एक्सप्लोरर

आनंद मोहन प्रकरण, सुशासन बाबू 'नीतीश' की उदारता और बिहार की बेबस जनता

बिहार के मुख्यमंत्री और जेडीयू नेता नीतीश कुमार इन दिनों विपक्षी एकता को सुनिश्चित करने की मुहिम की वजह से बेहद सुर्खियों में रहे हैं. लेकिन पिछले कुछ दिनों से उनकी चर्चा एक और वजह से भी हो रही है. वो वजह गोपालगंज के पूर्व डीएम जी कृष्णैया के हत्यारे और पूर्व सांसद आनंद मोहन  के साथ उनकी बढ़ती नजदीकियां हैं. अब उसी नजदीकी की वजह से बिहार के सुशासन बाबू  अचानक 12 साल पहले के नियम में बदलाव कर देते हैं और आनंद मोहन की रिहाई का रास्ता साफ हो जाता है.

राजनीति अगर सिर्फ़ जीतने के लिए ही होता है, तब तो फिर नीतीश कुमार का ये फैसला सही है, लेकिन जहां तक सरकार की जिम्मेदारी क्या होती है, उस नजरिए से ये फैसला ऐसा है..जैसे हम नागरिक इन राजनीतिज्ञों के इशारों पर घूमने वाले सिर्फ़ बनकर रह गए हैं. ये पूरा प्रकरण समझने पर यही लगेगा कि सत्ता के शीर्ष पदों पर बैठने वाले लोगों को अपने हित में जो भी चीज उपयुक्त लगेगा, वो नियम कायदों को बदलने में जरा भी देर नहीं करेंगे. पूरे प्रकरण को समझने से पहले वो घटना जान लेते हैं, जिसकी वजह से आनंद मोहन को जेल के सलाखों के पीछे जाना पड़ा था.

5 दिसंबर 1994 ..ये वही दिन था जब बिहार में एक डीएम की सरेआम हत्या कर दी जाती है. जी. कृष्णैया उस वक्त गोपालगंज के जिलाधिकारी थे. मात्र 37 साल के जी कृष्णैया की हत्या इतने नृशंस तरीके से सड़क पर की गई थी, जिसके बारे में सोचकर आज भी रोंगटे खड़े हो जाते हैं. 1985 बैच के आईएएस जी कृष्णैया मूलत: मौजूदा तेलंगाना के महबूबनगर के थे. जी कृष्णैया चीख-चीख कर अपनी जान की भीख मांगते रहे, लेकिन हत्यारों ने उनकी एक न सुनी. पीट-पीटकर मौत के घाट उतार दिया गया. ये भी कहा गया कि भीड़ में पिटाई के दौरान उन्हें गोली मार दी गई थी.

हत्या भी किन हालातों में हुई थी, ये जानकर आप हैरान रह जाएंगे. इनकी हत्या के एक दिन पहले  उत्तर बिहार के एक कुख्यात अपराधी छोटन शुक्ला मारा गया था, जिसको लेकर मुजफ्फरपुर में उस अपराधी के समर्थकों में गुस्सा था और ये लोग उसके शव के साथ सड़क पर प्रदर्शन करने में जुटे थे. इन लोगों की अगुवाई कुछ नेता लोग भी कर रहे थे.

बिहार में क्या हालात थे, उसका अंदाजा आप लगा सकते हैं कि छोटन शुक्ला जैसा अपराधी मारा जाता है और उसके लिए लोग सड़क पर उतर आते हैं और सरेआम एक  डीएम की हत्या कर देते हैं.

मुजफ्फरपुर में एक डीएम की सरेआम इस तरह से हत्या से न सिर्फ़ बिहार बल्कि पूरा देश दहल गया था. हालांकि इसके बावजूद काफी मशक्कत के बाद इस हत्याकांड के 13 साल बाद पटना की एक अदालत ने पूर्व सांसद आनंद मोहन और उनकी पत्नी लवली आनंद, उस वक्त के जेडीयू नेता मुन्ना शुक्ला, अखलाक अहमद, अरुण कुमार सिन्हा, हरेंद्र कुमार और एस एस ठाकुर को इस हत्या के लिए दोषी करार दिया. अक्टूबर 2007 को ट्रायल कोर्ट से इस मामले में आनंद मोहन समेत तीन लोगों को फांसी की सज़ा सुनाई जाती है. और बाकी चार को उम्रकैद की सज़ा होती है.

