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V2V Technology: हादसा होने से पहले मिलेगा अलर्ट! आपस में बात करेंगी गाड़ियां

सड़क हादसों को रोकने के लिए सरकार ला रही है V2V (व्हीकल टू व्हीकल) तकनीक. अब 2028 से नई गाड़ियों में लागू होगा AIS-230 मानक. दुर्घटना से पहले ही ड्राइवर को मिल जाएगा अलर्ट.

केंद्र सरकार अब एक ऐसी तकनीक लाने की तैयारी कर रही है जिसमें सड़क पर चल रही गाड़ियां आपस में एक दूसरे को अपनी जानकारी भेजती रहेंगी. खतरा होने पर ड्राइवर को पहले ही अलर्ट मिल जाएगा. सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने इसके लिए ड्राफ्ट नियम जारी कर दिया है.

आपस में गाड़ी कैसे बात करेगी? आसान भाषा में समझिए

मान लीजिए आप हाईवे पर चल रहे हैं. आपसे तीन गाड़ी आगे किसी ने अचानक जोर से ब्रेक लगाया. आपको वो गाड़ी दिख भी नहीं रही लेकिन आपकी गाड़ी में तुरंत अलर्ट बज जाएगा. यही काम करता है V2V यानि vehicle to vehicle सिस्टम.

इस तकनीक में हर गाड़ी आसपास की गाड़ियों को लगातार बताती रहती है कि वो कितनी रफ्तार से चल रही है, कहां है, किस तरफ जा रही है और उसकी स्पीड बढ़ रही है या कम हो रही है.

किन हालात में काम आएगा?

  • आगे वाली गाड़ी अचानक ब्रेक लगाए तो अलर्ट मिलेगा. टक्कर का खतरा हो तो चेतावनी मिलेगी. 
  • कोई गाड़ी गलत दिशा से आ रही हो तो पता चल जाएगा. 
  • पीछे से एंबुलेंस या फायर ब्रिगेड आ रही हो तो पहले ही जानकारी मिल जाएगी.

अभी से अलग कैसे है?

आजकल गाड़ियों में जो सेंसर और कैमरे लगे होते हैं वो सिर्फ उतना ही देख पाते हैं जितना सामने दिख रहा है. मोड़ के पीछे या ट्रक के आगे क्या हो रहा है, ये उन्हें पता नहीं चलता. V2V उस जानकारी को भी पकड़ लेता है जो आंख से या कैमरे से नहीं दिखती.

कैसे भेजी जाएगी जानकारी?

इसके लिए 5.9 गीगाहर्ट्ज का एक खास रेडियो बैंड तय किया गया है. दूरसंचार विभाग ने जून 2026 में इसे लाइसेंस की जरूरत से छूट दे दी है यानी इस बैंड को इस्तेमाल करने के लिए कंपनियों को अलग से इजाजत नहीं लेनी पड़ेगी.

कब से लागू होगा?

दो तारीखें तय की गई हैं.

  • 1 अक्टूबर 2027 से जो गाड़ियां बनेंगी उनमें अगर ये सिस्टम लगा है तो वो सरकार के तय मानक AIS-230 के हिसाब से होना चाहिए. यानी इस वक्त तक लगाना जरूरी नहीं है.
  • 1 अक्टूबर 2028 से बनने वाली गाड़ियों में ये सिस्टम लगाना जरूरी होगा.

ये नियम L, M और N कैटेगरी की गाड़ियों पर लागू होगा. L में दोपहिया और तिपहिया आते हैं. M में सवारी ढोने वाली गाड़ियां जैसे कार और बस. N में सामान ढोने वाली गाड़ियां जैसे ट्रक.

आपकी पुरानी गाड़ी का क्या?

ये नियम सिर्फ नई बनने वाली गाड़ियों पर लागू होगा. जो गाड़ियां पहले से सड़क पर हैं उनमें ये सिस्टम लगवाने की बात ड्राफ्ट में नहीं कही गई है. हालांकि, अभी सिर्फ ड्राफ्ट है. लोगों और कंपनियों से सुझाव मांगे गए हैं. 30 दिन बाद इन सुझावों पर विचार होगा और तब जाकर फाइनल नियम जारी होगा यानी तारीखों में बदलाव भी हो सकता है.

ये भी पढ़ें: NHAI का बड़ा कदम, एक्सप्रेसवे पर किया टोल फ्री सफर

About the author वरुण भसीन

वरुण भसीन एबीपी न्यूज़ में प्रिंसिपल कॉरेस्पॉन्डेंट हैं. पिछले 9 साल से पत्रकारिता कर रहे हैं. वे एयरलाइंस, रेलवे और सड़क-परिवहन से जुड़ी खबरें कवर करते हैं. इससे पहले वे कई संस्थानों में काम कर चुके हैं. वरुण न्यूज जगत से जुड़ी डॉक्यूमेंट्री फिल्में भी बनाते आए हैं. वरुण ने MBM यूनिविर्सिटी जोधपुर से पढ़ाई की है. संपर्क करने के लिए मेल आईडी है- varunb@abpnetwork.com

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