एक्सप्लोरर

BLOG: हरिशंकर परसाई जिन्होंने वैचारिक जड़ता को कभी नहीं स्वीकारा

स्मृतिशेष परसाई जी दुनिया से जाने के 23 साल भी अगर हिंदी समाज के हृदय में सुरक्षित हैं तो यह महज उनके प्रति सम्मान जताने, उनकी जयंती या पुण्यतिथि मनाने की औपचारिकता के चलते नहीं, बल्कि इस वजह से है कि उनके लिखे की प्रासंगिकता दिन दूनी रात चौगुनी बढ़ती जाती है. किसी और प्रसंग में इस मुहावरे को दुआ की तरह लिया जाता, लेकिन राजनीतिक पतन की पराकाष्ठा, समाज के  विकृत होते चेहरे और संस्कृति के चीरहरण ने इस मुहावरे को बद्दुआ बना कर रख दिया है! परसाई ने लिखा ही था- ‘बेइज्जती में अगर दूसरे को भी शामिल कर लो तो आधी इज्जत बच जाती है.’

आजादी के बाद बने भारत के विद्रूप चेहरे को जैसा आईना हरिशंकर परसाई ने दिखाया है वह अनन्य है. उन्होंने अपने समय के बड़े से बड़े भ्रष्ट नेता, सेठ, मित्र, अफसर, पुलिस, पुजारी, धर्मोपदेशक यानी किसी को नहीं बख़्शा. वह अजातशत्रु और लोकप्रिय बनने के चक्कर में कभी नहीं पड़े. समाज को दिशा दिखाने का जिम्मा ओढ़ने वाले बुद्धिजीवियों पर उनका करारा व्यंग्य देखिए- ‘इस देश के बुद्धिजीवी शेर हैं पर वे सियारों की बारात में बैंड बजाते हैं.’ वह आम आदमी तक की ख़बर ले लेते हैं- ‘अद्भुत सहनशीलता और भयावह तटस्थता है इस देश के आदमी में! कोई उसे पीटकर पैसे छीन ले तो वह दान का मंत्र पढ़ने लगता है.’ और ऐसा वह कोई निजी दुश्मनी भंजाने के इरादे से नहीं लिखते थे. आख़िरकार राजनैतिक, वैचारिक और व्यवहारिक पाखंड की धज्जियां उड़ाने के मूल में व्यंग्यकार की आम जन के प्रति सहानुभूति और करुणा ही तो होती है. परसाई समाज में व्याप्त विसंगतियों को उघाड़ने के साथ-साथ आत्मालोचन से भी पीछे नहीं हटते थे. इसीलिए वह आज भी अगली-पिछली पीढ़ियों वाले व्यंग्य लेखकों के लिए निकष बने हुए हैं.

अधिकतर नए व्यंग्य लेखकों की समस्या यह रही है कि आर्थिक नव उपनिवेशवाद को आर्थिक और राजनीतिक तौर पर लागू करके नए तरह का वैश्विक बाजार स्थापित किया जा रहा है, लेकिन इसके अंतर्विरोध शिद्दत से उनकी पकड़ में नहीं आ रहे हैं. वे यह भी नहीं नहीं समझ पा रहे कि एक नए प्रकार के नक्कू व्यंग्य लेखन को प्रायोजित और प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिसमें फूहड़ या सिचुएशनल हास्य अधिक और विचारों की गहनता कम हो. लेकिन वे अपने इसी सतहीपन में लहालोट हैं. जबकि परसाई राष्ट्रीय ही नहीं अंतर्राष्ट्रीय अंतर्विरोधों और कुटिलताओं पर पैनी नज़र रखते थे. उनके करुणायुक्त व्यंग्य की पराकाष्ठा देखिए- ‘अमरीकी शासक हमले को सभ्यता का प्रसार कहते हैं. बम बरसते हैं तो मरने वाले सोचते हैं, सभ्यता बरस रही है.’  वह मानते थे कि लेखन चाहे कैसा भी हो या तो शासक वर्ग के लिए होता है या शोषित वर्ग के लिए होता है. जाहिर है वह आजीवन शोषित वर्ग के साथ मुश्तैदी से खड़े रहे.