ये आजाद भारत के इतिहास में पहला मौका था जब किसी राजनेता या किसी पूर्व सांसद को किसी अदालत से फांसी की सज़ा सुनाई जाती है. अपील पर दिसंबर 2008 में पटना हाईकोर्ट भी आनंद मोहन को दोषी मानने के निचली अदालत के फैसले को सही मानती है लेकिन फांसी की सज़ा को आजीवन कारावास में बदल देती है. हालांकि पटना हाईकोर्ट से इस मामले में लवली आनंद, अखलाक अहमद, अरुण कुमार सिन्हा, मुन्ना शुक्ला, हरेंद्र कुमार और शशि भूषण ठाकुर को राहत मिल जाती है. हाईकोर्ट इन सभी को बरी कर देती है.

आनंद मोहन को सुप्रीम कोर्ट से भी राहत नहीं मिलती है और जुलाई 2012 में  आनंद मोहन की याचिका को खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट गोपालगंज के जिलाधिकारी जी कृष्णैया की 1994 में हुई हत्या के मामले में पूर्व सांसद आनंद मोहन सिंह की दोषसिद्धि और आजीवन कारावास को बरकरार रखती है.

पूरा घटनाक्रम बताने का मकसद सिर्फ़ यहीं था कि आनंद मोहन को जिस घटना के लिए कोर्ट ने हत्यारा माना था, वो घटना कितनी बड़ी और दर्दनाक थी. बिहार में एक दौर था जब आनंद मोहन पर नेता के साथ ही बाहुबली का भी ठप्पा लगा हुआ था.  कई संगीन मामले भी दर्ज हुए थे, हालांकि ज्यादातर मामले या तो वापस ले लिए गए थे या फिर उनमें आनंद मोहन को राहत मिल गई थी. आनंद मोहन 1990 से 95 के बीच महिशी से विधायक भी रहा है. 1996 से 1999 के बीच शिवहर लोकसभा सीट से सांसद भी रहा है.

जब डीएम कृष्णैया की हत्या में आनंद मोहन को दोषी मानकर फांसी और बाद में आजीवन कारावास की सज़ा मिलती है तो इसका मतलब ही है कि वो कोर्ट से घोषित हत्यारा है. इसमें किसी को कोई शक़ नहीं होना चाहिए. ये भी सच्चाई है कि कोर्ट ने आनंद मोहन को एक सरकारी अधिकारी की हत्या में दोषी पाया था और उसके लिए उन्हें आजीवन कारावास की सज़ा मिली थी. 

अब आनंद मोहन ने चूंकि 14 साल  की सज़ा काट ली थी, तो उसे रिहा करने की मांग उसके घर-परिवार, रिश्तेदार और समर्थकों की ओर से लंबे वक्त से की जा रही थी. हालांकि सरकारी अधिकारी की हत्या के लिए उम्रकैद की सज़ा मिलने की वजह से 14 साल के बाद आनंद मोहन की रिहाई को कोई सवाल ही नहीं उठता था. लेकिन जब राज्य के मुख्यमंत्री से लेकर उपमुख्यमंत्री यानी सत्ता खुद ही ठान ले तो कुछ भी संभव हो सकता है और आनंद मोहन के मामले में भी यही हुआ है. राज्य सरकार ने इसी महीने 10 अप्रैल को जेल नियमावली में एक संशोधन कर डाला और उस प्रावधान को ही हटा दिया जिसके रहते आनंद मोहन की रिहाई का सवाल ही नहीं उठता था. पहले इस नियम के मुताबिक अच्छा व्यवहार होने के बावजूद सरकारी अफसरों के कातिलों को रिहाई देने पर पूरी तरह से रोक थी.

