US में ट्रक चलाने वालों के लिए नई शर्त, सिर्फ अंग्रेजी में होगी CDL टेस्ट, भारतीय ड्राइवर्स पर होगा असर?
अमेरिका में ट्रक और बस ड्राइवरों के लिए CDL टेस्ट अब केवल अंग्रेजी में अनिवार्य होगा. आइए जानें नए नियम, कारण और भारतीय ड्राइवर्स पर इसका कितना असर होने वाला है.

अमेरिका में ट्रक और बस ड्राइवर्स के लिए कमर्शियल ड्राइविंग लाइसेंस यानी CDL टेस्ट अब केवल अंग्रेजी भाषा में देना अनिवार्य कर दिया गया है. पहले कई राज्यों में ड्राइवर्स को अलग-अलग भाषाओं में टेस्ट देने की अनुमति थी. जैसे कैलिफोर्निया में करीब 20 भाषाओं में परीक्षा दी जा सकती थी, लेकिन अब संघीय स्तर पर यह तय किया गया है कि सभी CDL परीक्षाएं सिर्फ अंग्रेजी में ही होंगी. सरकार का कहना है कि यह कदम सड़क सुरक्षा को बेहतर बनाने के लिए उठाया गया है. अधिकारियों के अनुसार, ड्राइवर्स को सड़क के संकेत पढ़ने और पुलिस या ट्रैफिक अधिकारियों से अंग्रेजी में बात करने में सक्षम होना चाहिए. इससे नियमों का पालन ठीक से होगा और हादसों को रोका जा सकेगा.
दुर्घटनाओं के बाद बढ़ी सख्ती
दरअसल, पिछले कुछ वर्षों में कई गंभीर सड़क हादसों के बाद यह मुद्दा चर्चा में आया. कुछ मामलों में पाया गया कि ड्राइवर अंग्रेजी ठीक से नहीं समझ पा रहे थे या उनके दस्तावेज सही नहीं थे. एक हादसे में गलत यू-टर्न लेने से तीन लोगों की मौत हो गई. जांच में सामने आया कि ड्राइवर अंग्रेजी में संवाद नहीं कर पा रहा था. इसी तरह एक और दुर्घटना में चार लोगों की जान गई. इन घटनाओं के बाद सरकार ने ट्रकिंग इंडस्ट्री की जांच शुरू की. हाल ही में किए गए हजारों inspections में सैकड़ों ड्राइवर्स को अंग्रेजी भाषा की कमी के कारण अयोग्य घोषित किया गया. सरकार ने कई ड्राइविंग स्कूलों को भी बंद करने का आदेश दिया है, जो नियमों का पालन नहीं कर रहे थे.
भारतीय ड्राइवर्स पर क्या असर पड़ेगा?
बता दें कि अमेरिका में बड़ी संख्या में भारतीय, खासकर पंजाबी समुदाय के लोग ट्रक ड्राइवर के रूप में काम करते हैं. नए नियम से उनके लिए अंग्रेजी जानना और भी जरूरी हो जाएगा. जो लोग अंग्रेजी में कमजोर हैं, उन्हें अब लाइसेंस पाने या Renew कराने में दिक्कत हो सकती है. भारत से जो लोग भविष्य में अमेरिका में काम करने का सोच रहे हैं, उन्हें पहले से अंग्रेजी की तैयारी करनी होगी.
वैश्विक लॉजिस्टिक्स और व्यापार पर असर
अमेरिका दुनिया का बड़ा लॉजिस्टिक्स बाजार है. वहां नियम सख्त होने से ट्रकिंग कंपनियों की जांच और बढ़ेगी. इससे सप्लाई चेन और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी असर पड़ सकता है. अगर ड्राइवर्स की कमी होती है, तो सामान की ढुलाई में देरी हो सकती है.
Source: IOCL