अपनी घोर प्रतिबद्धता के बावजूद परसाई ने वैचारिक जड़ता को कभी नहीं स्वीकारा. जहां भी उन्हें असंगति दिखाई दी, हथौड़ा चला दिया. उन्होंने छद्म मार्क्सवादियों को निशाने पर लेते हुए लिखा था- वह सिगरेट को ऐसे क्रोध से मोड़कर बुझाता है जैसे किसी बुर्जुआ का गला घोंट रहा हो. दिन में यह क्रांतिकारी मार्क्स, लेनिन, माओ के जुमले याद करता है. रात को दोस्तों के साथ शराब पीता है और क्रांतिकारी जुमले दुहराता है. फिर मुर्गा इस तरह खाता है जैसे पूंजीवाद को चीर रहा हो!’ इसके बरक्स दुनिया ने देखा कि ऐसा ही प्रहार जब परसाई जी ने धार्मिक पाखंड पर कर दिया तो 1976 में कथित स्वयंसेवकों ने जबलपुर में उनकी टांग तोड़ डाली. इसकी प्रतिक्रिया में परसाई जी हिंसक नहीं हुए. उन्होंने विनोदपूर्वक लिखा- ‘मुझे क्या पता था कि यश लिखने से अधिक पिटने से मिलता है, वरना मैं पहले ही पिटने का इंतजाम कर लेता.’

दुनिया में 71 वसंत देखने वाले परसाई ने आज से 50 साल पहले ही भांप लिया था कि भारत में आगे क्या घटित होने वाला है. उन्होंने लिखा कि विदेशों में जिस गाय का दूध बच्चों को पुष्ट कराने के काम आता है, वही गाय भारत में दंगा कराने के काम में आती है. और यह भी लिखा कि इस देश में गोरक्षा का जुलूस सात लाख का होता है, मनुष्य रक्षा का मुश्किल से एक लाख का. वे यह भी लिख गए हैं कि अर्थशास्त्र जब धर्मशास्त्र के ऊपर चढ़ बैठता है तो गोरक्षा आंदोलन का नेता जूतों की दुकान खोल लेता है. एक जगह लिखा कि सरकार कहती है कि हमने चूहे पकड़ने के लिए चूहेदानियां रखी हैं. एकाध चूहेदानी की हमने भी जांच की. उनमें घुसने के छेद से बड़े छेद पीछे से निकलने के लिए हैं. चूहा इधर फंसता है और उधर से निकल जाता है. पिंजरे बनाने वाले और चूहे पकड़ने वाले चूहों से मिले हैं. वे इधर हमें पिंजरा दिखाते हैं और चूहे को छेद दिखा देते हैं. हमारे माथे पर सिर्फ चूहेदानी का खर्च चढ़ रहा है.

सच बताइए, आप लोगों को आज के हालात देखते हुए परसाई जी की उक्त बातें किसी भविष्यवाणी से कम लगती हैं क्या? लेकिन वह कोई नजूमी नहीं थे, वह अपने समय की नब्ज़ पकड़कर भविष्य की बीमारी का अनुमान लगाने वाले सच्चे सर्जन लेखक थे. आप उनका साहित्य गौर से पढ़ेंगे तो मानेंगे कि उनकी प्रासंगिकता आज पहले से कई गुना बढ़ गई है. मुझे परसाई जी की मशहूर रचना 'आवारा भीड़ के खतरे’ का एक उद्धरण याद आ रहा है, जिसमें वह चेतावनी देते हैं- 'मैं देख रहा हूं कि नई पीढ़ी अपने ऊपर की पीढ़ी से ज्यादा जड़ और दकियानूसी हो गई है. दिशाहीन, बेकार, हताश और विध्वंसवादी युवकों की यह भीड़ खतरनाक होती है. इसका उपयोग महत्वाकांक्षी और खतरनाक विचारधारा वाले समूह कर सकते हैं.’ लगता है परसाई जी उपर्युक्त पंक्तियां अभी-अभी लिख कर मेज से उठे हैं. उनकी कलम को नमन! - लेखक से ट्विटर पर जुड़ने के लिए क्लिक करें- https://twitter.com/VijayshankarC

फेसबुक पर जुड़ने के लिए क्लिक करें- https://www.facebook.com/vijayshankar.chaturvedi

(नोट- उपरोक्त दिए गए विचार व आंकड़े लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं. ये जरूरी नहीं कि एबीपी न्यूज ग्रुप सहमत हो. इस लेख से जुड़े सभी दावे या आपत्ति के लिए सिर्फ लेखक ही जिम्मेदार है.)