बिहार जेल नियमावली, 2012 के नियम 481(1) क में राज्य गृह विभाग ने संशोधन कर दिया और इसके बारे में नोटिफिकेशन जारी कर दिया. संशोधन करके  'काम पर तैनात सरकारी सेवक की हत्या' इस वाक्यांश को ही नियम से गायब कर दिया है. ये कार्यकारी आदेश से किया गया है. उम्रकैद के मामले में 14 साल की सज़ा काटने पर कुछ शर्तों के आधार पर ऐसे सज़ायाफ्ता लोगों की रिहाई होने का नियम है, लेकिन अब से पहले बिहार में सरकारी अधिकारियों की हत्या से जुड़े मामले में ये लाभ किसी उम्र कैद की सज़ा काट रहे शख्स को नहीं मिल पाता था.

आनंद मोहन की रिहाई में यही नियम रोड़ा था, जिसे अचानक से नीतीश सरकार ने हटा दिया. अब देखिए इसके लिए जेडीयू की ओर से कारण भी बड़ा ही अजीब दिया जा रहा है. जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह तर्क दे रहे हैं कि नीतीश कुमार के शासन में आम आदमी और ख़ास आदमी में अंतर नहीं किया जाता है. उनका कहना है कि  आनंद मोहन ने पूरी सजा काट ली और जो छूट किसी भी सजायाफ्ता को मिलती है वह छूट उन्हें नहीं मिल पा रही थी, क्योंकि खास लोगों के लिए नियम में प्रावधान किया हुआ था. ललन सिंह ये भी कहते हैं कि नीतीश कुमार ने आम और खास के अंतर को समाप्त किया और एकरूपता लाई तब उनकी रिहाई का रास्ता साफ हुआ है.

अब इस बयान में देखिए कि ललन सिंह ने कितनी आसानी से ये बात कह दी कि एक हत्यारा ख़ास हो गया इनके लिए. मतलब इन जैसे नेताओं के लिए आम लोग ..आम ही रहेंगे और एक सरकारी अफसर की हत्या के लिए दोषी ख़ास हो जाता है.

जिस नियम कानून को नीतीश कुमार ने बदला है, वो उनके ही शासन में पिछले कई साल से लागू था. इन सालों में आनंद मोहन से पहले भी कई लोगों का मामला ऐसा रहा होगा, लेकिन तब उनके कान पर जूं नहीं रेंगा था. लेकिन जब आनंद मोहन की बात आई तो नियम में बदलाव रातों रात कर दिया जाता है. ये और बात है कि अब आनंद मोहन के चक्कर में दूसरे कई और सज़ायाफ्ता लोगों को भी इसका लाभ मिल जाएगा.

ऐसे तो बीजेपी के नेता बढ़-चढ़कर नीतीश और तेजस्वी के ऊपर अपराधियों को प्रश्रय देने का आरोप लगाते रहते हैं और बिहार में जंगल राज का गुणगान करते रहते हैं, लेकिन आनंद मोहन के नाम पर बीजेपी के तमाम बड़े नेताओं के भी मुंह सिल गए हैं. बस दिखावा के लिए बीजेपी आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय से एक ट्वीट करवा दिया है. उसमें भी अमित मालवीय ने मुद्दा को दलित आईएएस ऑफिसर से जोड़ने की कोशिश कर बस राजनीतिक फायदा ही लेने का काम किया है. बीजेपी के कुछ छुटभैया नेता तो पहले ही आनंद मोहन की रिहाई को खुशी की बात तक कह चुके हैं.

उसी तरह से बसपा प्रमुख और अपने आप को दलितों का नेता मानने वाली मायावती ने भी जिस लहजे में नीतीश कुमार सरकार के इस कदम का विरोध किया है, उससे आप समझ सकती हैं कि उन्होंने भी बस खाना-पूर्ति ही की है. उनके शब्द देखिए जो उन्होने ट्वीट में लिखा है. मायावती कहती हैं कि गरीब दलित समाज से आईएएस बने बेहद ईमानदार जी. कृष्णैया की निर्दयता से की गई हत्या मामले में आनंद मोहन को नियम बदल कर रिहा करने की तैयारी देशभर में दलित विरोधी निगेटिव कारणों से काफी चर्चाओं में हैं. आगे मायावती खुद ही मान रही है कि आनंद मोहन बिहार में कई सरकारों की मजबूरी रहे हैं. मायावती लिखती हैं कि चाहे कुछ मजबूरी हो किन्तु बिहार सरकार इस पर जरूर पुनर्विचार करे.

