्रत्यारोप किए थे.
पंजाब को लेकर अलर्ट कांग्रेस?
इसके साथ ही यूपी के चुनाव पंजाब के साथ होंगे, ऐसे में कांग्रेस, यूपी में आप के साथ अलायंस में जाकर पंजाब सरीखे राज्य में अपने कार्यकर्ताओं और मतदाताओं के बीच यह संदेश जाने से बिल्कुल बचना चाहेगी कि वह प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तौर पर आम आदमी पार्टी के साथ है. ऐसे में इस बात की पूरी संभावना है कि अगर सपा ने यूपी में आप को गठबंधन में स्पेस देने की कोशिश की तो कांग्रेस इससे किनारा बना सकती है.
अब यह देखना होगा कि क्या सपा, आप को यूपी में कांग्रेस संग गठबंधन में स्पेस देती है या अरविंद केजरीवाल की अध्यक्षता वाली पार्टी अकेले ही चुनाव लड़ेगी या फिर साल 2024 के लोकसभा चुनाव की तरह वह सपा को अपना समर्थन देगी.

























