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Rear Wiper Function: कुछ कारों में Rear Wiper होता है, कुछ में नहीं, आखिर इसके पीछे कौन सी इंजीनियरिंग है?

कार के आगे लगे वाइपर की तरह ही रियर वाइपर का काम पीछे की विंडशील्ड को साफ रखना होता है. धूल, मिट्टी, या अन्य गंदगी के कारण पीछे का शीशा धुंधला हो जाए तो ड्राइवर को पीछे देखने में परेशानी हो सकती है.

Rear Wiper Function: कार खरीदते समय लोग इंजन, माइलेज सेफ्टी फीचर्स और डिजाइन पर तो ध्यान देते हैं, लेकिन कई बार एक छोटी सी चीज भी सवाल खड़े कर देती है. सड़कों पर चलते हुए आपने देखा होगा कि कुछ कारों के पीछे वाले शीशे पर वाइपर दिया जाता है, जबकि कई कारों में यह फीचर बिल्कुल नहीं मिलता. खासतौर पर सेडान कारों में रियर वाइपर लगभग नदारद होता है, जबकि हैचबैक, एमपीवी और एसयूवी में यह आम फीचर माना जाता है. ऐसे में चलिए अब आपको बताते हैं कि कुछ कारों में रियर वाइपर होता है और कुछ में नहीं आखिर इसके पीछे की कौन सी वजह है. 

क्या होता है रियर वाइपर का काम?

कार के आगे लगे वाइपर की तरह ही रियर वाइपर का काम पीछे की विंडशील्ड को साफ रखना होता है. बारिश, धूल, मिट्टी, कीचड़ या अन्य गंदगी के कारण पीछे का शीशा धुंधला हो जाए तो ड्राइवर को पीछे देखने में परेशानी हो सकती है. ऐसी स्थिति में रियर वाइपर शीशे को साफ कर विजिबिलिटी बेहतर बनाता है और सुरक्षित ड्राइविंग में मदद करता है. 

हैचबैक और एसयूवी में क्यों जरूरी होता है रियर वाइपर?

सेडान के मुकाबले हैचबैक, एमपीवी और एसयूवी के डिजाइन अलग होती है. इन वाहनों का पिछला हिस्सा सीधा या सपाट होता है. ऐसी कंडीशन में पीछे की विंडशील्ड पर हवा का प्रभाव उतना प्रभावी नहीं होता, जिससे धूल, मिट्टी, पानी और कीचड़ शीशे पर जमा होने लगते हैं. अगर वाहन कच्चे रास्तों, ऑफ रोड, ट्रैक या धूल भरी सड़कों पर चलता है तो पीछे का शीशा जल्दी गंदा हो सकता है. ऐसे में रियर वाइपर काफी उपयोगी साबित होता है, क्योंकि ड्राइवर को बार-बार गाड़ी से उतरकर शीशा साफ नहीं करना पड़ता. 

हर कार में क्यों नहीं दिया जाता है रियर वाइपर? 

ऑटोमोबाइल कंपनी रियर वाइपर को जरूरत और वाहन के डिजाइन के हिसाब से देती है. यही वजह है कि यह फीचर मुख्य रूप से हैचबैक, एमपीवी और एसयूवी में देखने को मिलता है. कई कंपनियां इसे केवल टॉप वैरियंट में उपलब्ध कराती है, जबकि एंट्री और मिड वेरिएंट में यह फीचर नहीं दिया जाता है. 

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रियर वाइपर के पीछे कौन सी इंजीनियरिंग?

कारों में रियर वाइपर देना या न देना सिर्फ फीचर की बात नहीं, बल्कि पूरी तरह वाहन की एयरोडायनेमिक इंजीनियरिंग पर निर्भर करता है. जब कोई कार तेज गति से चलती है, तो उसके चारों ओर हवा का एक खास पैटर्न बनता है. सेडान कारों में छत से होकर गुजरने वाली हवा पीछे की ढलानदार डिक्की और ग्लास के ऊपर से आसानी से निकल जाती है. इस वजह से पीछे के शीशे पर धूल, पानी और गंदगी अपेक्षाकृत कम जमा होती है. यही कारण है कि अधिकांश सेडान कारों में रियर वाइपर की जरूरत नहीं पड़ती. वहीं हैचबैक, एमपीवी, एसयूवी  जैसी कारों का पिछला हिस्सा लगभग सपाट होता है, इसी बनावट के कारण वाहन के पीछे कम दबाव वाला क्षेत्र बन जाता है, इसलिए इसमें रियर वाइपर लगाया जाता है. 

सिर्फ रियर नहीं, फ्रंट वाइपर भी है जरूरी 

कार में लगे वाइपर केवल बारिश का पानी हटाने के लिए नहीं होते, बल्कि यह धूल, मिट्टी, कीचड़, बड़े बर्फ, कीड़े-मकोड़े और दूसरी गंदगी को हटाकर ड्राइवर को साफ नजर उपलब्ध कराते हैं. रात के समय खराब मौसम में भी वाइपर विजिबिलिटी बेहतर बनाने में मदद करते हैं. कारों में आमतौर पर कन्वेंशनल फ्लैट और हाइब्रिड वाइपर जैसे अलग-अलग प्रकार के वाइपर इस्तेमाल किए जाते हैं. इसके नियमित रखरखाव की भी जरूरत होती है, क्योंकि घिसे हुए या खराब वाइपर शीशे को ठीक तरह से साफ नहीं कर पाते और इससे ड्राइविंग के दौरान परेशानी बढ़ सकती है.

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कविता गाडरी बीते कुछ साल से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता की दुनिया से जुड़ी हुई है. राजस्थान के जयपुर से ताल्लुक रखने वाली कविता ने अपनी पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय भोपाल से न्यू मीडिया टेक्नोलॉजी में मास्टर्स और अपेक्स यूनिवर्सिटी जयपुर से बैचलर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में की है. 
पत्रकारिता में अपना सफर उन्होंने राजस्थान पत्रिका से शुरू किया जहां उन्होंने नेशनल एडिशन और सप्लीमेंट्स जैसे करियर की उड़ान और शी न्यूज के लिए बाय लाइन स्टोरी लिखी. इसी दौरान उन्हें हेलो डॉक्टर शो पर काम करने का मौका मिला. जिसने उन्हें न्यूज़ प्रोडक्शन के लिए नए अनुभव दिए. 

इसके बाद उन्होंने एबीपी नेटवर्क नोएडा का रुख किया. यहां बतौर कंटेंट राइटर उन्होंने लाइफस्टाइल, करंट अफेयर्स और ट्रेडिंग विषयों पर स्टोरीज लिखी. साथ ही वह कंटेंट मैनेजमेंट सिस्टम और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी लगातार सक्रिय रही. कविता गाडरी हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में दक्ष हैं. न्यूज़ राइटिंग रिसर्च बेस्ड स्टोरीटेलिंग और मल्टीमीडिया कंटेंट क्रिएशन उनकी खासियत है. वर्तमान में वह एबीपी लाइव से जुड़ी है जहां विभिन्न विषयों पर ऐसी स्‍टोरीज लिखती है जो पाठकों को नई जानकारी देती है और उनके रोजमर्रा के जीवन से सीधे जुड़ती है.

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