मायावती की भाषा से आप समझ सकते हैं कि इनका विरोध का तेवर कितना नरम है और वो विरोध भी सिर्फ़ इसलिए कर रही हैं कि मारे गए डीएम दलित समुदाय से थे. जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल मायावती ने किया है, उससे जाहिर होता है कि अगर वहीं डीएम किसी और जाति या समुदाय से होते तो इनके मुख से नीतीश के खिलाफ एक शब्द भी नही निकलता.

पार्टियां चाहे कोई भी हो, कमोबेश सबको सिर्फ अपनी राजनीति और अपने वोट बैंक की चिंता है. ऐसे तो सार्वजनिक मंच पर हर पार्टी के नेता कहते हैं कि राजनीति को अपराध मुक्त बनाना है, लेकिन वास्तविकता क्या है ये हमसे आपसे छिपा नहीं है. पिछले 30-32 साल से बिहार जो भी सरकार रही है, उसमें अलग-अलग वक्त में जनता दल, आरजेडी, जेडीयू और बीजेपी सरकार में हिस्सेदार रही है. इसके बावजूद ये भी वास्तविकता है कि बिहार में इन 30-32 साल में एक से एक बाहुबली, माफिया या अपराधी बकायदा एमएलए और सांसद रहे हैं. नाम की सूची बहुत लंबी है. सूरजभान सिंह, आनंद मोहन, दिलीप सिंह, अनंत सिंह, शहाबुद्दीन, मुन्ना शुक्ला, सुनील पांडेय ऐसे नाम हैं जिनके बारे में बिहार का हर आम आदमी जानता है कि इनका क्या काम रहा है. ये अलग बात है कि सरकारी फाइलों में कुछ और ही दर्ज हो. चाहे सरकार जिसकी भी रही है, उनके शीर्ष नेता दिखावा तो ऐसे करते हैं जैसे उन्हें कुछ मालूम ही नहीं है ऐसे लोगों की कारस्तानियों के बारे में.

कोई नीतीश कुमार से पूछे कि क्या कभी उन्होंने जेल में बंद पड़े  हजारों आम लोगों को राहत पहुंचाने के लिए राज्य के नियम कायदे में इतनी तेजी से बदलाव करने के बारे में कभी सोचा है. देश की छोड़िए, बिहार की ही जेलों में सैकड़ों ऐसे आम लोग बंद पड़े होंगे, जो छोटी मोटी सज़ा पूरा कर लेने के बावजूद उनकी रिहाई की प्रक्रिया पूरी नहीं हो पा रही है और वे जेल में बंद रहने को मजबूर हैं. क्या सिर्फ़ चंद वोट के लिए एक निर्वाचित सरकार हत्यारे को फायदा पहुंचाने के लिए राज्य के किसी भी नियम में बदलाव कर सकती है, सबसे बड़ा सवाल यही है. राजनीति अपनी जगह है, लेकिन राज्य में, समाज में वो माहौल बनाना भी सरकार के साथ बड़े राजनीतिक दलों की जिम्मेदारी होती है, जिससे भविष्य में दोबारा जी कृष्णैया जैसी घटना न हो. आनंद मोहन से जुड़े प्रकरण में निकला ये सबसे बड़ा सवाल है, जिस पर बिहार की जनता  बिल्कुल बेबस नज़र आती है और ये कोई हाल फिलहाल की बात नहीं है. इस तरह के मसले पर बिहार की जनता पिछले कई दशकों से ऐसे ही बेबस है. जेडीयू और आरजेडी के कुछ नेता तो अब ये तक कह रहे हैं कि आनंद मोहन हत्यारा था ही नहीं. इनमें कभी जेडीयू में रहे लेकिन फिलहाल आरजेडी नेता शिवानंद तिवारी भी शामिल हैं. इन नेताओं का ये बयान सरासर कोर्ट का अपमान है, हालांकि किसी भी पार्टी के लिए ये मुद्दा है ही नहीं.

