कारों में CNG हिट, बाइक में क्यों है फ्लॉप?
Why CNG Bikes Fail: कारों में हिट रहने वाली CNG टेक्नोलॉजी बाइक्स में क्यों फ्लॉप हो रही है? जानिए सेफ्टी, वजन के असंतुलन, टैंक कैपेसिटी और परफॉर्मेंस से जुड़े वो कारण जो बाइक में रोड़ा बन रहे हैं.

Why CNG Bikes Fail: भारती में जब भी सस्ते सफर और ज्यादा माइलेज की बात आती है तो सबसे पहले सीएनजी का नाम दिमाग में आता है. कारों में तो सीएनजी टेक्नोलॉजी पूरी तरह सुपरहिट साबित हुई है. मारुति, टाटा और महिंद्रा जैसी कंपनियां धड़ाधड़ सीएनजी कारें बेच रही हैं.
लेकिन वहीं दूसरी तरफ टू-व्हीलर सेगमेंट यानी बाइक्स में सीएनजी का फॉर्मूला अब तक पूरी तरह फ्लॉप ही नजर आ रहा है. आखिर क्या वजह है कि जो सीएनजी कारों में इतनी कामयाब है और मोटरसाइकिलों में रफ्तार नहीं पकड़ पा रही है. तो चलिए जानतें हैं इसके पीछे के असली कारण.
कार में क्यों है सफल?
बता दें कि, कारों में सीएनजी के सुपरहिट होने की सबसे बड़ी वजह उनका बड़ा साइज और मजबूत ढांचा है. कारों की डिग्गी में सीएनजी सिलिंडर आसानी से फिट हो जाता है और अब तो ट्विन-सिलिंडर टेक्नोलॉजी की वजह से सामान रखने की जगह भी बच जाती है.
इसके अलावा चार पहिया गाड़ियों का वजन ज्यादा होता है जिससे भारी सिलिंडर रखने के बाद भी गाड़ी का बैलेंस नहीं बिगड़ता. कार का कवर्ड बॉडी स्ट्रक्चर एक्सीडेंट की स्थिति में सीएनजी टैंक को सुरक्षित रखता है जिससे आग लगने या लीकेज का खतरा काफी कम हो जाता है.
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बाइक में क्यों नहीं हो पाया सफल?
जबकि मोटरसाइकिल में सबसे बड़ी चुनौती होती है भारी और बड़े सीएनजी सिलिंडर को सुरक्षित तरीके से फिट करना. बाइक का फ्रेम छोटा और खुला होता है. अगर सीट के नीचे या फ्रेम पर भारी सिलिंडर लगाया जाता है तो गाड़ी का सेंटर ऑफ ग्रेविटी बिगड़ जाता है.
इससे मोड़ पर या इमरजेंसी ब्रेकिंग के दौरान बाइक के फिसलने और गिरने का जोखिम बहुत बढ़ जाता है. इसके अलावा खुले में सीएनजी टैंक होने से छोटे-मोटे एक्सीडेंट में भी लीकेज या बड़ा हादसा होने का डर हमेशा बना रहता है जो राइडर की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा है.
छोटे टैंक की झंझट
बता दें कि, सीएनजी फ्यूल पर चलते समय पेट्रोल के मुकाबले इंजन की पावर और टॉर्क में लगभग 10 से 15 फीसदी तक की कमी आ जाती है. कारों में बड़ा इंजन होने की वजह से यह गिरावट ज्यादा महसूस नहीं होती. लेकिन 100 से 125 सीसी की छोटी बाइक्स में पावर कम होने से चढ़ाई या ओवरटेकिंग के वक्त बाइक सुस्त महसूस होने लगती है.
इसके अलावा बाइक का सीएनजी टैंक काफी छोटा होता है. जिससे हर 100-150 किलोमीटर के बाद सीएनजी पंप के चक्कर लगाने पड़ते हैं और लंबी लाइनों में खड़े रहना पड़ता है जो आम बाइक राइडर के लिए सिरदर्द बन जाता है.
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