View More

ओपिनियन

Sponsored Links by Taboola
25°C
New Delhi
Rain: 100mm
Humidity: 97%
Wind: WNW 47km/h

टॉप हेडलाइंस

झूमकर आया मॉनसून! देशभर में पकड़ी रफ्तार, जानें यूपी-बिहार और दिल्ली में कब होगी बारिश
झूमकर आया मॉनसून! देशभर में पकड़ी रफ्तार, जानें यूपी-बिहार और दिल्ली में कब होगी बारिश
Jaipur News: जयपुर के इन इलाकों में कल नहीं चलेगा मोबाइल इंटरनेट, जानें क्या है वजह?
जयपुर के इन इलाकों में कल नहीं चलेगा मोबाइल इंटरनेट, जानें क्या है वजह?
वैभव सूर्यवंशी और अभिषेक शर्मा ओपनर, आयरलैंड से पहले टी20 में कैसी होगी भारत की प्लेइंग इलेवन?
वैभव सूर्यवंशी और अभिषेक शर्मा ओपनर, आयरलैंड से पहले टी20 में कैसी होगी भारत की प्लेइंग इलेवन?
Sunday Box Office 150 करोड़ के पार हुई 'पेद्दी' तो 'बंदर' का हुआ बंटा धार, जानें 'है जवानी तो इश्क होना है' का संडे का हाल
150 करोड़ के पार हुई 'पेद्दी' तो 'बंदर' का हुआ बंटा धार, जानें 'है जवानी तो इश्क होना है' का संडे का हाल

वीडियोज

Chaar Ki Chaal | Ghazipur Encounter | Sanjay Nishad: कमलेश चौधरी एनकाउंटर पर महा-संग्राम!
दुनिया की पहली Electric Car से EV Revolution तक | 200 साल की कहानी | #autolive
बॉलीवुड न्यूज़: जाह्नवी कपूर की कथित प्राइवेट चैट सोशल मीडिया पर वायरल
Spoiler Alert:😱Vaishnavi-Parth के रिश्ते में Reyansh का जहर, गलतफहमियां बढ़ाने की रची साजिश #sbs
Bengal Latest News: पुलिस से बचने के लिए TMC कार्यकर्ता का अनोखा जुगाड़ फेल! | Breaking

पर्सनल कार्नर

टॉप आर्टिकल्स
टॉप रील्स
झूमकर आया मॉनसून! देशभर में पकड़ी रफ्तार, जानें यूपी-बिहार और दिल्ली में कब होगी बारिश
झूमकर आया मॉनसून! देशभर में पकड़ी रफ्तार, जानें यूपी-बिहार और दिल्ली में कब होगी बारिश
Jaipur News: जयपुर के इन इलाकों में कल नहीं चलेगा मोबाइल इंटरनेट, जानें क्या है वजह?
जयपुर के इन इलाकों में कल नहीं चलेगा मोबाइल इंटरनेट, जानें क्या है वजह?
वैभव सूर्यवंशी और अभिषेक शर्मा ओपनर, आयरलैंड से पहले टी20 में कैसी होगी भारत की प्लेइंग इलेवन?
वैभव सूर्यवंशी और अभिषेक शर्मा ओपनर, आयरलैंड से पहले टी20 में कैसी होगी भारत की प्लेइंग इलेवन?
Sunday Box Office 150 करोड़ के पार हुई 'पेद्दी' तो 'बंदर' का हुआ बंटा धार, जानें 'है जवानी तो इश्क होना है' का संडे का हाल
150 करोड़ के पार हुई 'पेद्दी' तो 'बंदर' का हुआ बंटा धार, जानें 'है जवानी तो इश्क होना है' का संडे का हाल
कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन पर आया BJP अध्यक्ष नितिन नवीन का पहला रिएक्शन, कहा- 'विदेश में बैठे...'
कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन पर आया BJP अध्यक्ष नितिन नवीन का पहला रिएक्शन, कहा- 'विदेश में बैठे...'
3,80,00,00,000 का सोना... अमेरिका के पूर्व CIA अधिकारी के पास से मिली इतनी संपत्ति, उड़ जाएंगे होश
3,80,00,00,000 का सोना... अमेरिका के पूर्व CIA अधिकारी के पास से मिली इतनी संपत्ति, उड़ जाएंगे होश
AC के साथ सीलिंग फैन चलाने से क्यों बढ़ती है ठंडक और कैसे कम हो सकता है बिजली का बिल? जानिए पूरी सच्चाई
AC के साथ सीलिंग फैन चलाने से क्यों बढ़ती है ठंडक और कैसे कम हो सकता है बिजली का बिल? जानिए पूरी सच्चाई
जंतर-मंतर प्रदर्शन के बाद क्या होगा कॉकरोच जनता पार्टी का अगला कदम? अभिजीत दीपके ने कर दिया क्लीयर
जंतर-मंतर प्रदर्शन के बाद क्या होगा कॉकरोच जनता पार्टी का अगला कदम? अभिजीत दीपके ने कर दिया क्लीयर
Embed widget