दरअसल ग़लती इन नेताओं की नहीं है. ग़लती हम जैसे लोगों की है, जो माफिया और अपराधियों या फिर बाहुबलियों के डर के साथ आडंबर में आकर उनका वोट बैंक बन जाते हैं. आनंद मोहन की रिहाई के लिए जिस तरह का फैसला नीतीश कुमार की सरकार ने लिया है, वो दिखाता है कि इनको या बाकी पार्टियों के बड़े-बड़े नेताओं को राज्य की जनता का कोई डर है ही नहीं. इनको बस वोट समीकरणों को साधना आता है और वे जानते हैं कि जनता ये सब एक-दो दिन में भूल जाएगी और ये नेता लोग ये भी जानते हैं कि वे राज्य के आम लोगों को फिर से उन मुद्दों पर ही वोट देने वाला मतदाता में तब्दील कर देंगे, जिन मुद्दों का सरोकार जनता से नहीं होगा, बल्कि जिन मुद्दों को वो लोग जनता के बीच बनाएंगे.

मनमाने तरीके से फैसला लेने वाली सरकार को पता है कि आनंद मोहन जैसे प्रकरण से उनके वोट बैंक पर कोई असर नहीं पड़ने वाला. इसके साथ ही बीजेपी जैसे दूसरे दलों को भी पता है कि इस तरह के मुद्दों को लेकर जनता के पास जाने से जनता ही जागरूक होगी, जो उनके भविष्य की राजनीति के लिए नुकसानदायक है. कोई नहीं जानता कि एक बार जेल से रिहाई के बाद आनंद मोहन को किस दल से जुड़े जाएं. इसलिए बीजेपी भी इस मामले में दिखावा के अलावा कुछ नहीं कर रही है. अगर सचमुच बीजेपी आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय को इस बात की चिंता है, कि इससे बिहार की राजनीति में अपराध और बाहुबली जैसी चीजों को बढ़ावा मिलेगा तो उनको पहले अपने पार्टी के बड़े नेताओं को इस मुद्दे पर सड़क पर उतारने के लिए प्रोत्साहित करने के नजरिए से ट्वीट करने की जरूरत है.

कहने का मतलब ये है कि इस तरह के मामलों में हर पार्टी का एजेंडा लगभग समान ही है और कोई बड़ा बदलाव तभी आएगा जब आम लोग, आम नागरिक इस तरह की चीजों को समझेंगे और उसके हिसाब से अपने जनप्रतिनिधियों पर सवाल खड़े करेंगे. अगर ऐसा नहीं हुआ तो भविष्य में भी सरकार चाहे किसी पार्टी की हो, उसके जरिए इस तरह के फैसले लिए जाते रहेंगे और हम आप बस मूकदर्शक बनकर भुक्तभोगी बनते रहेंगे.

(ये आर्टिकल निजी विचारों पर आधारित है)

View More

ओपिनियन

Sponsored Links by Taboola
25°C
New Delhi
Rain: 100mm
Humidity: 97%
Wind: WNW 47km/h

टॉप हेडलाइंस

अमेरिका-ईरान जंग की आड़ में भारत के खिलाफ गंदी हरकत कर रहा पाकिस्तान, राजनाथ सिंह बोले - 'इस बार...'
अमेरिका-ईरान जंग की आड़ में भारत के खिलाफ गंदी हरकत कर रहा पाकिस्तान, राजनाथ सिंह बोले - 'इस बार...'
अवध ओझा ने राहुल गांधी को दी 2 खास सलाह, कहा- 'वो अच्छे नेता बन रहे हैं लेकिन...'
अवध ओझा ने राहुल गांधी को दी 2 खास सलाह, कहा- 'वो अच्छे नेता बन रहे हैं लेकिन...'
मुस्लिम देश ने पाकिस्तान को मारा तमाचा, बंद कर दी ये बड़ी सुविधा, भारत को मिल रही बड़ी छूट
मुस्लिम देश ने पाकिस्तान को मारा तमाचा, बंद कर दी ये बड़ी सुविधा, भारत को मिल रही बड़ी छूट
कौन हैं समीर रिजवी? जिन्होंने पहले 9 गेंदों पर 0 रन बनाए फिर 47 गेंदों में 70 रन की पारी खेल अकेले पलट दी हारी हुई बाजी
कौन हैं समीर रिजवी? जिन्होंने पहले 9 गेंदों पर 0 रन बनाए फिर 47 गेंदों में 70 रन की पारी खेल अकेले पलट दी हारी हुई बाजी
ABP Premium

