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एक विवादास्पद इतिहास: CIA और ड्रग्स कार्टेल्स के बीच 'वो' रिश्ते

सीआईए और ड्रग्स कार्टेल्स के बीच रिश्तों का पुराना इतिहास रहा है,और अब इन रिश्तों को लेकर नई खबर सामने आई है. एक सीक्रेट दस्तावेज़ के मुताबिक, CIA ने हाल ही में मैक्सिको के कुछ ड्रग्स कार्टेल्स के साथ ख़ुफ़िया समझौते किया है. इन समझौतों का मक़सद मैक्सिको में राजनितिक स्थिरता बनाए रखना और अमेरिकी सीमा पर ड्रग्स तस्करी को नियंत्रित करना है. हालांकि, इस बात की डर है कि CIA का यह कदम मैक्सिको में ड्रग्स व्यापार को और बढ़ावा दे सकता है.

साथ ही एक और रिपोर्ट भी सामने आई है जिसमें दावा किया गया है कि CIA ने अफगानिस्तान में तालिबान के कुछ गुटों के साथ ख़ुफ़िया ताल्लुक़ात कायम किए हैं. इन गुटों का संबंध अफीम की खेती और हेरोइन उत्पादन से है. रिपोर्ट के मुताबिक, CIA का उद्देश्य इन गुटों के माध्यम से अफगानिस्तान में अपनी उपस्थिति बनाए रखना और चीन और रूस के प्रभाव को कम करना है.

दरअस्ल केंद्रीय खुफिया एजेंसी (CIA) ने अपने गठन के बाद से ही अलग अलग देशों में अपने रणनीतिक और राजनीतिक मक़सद को हासिल करने के लिए कई विवादास्पद तरीकों का सहारा लिया है. इनमें से एक प्रमुख तरीका उन  वार लॉर्ड्स और संगठनों के साथ गठजोड़ करना रहा है, जो ड्रग्स के अवैध धंधे में शामिल रहे हैं. 

OSS से CIA तक

द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान, अमेरिकी खुफिया एजेंसी ऑफिस ऑफ स्ट्रैटेजिक सर्विसेज़ (OSS) की स्थापना की गई, जो बाद में 1947 में CIA के रूप में विकसित हुई. युद्ध के बाद , CIA को अपने गुप्त अभियानों के लिए वित्तीय संसाधनों की आवश्यकता थी. इस मामले में, पॉल एडवर्ड हेलिवेल नामक एक युवा वकील ने माफिया के साथ मिलकर नशीली दवाओं की तस्करी के माध्यम से धन जुटाने का प्रस्ताव रखा. इस योजना के तहत, माफिया सरगना "लकी" लुचियानो के साथ सहयोग किया गया, जो उस समय कैद में था , लेकिन ड्रग्स तस्करी में माहिर था . इस गठजोड़ का मक़सद अमेरिकी शहरों में अफ्रीकी-अमेरिकी समुदायों को नशीली दवाओं की खेप देकर करके भारी मुनाफा कमाना था.

 दक्षिण पूर्व एशिया: गोल्डन ट्राएंगल

1950 और 1960 के दशकों में, दक्षिण पूर्व एशिया के "गोल्डन ट्राएंगल" (थाईलैंड, लाओस, म्यांमार) क्षेत्र में अफीम का बड़े पैमाने पर उत्पादन होता था. यहां, CIA ने मुकामी वॉर लॉर्ड्स  और समूहों के साथ गठजोड़ किया, जो अफीम की खेती और तस्करी में शामिल थे. इनमें से एक प्रमुख सहयोगी लाओस का जनरल वांग पाओ था, जिसने CIA के समर्थन से अपने सैनिकों के लिए धन जुटाने के लिए अफीम की तस्करी की. CIA ने इन गतिविधियों को नजरअंदाज किया, क्योंकि वांग पाओ और अन्य स्थानीय नेताओं का समर्थन वियतनाम युद्ध के दौरान साम्यवादी ताकतों के खिलाफ निहायत ज़रूरी था.

अफगानिस्तान: सोवियत संघ के खिलाफ संघर्ष

1980 के दशक में, सोवियत संघ के खिलाफ अफगान मुजाहिदीन को समर्थन देने के लिए CIA ने पाकिस्तान की इंटर-सर्विसेज़ इंटेलिजेंस (ISI) के साथ मिलकर काम किया. इस सहयोग के दौरान, अफगानिस्तान में अफीम की खेती और हेरोइन उत्पादन में भारी वृद्धि हुई. मुजाहिदीन गुट्स ने ड्रग्स तस्करी से हासिल धन का इस्तेमाल हथियार खरीदने और अपने अभियानों को संचालित करने के लिए किया. CIA ने इन गतिविधियों को अनदेखा किया, क्योंकि उनका सारा धेयान सोवियत संघ को जंग में हराने में लगा था.

दक्षिण अमेरिका: कोलंबिया और निकारागुआ

दक्षिण अमेरिका में, CIA ने कोलंबिया और निकारागुआ में भी विवादास्पद गतिविधियों में अपनी इन्वॉल्वमेंट दिखाई. कोलंबिया में, फार्क (FARC) जैसे विद्रोही समूहों ने कोकीन के उत्पादन और तस्करी से पैसे हासिल किया. निकारागुआ में, CIA ने कॉन्ट्रा विद्रोहियों का समर्थन किया, जो कम्युनिस्ट सैंडिनिस्टा सरकार के खिलाफ लड़ रहे थे. कॉन्ट्रा समूहों ने भी ड्रग्स तस्करी से धन जुटाया, और आरोप है कि CIA ने इन गतिविधियों को सिर्फ नजरअंदाज ही नहीं किया बल्कि उन्हें प्रोत्साहित किया, ताकि अपने राजनीतिक उद्देश्यों को साधा जा सके.

निष्कर्ष

CIA की इतिहास में कई ऐसे मिसाले मिलती हैं, जहां उसने अपने जिओ पोलिटिकल मक़सद को हासिल करने के लिए  ड्रग्स तस्करी में शामिल क्रिमिनल गैंग्स और बागी आर्म्ड ग्रुप्स  और व्यक्तियों के साथ सहयोग किया या उनकी गतिविधियों को नजरअंदाज किया. इन कार्रवाइयों ने न केवल संबंधित क्षेत्रों में नशीली दवाओं की समस्या को बढ़ावा दिया, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी इसके गंभीर परिणाम सामने आए. सामने आई नई जानकारी से यह ज़ाहिर होता है कि CIA अभी भी ऐसी नीतियों को अपना रही है, जो अवैध गतिविधियों को बढ़ावा देती हैं. यह ज़रूरी है कि अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रम्प अपने दूसरे कार्यकाल में  आगे आने वाले समय में ऐसी नीतियों से खुद को बचाए जो इंसानियत के लिए नुक़सानदेह हैं. जिस ड्रग्स की लानत से खुद अमेरिका की नई नस्ल बर्बाद हो रही है.

[नोट- उपरोक्त दिए गए विचार लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं. यह ज़रूरी नहीं है कि एबीपी न्यूज़ ग्रुप इससे सहमत हो. इस लेख से जुड़े सभी दावे या आपत्ति के लिए सिर्फ लेखक ही ज़िम्मेदार है.]

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