वीडियोज

धुरंधर: द रिवेंज | LTF ऑफिसर ऋषभ वर्मा, संजय दत्त संग काम और आदित्य धर की पीक डिटेलिंग पर खास बातचीत
Iran Israel War Update: लेबनान में मारा गया ईरानी कुद्स फोर्स का बड़ा कमांडर | Trump Surrender
Iran Israel War Update: महायुद्ध का 'सरेंडर' मोड..ये है Trump का 'एग्जिट प्लान'  | Trump on Iran War
Iran Israel War Ending: अब लंबा नहीं चलेगा युद्ध, खत्म होने की कगार पर लड़ाई! | Iran US Israel
Trump Surrender: महायुद्ध का मैदान छोड़.. भागने को मजबूर ट्रंप? | Iran Israel War Update | Breaking

पर्सनल कार्नर

टॉप आर्टिकल्स
टॉप रील्स
अमेरिका-ईरान जंग की आड़ में भारत के खिलाफ गंदी हरकत कर रहा पाकिस्तान, राजनाथ सिंह बोले - 'इस बार...'
अमेरिका-ईरान जंग की आड़ में भारत के खिलाफ गंदी हरकत कर रहा पाकिस्तान, राजनाथ सिंह बोले - 'इस बार...'
अवध ओझा ने राहुल गांधी को दी 2 खास सलाह, कहा- 'वो अच्छे नेता बन रहे हैं लेकिन...'
अवध ओझा ने राहुल गांधी को दी 2 खास सलाह, कहा- 'वो अच्छे नेता बन रहे हैं लेकिन...'
मुस्लिम देश ने पाकिस्तान को मारा तमाचा, बंद कर दी ये बड़ी सुविधा, भारत को मिल रही बड़ी छूट
मुस्लिम देश ने पाकिस्तान को मारा तमाचा, बंद कर दी ये बड़ी सुविधा, भारत को मिल रही बड़ी छूट
कौन हैं समीर रिजवी? जिन्होंने पहले 9 गेंदों पर 0 रन बनाए फिर 47 गेंदों में 70 रन की पारी खेल अकेले पलट दी हारी हुई बाजी
कौन हैं समीर रिजवी? जिन्होंने पहले 9 गेंदों पर 0 रन बनाए फिर 47 गेंदों में 70 रन की पारी खेल अकेले पलट दी हारी हुई बाजी
Dhurandhar 2 BO Day 15 Live: हनुमान जयंती की छुट्टी का 'धुरंधर 2' को फायदा, 12 बजे तक कर डाला इतना कलेक्शन
लाइव: हनुमान जयंती की छुट्टी का 'धुरंधर 2' को फायदा, 12 बजे तक कर डाला इतना कलेक्शन
Explained: धीमी सांस, ढीला पड़ता शरीर और 2 घंटे में बन जाते जॉम्बी... क्या भारत तक पहुंच गया त्वचा सड़ाने वाला ड्रग?
धीमी सांस, ढीला शरीर और 2 घंटे में बन जाते जॉम्बी! क्या भारत पहुंच गया त्वचा सड़ाने वाला ड्रग?
West Bengal Election 2026: बंगाल के इस लेटेस्ट सर्वे ने चौंकाया, बीजेपी को 100 से अधिक सीटें मिलने का अनुमान, TMC को नुकसान, किसकी बन सकती है सरकार
बंगाल के इस लेटेस्ट सर्वे ने चौंकाया, बीजेपी को 100 से अधिक सीटें मिलने का अनुमान, TMC को नुकसान
CBSE Board 10th Result 2026 : छात्रों का इंतजार खत्म, CBSE बोर्ड 10वीं का रिजल्ट इस तारीख को हो सकता है जारी
छात्रों का इंतजार खत्म, CBSE बोर्ड 10वीं का रिजल्ट इस तारीख को हो सकता है जारी; इस डायरेक्ट लिंक से करें चेक
Embed widget